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Digital India Mission: डिजिटल इंडिया मिशन का किस तरह चुनावी फायदा मिलेगा मोदी को

Fri, 24 Nov 2023 07:03 PM IST
Atul sinha अतुल सिन्हा
Updated Fri, 24 Nov 2023 07:03 PM IST
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सार
सामाजिक न्याय मंत्रालय के मुताबिक न्याय विभाग औऱ सीएससी-एसपीवी की ओर से चलाई जा रही टेली लॉ सेवा के तहत अबतक 59 लाख से भी ज्यादा लोगों को मुफ्त कानूनी सलाह का लाभ मिला है...
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How will PM Modi get electoral benefit from Digital India Mission
Digital India Mission - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

चुनाव के इस माहौल में प्रधानमंत्री मोदी की तमाम सभाओं औऱ कार्यक्रमों के दौरान उनका डिजिटल इंडिया मिशन खासा काम आ रहा है। हाल ही में झारखंड के आदिवासियों के बीच पहुंचे मोदी के कार्यक्रमों और जनजाति गौरव यात्रा के दौरान भी उनके इस मिशन का फायदा नज़र आया। अपनी सरकार की दो पारियों की उपलब्धियां गिनाते हुए मोदी के लिए इन यात्राओं में जो मजबूत जनाधार दिख रहा है, वह है ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में चल रहे सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) के उन ग्रामीण उद्यमियों का, जिनकी संख्या अब बीस लाख से भी ज्यादा हो गई है। देशभर में करीब साढ़े पांच लाख सीएससी चल रहे हैं और हरेक सीएससी से कई लोग जुड़े हैं।

इन केंद्रों का मकसद खासकर देश के तमाम गांवों में लोगों को ई-गवर्नेंस की सुविधा देकर सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत सामान्य सेवा केंद्रों (CSC) का एक बड़ा नेटवर्क बनाया है। अगर सरकारी दावे की बात करें, तो संसद में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एक सवाल के जवाब में बताया था कि 2022 की फरवरी तक देशभर में 4,63,705 सीएससी काम कर रहे हैं, जिनमें करीब 15 लाख लोग काम करते हैं। देश के करीब ढाई लाख ग्राम पंचायतों में से ज्यादातर ग्राम पंचायतें इस सेवा से जुड़ी हैं और इन्हें ग्राम स्तरीय उद्यमी यानी वीएलई चलाते हैं।

आम तौर पर देश में लाखों ऐसे लोग हैं, जिन्हें आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति या आवास प्रमाण पत्र जैसे तमाम दस्तावेजों के लिया भटकना पड़ता है। वैसे तो तमाम शहरों में ऐसे कई केंद्र आपको मिल जाएंगे जो मोटी रकम लेकर ये दस्तावेज़ बनवाने का काम करते हैं, लेकिन सरकारी तौर पर सीएससी यह काम करता है औऱ इसके जरिये लोगों को मुफ्त में ये सारी सुविधाएं देता है। और अब तो सरकारी तौर पर मुफ्त कानूनी सहायता देने का काम भी इसके जरिये किया जा रहा है।

सामाजिक न्याय मंत्रालय के मुताबिक न्याय विभाग औऱ सीएससी-एसपीवी की ओर से चलाई जा रही टेली लॉ सेवा के तहत अबतक 59 लाख से भी ज्यादा लोगों को मुफ्त कानूनी सलाह का लाभ मिला है।

अगर आप दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में जाएंगे, तो वहां एमएसएमई के स्टॉल में आपको सीएससी के वालंटियर्स मिल जाएंगे। उनके मुताबिक इस कार्यक्रम से उन्हें काफी लाभ मिला है और यह मोदी सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। उनका कहना है कि वैसे तो इस योजना की शुरुआत कांग्रेस की सरकार के दौरान 2009 में ही हुई थी, लेकिन 2015 में सीएससी 2.0 के बाद डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत इसमें ज़बरदस्त तेजी आई औऱ इसका गांव-गांव में विस्तार हुआ। खासकर सुदूर आदिवासी इलाकों में महिलाओं औऱ दिव्यांगों में इस योजना का विस्तार हुआ है।

ऐसे ही एक लाभार्थी हैं झारखंड के पवन ठाकुर। दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने ग्रामीण उद्यमी यानी वीएलई बनकर अपने साथ अपने गांव वालों की जिंदगी भी संवारी। पवन ठाकुर का रघुनाथपुर गांव आदिवासी बहुल और बेहद पिछड़ा हुआ है। न स्मार्टफोन है औऱ न ही इंटरनेट की सुविधा। लेकिन इस गांव में सीएससी खोलकर वह यहां और आसपास के गांवों के 500 से ज्यादा छात्रों को डिजिटल शिक्षा देने के साथ तमाम सुविधाएं भी दे रहे हैं।

इंटरनेट और मोबाइल के इस ज़माने में एक तरफ तो सरकार सबको ई-गवर्नेंस से जोड़कर हर तरह की सरकारी सेवाओं का लाभ देने की कोशिश कर रही है, वहीं कई ऐसे फर्जी केंद्र भी देश के कुछ हिस्सों में चल रहे हैं, जो खुद को सरकार की सामान्य सेवा केन्द्र (सीएससी) का हिस्सा बताकर लोगों का काम आसानी से करवाने के नाम पर ठगी कर रहे हैं। सीएससी एसपीवी के प्रबंध निदेशक और सीईओ संजय राकेश के मुताबिक हाल के वर्षों में सीएससी के नाम का इस्तेमाल करके फर्जी हेल्पलाइन नंबरों से लोगों को ठगे जाने के कई मामले सामने आए हैं, इसलिए लोगों को जागरूक रहने और इस बारे में पूरी जांच पड़ताल के बाद अपनी जानकारियां साझा करनी चाहिए।

दरअसल डिजिटल इंडिया मिशन के तहत जुलाई 2015 के बाद से जिस तेजी से काम हुआ है, उसमें आर्थिक लेन-देन से लेकर ई-कॉमर्स औऱ ई-शॉपिंग का एक लंबा सिलसिला शुरू हो चुका है। धीरे धीरे यह सबकी जरूरत बन गया है। बेशक ऐसे में धोखेबाजी औऱ ठगी के भी कई किस्से सामने आए हैं, लेकिन सरकार ने उससे निपटने के लिए लोगों को जागरूक करने का भी अभियान चला रखा है।   

जाहिर है मोदी सरकार के पास उनकी तमाम योजनाओं औऱ उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त है। कांग्रेस बेशक ये दावे करे कि ये सारी योजनाएं उसके समय में शुरू की गई हैं, लेकिन मोदी सरकार ने जिस तरह इसकी मार्केटिंग कर इसके कामकाज की गति बढ़ाई और लोगों के दिमाग में ये बैठाने की कोशिश की कि मोदी के आने के बाद ही देश बदला है, आने वाला चुनाव अब इन दावों को कसौटी पर कसने वाला है।

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