भारत-फ्रांस की दोस्ती अमर रहे: कई महत्वपूर्ण समझौतों के साथ रिश्तों में और प्रगाढ़ता की उम्मीद
प्रधानमंत्री मोदी की इस ऐतिहासिक यात्रा ने भारत और फ्रांस के रिश्तों में जो मजबूती प्रदान की है वो निश्चित तौर पर आने वाले समय में और प्रगाढ़ होगी। फ्रांस ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने देश के सर्वोच्य सम्मान 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ लीजन ऑफ ऑनर' से भी सम्मानित किया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेल्फी लेते हुए सोशल मीडिया पर हिन्दी में लिखा- ''भारत और फ्रांस के बीच दोस्ती अमर रहे!''
मैक्रों द्वारा लिखे गए हिन्दी के इन आठ शब्दों के जरिए दोनों देशों के प्रगाढ़ संबंधों को असानी से समझा जा सकता है। फ्रांस ने अपने हालिया आतिथ्य की बदौलत भारत के साथ रिश्तों की एक नई इबारत लिख डाली है, जिसने आने वाले बेहतर समय के संकेत दिए हैं।
साल 2017 में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के सत्ता में आने के बाद से नरेंद्र मोदी फ्रांस की चार बार यात्रा कर चुके हैं। पर इस बार की यात्रा बेहद खास थी। फ्रांस ने न केवल उन्हें अपने राष्ट्रीय वार्षिक कार्यक्रम 'बैस्टिल डे' में विशिष्ट अतिथि के रूप में बैठाया, साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को अपने देश के सर्वोच्य सम्मान 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ लीजन ऑफ ऑनर' से भी सम्मानित किया। यह फ्रांस का सर्वोच्च नागरिक और सैन्य सम्मान है। यह सम्मान भारत और फ्रांस के रिश्तों के बीच स्वर्णिम इतिहास के तौर पर दर्ज हो गया।
यह दूसरा मौका था जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री को बैस्टिल डे में बुलाया गया था। इससे पहले साल 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसी कार्यक्रम में गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में शिरकत की थी। पर यह पहली बार है कि किसी भारतीय को फ्रांस के सर्वोच्य सम्मान से नवाजा गया है।
इससे पहले फ्रांस ने यह सम्मान दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला, वेल्स के तत्कालीन राजकुमार किंग चार्ल्स, जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बुट्रोस घाली को दिया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी भारतीय प्रधानमंत्री के लिए इस सम्मान का क्या महत्व है।
शानदार रिश्तों की 25वीं वर्षगांठ
प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा के दौरान भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ को भी रेखांकित किया। फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता में प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते पच्चीस वर्षों के मजबूत आधार पर हम आने वाले पच्चीस वर्षों के लिए रोडमैप तैयार कर रहे हैं। इसमें महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। इस यात्रा में हम फ्रांस को एक स्वाभाविक मित्र के रूप में देखते हैं। प्रधानमंत्री का यह बयान अपने आप में रिश्तों की उस बुनियाद को और मजबूती दे गया जो 25 साल पहले भारत के परमाणु परीक्षण के दौरान प्रगाढ़ हुआ था।
दरअसल भू-रणनीतिक तौर पर भारत वर्ष 1998 से ही फ्रांस का बेहद करीबी रहा है। वर्ष 1998 में जब भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था तब फ्रांस एक मात्र बड़ा देश था जो भारत के लिए तटस्थता के साथ खड़ा था। इस परीक्षण के बाद दुनिया के तमाम परमाणु संपन्न मुल्कों ने भारत पर तरह-तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे।
अमेरिका, जर्मनी, जापान और ब्रिटेन ने तो खुले तौर पर भारत को तमाम प्रतिबंधों से घेर लिया था। पर फ्रांस ने उस मुश्किल दौर में भी भारत का न साथ छोड़ा और न हाथ। दोस्ती में एक कदम आगे बढ़ते हुए फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति जाक शिराक ने भारत का दौरा भी किया था। उन्होंने भारत पर लगाए गए प्रतिबंधों को जल्द से जल्द हटाने की खुले तौर पर पैरवी भी की थी।
