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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: आइसलैंड का सिने-इतिहास, डॉक्यूमेंट्री तथा फीचर बनाने वाला देश

Sun, 27 Aug 2023 04:26 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Sun, 27 Aug 2023 04:26 PM IST
सार

आज आइसलैंड की फिल्में खूब सराही जा रही हैं। यहां स्त्री-पुरुष बराबरी का दावा करने के बावजूद स्त्री फिल्म निर्देशकों का प्रतिशत बहुत कम है।

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विश्व सिनेमा और आइसलैंड की फिल्में - फोटो : istock

विस्तार

आइसलैंड की जो सबसे पुरानी फिल्म बची रह गई है, वह है तीन मिनट की 1906 में डैन एल्फ्रेड लिंड की बनाई हुई डॉक्यूमेंट्री ‘सागा बोर्गैरेटाइर्निनर’ और लेखक गनर गनरसन की कहानी ‘द स्टोरी ऑफ द बोर्ग फैमिली’ पर निर्देशक गनर समरफेल्ड की बनाई तथा आइसलैंड में फिल्माई फिल्म ‘सन्स ऑफ द स्वायल’। वैसे यहां के लोगों ने पहले-पहल 1903 में चलती-फिरती तस्वीरें देखी थीं। अन्य देशों की भांति आइसलैंड में भी शुरुआती दौर में डॉक्यूमेंट्री ही अधिक बनीं।

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जल्द ही चार्ली चैपलिन की तर्ज पर ‘दि एडवेंचर्स ऑफ जोन एंड वेन्डुर’ कॉमेडी बनी, इसको स्थानीय फोटोग्राफर लोफ्टुर गडमनसन ने बनाया था। आगे चल कर यह गडमनसन आइसलैंड का एक प्रमुख फिल्म प्रोड्यूसर बना।
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लोफ्टुर गडमनसन ने 1925 में आइसलैंड के मत्स्य व्यापार पर ‘आइसलैंड लिफैन्डी माएन्डम’ बनाई। इसी विषय पर उन्होंने आइसलैंड की पहली बोलती फीचर फिल्म 1949 में बनाई। उनकी इसी विषय पर एक अन्य फीचर फिल्म 1951 में भी बनी है। उनकी बनाई फिल्म ‘बिटविन माउंटेन एंड शोर’ आइसलैंड की पहली ऑफिसियल फीचर फिल्म मानी जाती है। साठ का दशक आइसलैंड की फिल्मों के लिए थोड़ा ठंडा रहा है।

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सत्तर के दशक का सिनेमा

सत्तर के दशक में हम यहां एक प्रमुख निर्देशक अगस्ट गौडमंड्ससन को पाते हैं। 1978 में फिल्म बनाने वालों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से ‘आइसलैंडिक फिल्म फंड’ की स्थापना हुई। अगस्ट ने 1960 में फिल्म एप्रिशियेशन सोसायटी की स्थापना की। उसने लंदन के नेशनल फिल्म स्कूल से निर्देशन का प्रशिक्षण लिया था।


आइसलैंडिक फिल्म फंड की सहायता से उसने 1980 में अपनी पहली फिल्म ‘लैंड एंड सन्स’ बनाई। इस देश के लिए इस फिल्म का खास महत्व है क्योंकि यह यहां के बदलते समुदाय का चेहरा दिखाती है और देश की संस्कृति की खोज करती है। 90 मिनट की यह फिल्म भी अपनी सामग्री साहित्य से लेती है। फिल्म इंद्रिओइ जी. थोरस्टेनसन के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है।

फिल्म किसान जीवन, पीढ़ियों के नजरिए के अंतर को प्रस्तुत करती है। विदेशी समीक्षकों द्वारा सराही गई इस फिल्म को देखने के लिए यहां के लोग टूट कर आए। फिल्म कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित हुई। अगस्ट गौडमंड्ससन ने ‘आउटलॉ: द सागा ऑफ गिल्सी’, “ऑन टॉप’, ‘गोल्डेन सैंड्स’, ‘द डॉन्स’ आदि फिल्में भी बनाई। ‘द डॉन्स’ को कई पुरस्कार प्राप्त हुए।


निर्देशक फ्रिडरिक पुर फ्रिडरिक्ससन और उनकी फिल्में

आइसलैंड के फिल्म निर्देशक फ्रिडरिक पुर फ्रिडरिक्ससन (Friðrik Þór Friðriksson) का नाम बहुत आदर के साथ लिया जाता है। सर्वोत्तम विदेशी फिल्म ऑस्कर के लिए उनका नामांकन हुआ था। उनकी 1991 में बनाई फिल्म ‘चिल्ड्रेन ऑफ नेचर’ आज भी आइसलैंड के सिनेमा में अद्वितीय है। इस फिल्म के बाद उनकी ‘कम्पनी द आइसलैंडिक फिल्म कॉरपोरेशन’ का खूब विकास हुआ और वह देश की प्रमुख फिल्म कम्पनी बन गई।

