HIV & AIDS: मिजोरम में तेजी से बढ़ते एचआईवी संक्रमण पर रोक लगाने की पहल
अब एचआईवी पीड़ितों की तादाद के मामले में मिजोरम पूरे देश में पहले स्थान पर है। इस साल जनवरी तक राज्य में एचआईवी संक्रमित मरीजों की तादाद 32 हजार से ज्यादा हो गई थी। इनमें से करीब साढ़े पांच हजार लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है।
विस्तार
पूर्वोत्तर के पर्वतीय राज्य मिजोरम में एचआईवी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यहां इस बीमारी की संक्रमण दर (2.73 प्रतिशत) ने राष्ट्रीय औसत (0.02 प्रतिशत) को काफी पीछे छोड़ दिया है। अब एचआईवी पीड़ितों की तादाद के मामले में मिजोरम पूरे देश में पहले स्थान पर है। इस साल जनवरी तक राज्य में एचआईवी संक्रमित मरीजों की तादाद 32 हजार से ज्यादा हो गई थी। इनमें से करीब साढ़े पांच हजार लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है।
स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई बताती हैं कि बीते साल अप्रैल से इस साल जनवरी के दौरान करीब 18 सौ नए मामले सामने आए हैं। उन्होंने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए इससे निपटने के लिए शीघ्र ठोस पहल करने की अपील की है।
ऐसे मरीजों की सही तादाद का पता लगाने के लिए सरकार ने अब सेल्फ टेस्टिंग किट लांच किए हैं। इनसे लोग घर बैठे ही संक्रमण का पता लगा सकते हैं। उसके बाद उनका इलाज शुरू हो सकता है। अब तक लोगों को निर्धारित जांच केंद्रों में जाकर एड्स की जांच करानी होती थी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग सामाजिक उपहास और शर्म से बचने के लिए जांच कराने से हिचकते हैं। इससे मरीजों की सही संख्या का पता नहीं लग पाता। राज्य में एड्स कंट्रोल सोसाइटी के परियोजना निदेशक डा. जेन राल्ते बताते हैं कि राज्य में कुल मामलों में से करीब 67 प्रतिशत असुरक्षित सेक्स का नतीजा है। करीब 30 प्रतिशत मामले ऐसे हैं जो नशे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सुइयों के कारण हुए हैं।
हाल में एचआईवी नियंत्रण के लिए विधायकों की एक उच्च-स्तरीय समिति की बैठक में भी इस मुद्दे की गंभीरता पर विचार किया गया,। बैठक में मौजूद विधायकों ने इस बीमारी के समुचित इलाज और मरीजों की देखभाल के लिए अपनी विधायक निधि से 50-50 हजार रुपए की रकम एड्स कंट्रोल सोसाइटी को देने का फैसला किया। लेकिन यह छोटा सा राज्य एचआईवी संक्रमण के मामले में देश में पहले नंबर पर कैसे पहुंच गया?
डा. राल्ते बताते हैं कि असुरक्षित सेक्स और एक से ज्यादा लोगों के साथ शारीरिक संबंध कायम करना इसकी सबसे प्रमुख वजह है। इसके साथ ही नशीले पदार्थों के आदी लोगों में एक ही सूई का इस्तेमाल भी इस संक्रमण को तेजी से बढ़ा रहा है। उनका कहना था कि लोगों में जागरूकता की कमी है। सामाजिक कलंक के कारण कई लोग जांच नहीं कराते। इससे संक्रमित लोगों की सही तादाद सामने नहीं आ पाती। कई लोग संक्रमण का पता चलने के बावजूद बदनामी के डर से इलाज के लिए आगे नहीं आते।
क्यों बढ़ रहे हैं संक्रमण के मामले?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पड़ोसी देशों-म्यांमार और बांग्लादेश से बड़े पैमाने पर शरणार्थियों की आवक भी कुछ हद तक इस संक्रमण के लिए जिम्मेदार है। वर्ष 2021 में म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद वहां से करीब 40 हजार शरणार्थी सीमा पार कर मिजोरम के विभिन्न इलाकों में रह रहे हैं।
राज्य सरकार समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाती रही है। लेकिन इसका कोई खास असर नहीं हो सका है। राज्य की दुर्गम भौगोलिक बसावट के कारण हर जगह जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। नजदीकी शहर में इसकी सुविधा नहीं होने की वजह से भी कई लोग दूर-दराज के शहरों तक जाकर जांच कराने से बचते हैं।
डा. राल्ते बताते हैं कि इस संक्रमण से जुड़े सामाजिक कलंक को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इससे निपटने के लिए अब सेल्फ टेस्टिंग किट बाजार में उतारा है। इससे कोई भी व्यक्ति घर बैठे संक्रमण की जांच कर सकता है।
संक्रमण बढ़ने का हो सकता है खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देरी से जांच की वजह से दूसरे लोगों में भी संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता है। इसी वजह से सेल्फ टेस्टिंग किट बाजार में उतारने का फैसला किया गया ताकि लोग घर बैठे बीमारी की जांच कर सकें। उसके बाद उनका इलाज शुरू किया जा सकेगा। इसका इस्तेमाल काफी आसान है। लार या खून के नमूने से ही संक्रमण का पता लगाया जा सकता है। इस जांच का नतीजा मिनटों में पता चल जाता है। डा. राल्ते के मुताबिक, कई देशों में यह तरीका आजमाया जा रहा है और वहां इससे संक्रमण का पता लगाने में सहूलियत हुई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे गंभीर बात यह है कि इस संक्रमण की चपेट में आने वाले ज्यादातर लोग युवा ही हैं। सेल्फ टेस्टिंग किट से संक्रमित मरीजों की सही तादाद का पता तो जरूर लगाया जा सकता है। लेकिन उनको इलाज केंद्रों तक पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है।
------------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।