इंडो-पैसेफिक क्षेत्र में जरूरत
यात्रा से पहले फ्रांस के प्रमुख बिजनेस अखबार 'ला इको' ने प्रधानमंत्री मोदी का साक्षात्कार प्रकाशित किया था।
इस साक्षात्कार में फ्रांस के साथ भारत के संबंधों पर पीएम मोदी ने कहा था कि दोनों देशों की बीच का रिश्ता मजबूत है और यह भरोसे पर टिका है। मुश्किल दौर में भी फ्रांस और भारत का रिश्ता स्थिर रहा है। हम सहयोग के लिए अवसरों की तलाश करते रहे हैं। साक्षात्कार के दौरान मोदी ने फ्रांस को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपना रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को लेकर उनके और मैक्रों के विचार मिलते हैं।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने भी प्रधानमंत्री मोदी का खुले दिल से स्वागत और सत्कार कर जता दिया है कि भारत उनके लिए क्या मायने रखता है। दोनों देशों ने इंडो-पैसेफिक क्षेत्र के लिए रोडमैप तैयार किए जाने की घोषण भी की।
दोनों देशों में महत्वपूर्ण समझौते
अगले 25 सालों में द्विपक्षीय संबंध के तीन आधार स्तंभ तैयार किए गए हैं। इसमें पहला है- सुरक्षा और संप्रभुता के लिए परस्पर साझेदारी। दूसरा है पृथ्वी की रक्षा के लिए साझेदारी। तीसरा है लोगों के लिए साझेदारी।
इस दौरान राफेल जेट से लेकर स्कॉर्पीन पनडुब्बियों पर बातें और समझौते हुए। फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस और इसरो के बीच कई समझौतों के जरिए वैज्ञानिक और वाणिज्यिक साझेदारी को बढ़ावा देने की बात कही गई है। हिंद महासागर के लिए अति महत्वाकांक्षी समुद्री सैटेलाइट तृष्णा पर भी दोनों देशों ने आपसी सहयोग पर सहमति जताई है।
इसके आलावा साल 2030 तक फ्रांस में तीस हजार भारतीय छात्रों का स्वागत करने का नया लक्ष्य रखा गया है। भारतीय छात्रों लिए फ्रांस ने शेंगेन वीजा जारी करने पर भी रजामंदी दी है। शेंगेन एक लंबी अवधि का वीजा है जिसकी मांग भारतीय छात्र लंबे समय से करते आ रहे हैं। यह वीजा पांच सालों के लिए होगा।
यूपीआई का बढ़ता दबदबा
फ्रांस ने अपने यहां भारत के यूपीआई (एकीकृत भुगतान प्रणाली) को मान्यता देकर इस रिश्ते को और मजबूती प्रदान की है। पेरिस के ला सीन म्यूजिकल में प्रवासी भारतीयों के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा-
एक नई विश्व व्यवस्था उभर रही है... एक ऐसी व्यवस्था जहां भारत किसी भी अवसर को जाने नहीं देगा। प्रधानमंत्री ने यूपीआई का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और फ्रांस यहां यूपीआई का उपयोग करने पर सहमत हुए हैं। आने वाले दिनों में इसकी शुरुआत एफिल टॉवर से होगी, जिसका मतलब है कि भारतीय पर्यटक अब रुपये में भुगतान कर सकेंगे।
फ्रांसीसी मीडिया में 2024 के चुनाव की चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा फ्रांसीसी अखबारों में भी छाई रही। वहां के तमाम बड़े अखबारों ने इस यात्रा को काफी तवज्जो दिया है। फ्रांस के प्रमुख बिजनेस अखबार 'ला इको' ने मोदी का साक्षात्कार प्रकाशित कर तमाम मुद्दों पर उनकी बातों को प्रमुखता से रखा। फ्रांस के प्रमुख अखबार ला मोंड ने लिखा है कि मोदी की भारतीय जनता पार्टी 2014 का आम चुनाव जीत कर सत्ता में आई थी और 2024 में भी वह चुनाव जीतने के लिहाज से अच्छी स्थिति में नजर आ रही है।
अखबार ने लिखा है कि भारत लंबे समय तक अहम गुटनिरपेक्ष देश रहा है, लेकिन अब मोदी के नेतृत्व में ये बहुपक्षीय कूटनीति को अपना रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की इस ऐतिहासिक यात्रा ने भारत और फ्रांस के रिश्तों में जो मजबूती प्रदान की है वो निश्चित तौर पर आने वाले समय में और प्रगाढ़ होगी।
-----------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।