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चीन चल रहा है ये खतरनाक कूटनीतिक चाल, मोदी सरकार की विदेश नीति को लग सकता है बड़ा झटका

Thu, 24 Oct 2019 02:09 PM IST
Rajesh Badal राजेश बादल
Updated Thu, 24 Oct 2019 02:09 PM IST
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india foreign policy and china pakistan afghanistan relations modi government
पाकिस्तान ने नए सिरे से तालिबानी नेताओं को अफ़गानी हुकूमत के साथ चीन की मध्यस्थता के लिए तैयार किया है। - फोटो : पीटीआई

चीन से एक बार फिर चौंकाने वाली सूचना आई है। वह पाकिस्तान के ज़रिए अब अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के साथ सरकार की समझौता कराने की कोशिशें कर रहा है। बीजिंग में इस महीने के अंत में दो दिन का एक सम्मेलन हो रहा है। इसमें पाकिस्तानी और अफ़गानी तालिबानी गुटों को एक मंच पर लाकर उनसे बात करने की चीन ने पहल की है।

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तालिबानी प्रवक्ता सुहैल शाहीन के हवाले से आई खबर में कहा गया है कि पाकिस्तानी तालिबान के एक प्रतिनिधि मुल्ला अब्दुल ग़नी बिरादर ने क़तर में चीनी राजदूत से लंबी चर्चा की और इस शिखर सम्मेलन के मुद्दों को अंतिम रूप दिया। अगर यह समझौता हो गया तो भारत और ईरान के लिए तगड़ा झटका होगा।   
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इससे पहले पाकिस्तान ने एक साल तक अमेरिका के साथ तालिबानी नेताओं की गुपचुप वार्ताओं के दौर कराए थे। आठ बार की गंभीर चर्चाओं के बाद अचानक अमेरिका ने पीछे हटने का ऐलान कर दिया था। इससे पाकिस्तान की बड़ी किरकिरी हुई थी।
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अलबत्ता यह भारत के लिए राहत की बात थी, क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण में भारत की बड़ी भूमिका है और वहां की निर्वाचित सरकारें भारत के क़रीब रही हैं। इतना ही नहीं वे पाकिस्तान को भी उनके देश में अशांति पैदा करने के लिए कोसती रही हैं।

अब पाकिस्तान ने नए सिरे से तालिबानी नेताओं को अफ़गानी हुकूमत के साथ चीन की मध्यस्थता के लिए तैयार किया है। हालांकि इसमें अभी सरकार की हिचक बरक़रार है।

चीन पर अफ़गानी हुक़ूमत को पूरी तरह भरोसा नहीं हो रहा है। अगर ऐसा होता है तो इस निष्कर्ष को जल्दबाज़ी में निकाला गया नहीं माना जाना चाहिए कि चीन ने हिन्दुस्तान के मित्र देशों को अपने पाले में लाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास कर दिए हैं। 

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म्यांमार और बांग्लादेश भारत के गहरे मित्र देशों में शुमार हैं। - फोटो : ANI

ग़ौरतलब है कि इससे पूर्व चीन ने म्यांमार और बांग्लादेश के बीच रोहिंग्या मसले का समाधान निकालने के लिए न्यूयॉर्क में एक समझौता करा कर भारतीय विदेश नीति को बड़ा संकेत दिया था। 

म्यांमार और बांग्लादेश भारत के गहरे मित्र देशों में शुमार हैं। लंबे समय तक इन देशों की अपेक्षा थी कि भारत एशिया की एक बड़ी ताक़त होने के नाते इसी तरह का कोई समझौता कराए। लेकिन भारतीय नीति विकलांगता के कारण यह न हो सका। भारत को इससे बड़ा कूटनीतिक झटका लगा था।

इससे पहले हिन्दुस्तान के गहरे मित्र और  पड़ोसी नेपाल को चीन पहले ही अपने प्रभाव में ले चुका है।  मालदीव और श्रीलंका भी चीन के चक्कर में उलझे हुए हैं। वे एक तरह से उसकी पकड़ में आ चुके थे, लेकिन इन देशों में सत्ता परिवर्तन ने भारत को राहत दी थी। मगर अब फिर चीन ने इन देशों की सरकारों के साथ रिश्ते सुधारने शुरू कर दिए हैं।

भारत के लिए यह बेहद सावधान रहने का समय है। भारतीय कूटनीति और विदेश नीति लंबे समय तक चीन की इन चालों के प्रति आंख मूंदें नहीं रह सकती। 

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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