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यूरोप डायरी: यूरोपीय आईटी कंपनियों की पसंद भारतीय पेशेवर

Wed, 25 May 2022 01:27 PM IST
Priyamvada Sahay प्रियंवदा सहाय
Updated Wed, 25 May 2022 01:27 PM IST
सार

प्रवासी भारतीयों की संख्या दुनिया भर में बढ़ रही है। केवल यूरोप कि बात करें तो यहां करीब तीस लाख से ज्यादा प्रवासी रहते हैं। पिछले कुछ सालों में डेनमार्क, इटली, जर्मनी, नीदरलैंड प्रवासी भारतीयों का पसंदीदा देश रहा है।

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Indian professionals is the first choice of European IT companies
स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम को यूरोप का सिलीकॉन वैली कहा जाता है - फोटो : प्रियंवदा सहाय

विस्तार

प्रवासी भारतीयों की संख्या दुनिया भर में बढ़ रही है। केवल यूरोप कि बात करें तो यहां करीब तीस लाख से ज्यादा प्रवासी रहते हैं। पिछले कुछ सालों में डेनमार्क, इटली, जर्मनी, नीदरलैंड प्रवासी भारतीयों का पसंदीदा देश रहा है। और अब उन्होंने स्वीडन की ओर रूख करना शुरू किया है। यहां आने वाले प्रवासियों में सबसे ज्यादा पेशेवर आईटी क्षेत्र में कार्यरत हैं। क्योंकि यहां कि कंपनियों के लिए भारतीय कामकाजी सबसे पसंदीदा पेशेवर बन चुके हैं। 

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यूरोप का सिलीकॉन वैली

स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम को यूरोप का सिलीकॉन वैली कहा जाता है, जहां दुनिया की कई नामचीन कंपनियों और स्टार्टअप्स का मुख्यालय है। Spotify, Skype, iZettle, truecaller, King, Storytel, Sinch, teamtailor जैसे तमाम बड़े स्टार्टअप्स के नाम इनमें शामिल हैं। वहीं Volvo, IKEA, H&M, Electrolux, Ericsson, Sandvik, Scania,SKF, Alfa laval, Saab जैसी नामचीन स्वीडिश कंपनियों ने अपने यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पेशेवरों के लिए दरवाजे खोले हैं। इन कंपनियों में पेशेवरों की कमी पूरी करने का काम मुख्यरूप से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स कर रहे हैं।
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यही वजह है कि यहां रहने वाले अधिकांश प्रवासी भारतीय आईटी कंपनियों से जुड़े हुए हैं। यानी भारतीय इंजीनियरों की मांग, आईटी कंपनियों के विस्तार और तेजी से हो रहे बाजारीकरण के कारण यहां भारतीयों की संख्या बढ़ रही है। यहां शायद ही कोई ऐसी आईटी कंपनी हो जहां भारतीय काम नहीं करते।

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जबकि ज्यादातर कंपनियों में अहम जिम्मेदारी उठा रहे लोगों में भी भारतीय अव्वल हैं। दिलचस्प बात यह है कि अगर कोई भारतीय किसी अनजान स्वीडिश से मिले तो वे बेबाकी से कहते हैं कि आप निश्चित तौर पर इंजीनियर रहे होंगे या आपका बैकग्राउंड इंजीनियरिंग का रहा होगा तभी आपने यहां का रूख किया होगा।

Indian professionals is the first choice of European IT companies
पिछले साल स्वीडिश नागरिकों व स्वीडिश मूल के लोगों की बड़ी संख्या में घर वापसी हुई - फोटो : प्रियंवदा सहाय

सबसे पहले भारत को तवज्जों

एक स्वीडिश आईटी कंपनी में कार्यरत एक महिला ने जब कार्यालय के सहयोगियों के बारे में चर्चा शुरू की तो बताया कि उनके यहां स्वीडन के बाहर से अगर किसी आईटी प्रोफेशनल को लाने की बात होती है तो इसमें सबसे पहले भारत को तवज्जों दी जाती है। लोगों का मानना है कि भारत में बच्चों की पढ़ाई में विज्ञान और गणित पर विशेष जोर दिया जाता है। यही वजह है कि वहां ज्यादातर बच्चे आईटी क्षेत्र का रूख कर लेते हैं। इन बच्चों के शैक्षणिक आधार मजबूत होने की वजह से ही दुनिया भर में भारतीय इंजीनियरों की मांग रही है। ये उच्च गुणवत्ता वाले पेशेवर इंजीनियरों की श्रेणी में आते हैं। 

यहां के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल स्वीडन के लिए सबसे ज्यादा भारतीयों ने कूच किया है। पिछले साल स्वीडिश नागरिकों व स्वीडिश मूल के लोगों की बड़ी संख्या में घर वापसी हुई। इसके बाद भारतीय दूसरे स्थान पर रहे जिन्होंने स्वीडन का रूख किया था। यह भी जानने लायक है कि पिछले पांच-छह सालों में प्रवासी भारतीयों की संख्या यहां करीब दोगुनी हो चुकी है। वर्तमान में यहां तकरीबन 50 हजार प्रवासी भारतीय रहते हैं। यहां प्रवासी भारतीयों की संख्या बढ़ने के कई कारण हैं।

ये बातें करती हैं भारतीयों को आकर्षित

लेकिन इस बात से सभी प्रवासी सहमत हैं कि स्वीडन की सामाजिक व्यवस्था उन्हें सबसे ज्यादा आकृष्ट करती है। आसान जीवन, उच्च स्तरीय जीवन शैली, शुद्ध वातावरण, भ्रष्टाचार मुक्त समाज में कई देशों की संस्कृति का मिश्रण जैसी कई बातें प्रवासी भारतीयों को आकर्षित करती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि स्वीडन में रहने वाले करीब बीस लाख लोगों की जन्मस्थली कोई अन्य देश है। यानी यहां रहने वाला प्रत्येक पांचवा व्यक्ति फॉरेन बॉर्न है।
 

यहां भारत से आए पेशेवर मानते हैं कि उन्हें काम के लिए बेहतरीन माहौल मिलने के साथ-साथ लैंगिक समानता, समावेशित सामाजिक व्यवस्था, शिक्षा प्रणाली जैसी चीजों ने भी प्रभावित किया है। यही वजह है कि जब कोई भारतीय यहां नौकरी के लिए आता है तो वह यहां अपना दूसरा आशियाना बसाने के बारे में सोचता है।


एक पहलू यह भी है कि दूसरे दक्षिण एशियाई देशों के मुकाबले भारत से आने वाले पेशेवरों की उच्च शैक्षणिक योग्यता होती है। इनके साथ आने वाले परिजन भी पढ़े लिखे अंतर्राष्ट्रीय माहौल में आसानी से घुलने मिलने वाले होते हैं। इसलिए यहां के स्थानीय लोगों को भी भारतीय काफी पसंद हैं। वे उन्हें एक पढ़े लिखे दोस्ताना रवैया वाले प्रवासी मानते हैं। जिससे भारतीयों को यहां रहने में सामाजिक भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ता और वे यहां ज्यादा सुकून महसूस करते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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