उन्होंने दूसरे देश के फिल्म निर्देशकों को अपने देश में फिल्मांकन के लिए आमंत्रित किया और कई अन्य बड़े निर्देशकों के साथ साझेदारी की, प्रसिद्ध निर्देशक फ्रांसिस फोर्ड कोपोला उनमें से एक हैं। फ्रिडरिक पुर फ्रिडरिक्ससन शुरू से अकीरा कुरोसावा तथा जॉन फोर्ड के प्रशंसक रहे हैं।

‘रॉक इन रेक्जैविक’ (डॉक्यूमेंट्री), ‘ह्रिन्गुरिन’, ‘व्हाइट व्हेल्स’, कोल्ड फीवर’, ‘ए मदर’स करेज: टॉकिंग बैक टू ऑस्टिज्म’ तथा ‘मामा गोगो’ उनकी अन्य फिल्में हैं। ‘ह्रिन्गुरिन’ में उन्होंने सिनेमैटिक प्रयोग किए हैं।

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आइसलैंड की फिल्में और इतिहास - फोटो : istock

आज आइसलैंड की फिल्में खूब सराही जा रही हैं। यहां स्त्री-पुरुष बराबरी का दावा करने के बावजूद स्त्री फिल्म निर्देशकों का प्रतिशत बहुत कम है। 2016 में आइसलैंड में केवल 7% स्त्री फिल्म निर्देशक हैं, एवं 15% स्क्रीनप्ले राइटर स्त्रियां हैं।

प्रसिद्ध लेखक हल्डोर लैक्सनेस की बेटी गनी लैक्सनेसडॉटर ने स्क्रीनप्ले राइटर (1986, ‘स्टेला ऑन होलीडे’) के रूप में काम किया और बाद में इस स्क्रिप्ट पर भी फिल्म बनाई। ‘अंडर द ग्लेशियर’, ‘द मेन’स कोयर’, ‘ऑनर ऑफ द हाउस’, ‘द क्वाइट स्टोर्म’ उनकी अन्य फिल्में हैं। उन्होंने अधिकतर फिल्में अपने पिता की रचनाओं पर बनाई हैं।

अमेरिकन पिता और आइसालिंडिक मां की बेटी सोल्वे एन्सपेच वैसे तो फ्रांस में रहती हैं मगर बार-बार अपने जन्मस्थान आइसलैंड आती हैं और फिल्म बनाती हैं। उन्होंने 1990 की अपनी डॉक्यूमेंट्री में यहां की खूबसूरती को पकड़ा है। मगर कई साल कैंसर से जूझने के बाद 2015 में सोल्वे की मृत्यु हो गई।

1999 में उन्होंने अपनी इस दर्दनाक बीमारी को ‘हौट लेस कोर्स!’ में उतार दिया। चार पुरस्कारों से नवाजी इस फिल्म की नायिका पहली बार गर्भवती हुई है, तभी उसे पता चलता है कि वह स्तन कैंसर से भी ग्रसित है, जहां एक डॉक्टर गर्भपात की सलाह देता है, वहीं दूसरे के अनुसार इलाज और बच्चा साथ-साथ हो सकता है। नायिका के मानसिक संघर्ष को यह फिल्म दिखाती है।

उसे 2017 से उनके नाम पर स्त्री फिल्म निर्देशकों के लिए प्रतिवर्ष एक प्रतियोगिता आयोजित की जाती है, जो आइसलैंड में आयोजित फ्रेंच फिल्म समारोह का हिस्सा होती है।

लेखक तथा सिने-निर्देशक क्रिस्टीन जॉहान्सडॉटर अपनी फिल्म ‘एज इन हेवन’ (1992) के लिए जानी जाती हैं। इसमें नायिका 1936 के ग्रामीण आइसलैंड में समायोजित होने का प्रयास कर रही है। फिल्म कान समारोह में प्रतियोगिता सत्र में दिखाई गई थी और सर्वोत्तम विदेशी भाषा की फिल्म के रूप में ऑस्कर के लिए नामांकित हुई थी।

अभी हाल में, 2017 में उन्होंने अपनी फिल्म ‘अल्मा’ बनाई है। 28 साल की अल्मा को गलती से उसके प्रेमी की हत्या के लिए मानसिक अस्पताल में रख दिया गया है, जब उसे पता चलता है कि उसका बॉयफ्रेंड अभी जीवित है तो वह उसे मार डालना चाहती है। 90 मिनट की इस फिल्म को सिडनी वीमेन’स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का पुरस्कार प्राप्त हुआ।

एवा सिगुरोरडॉटर न केवल सिने-निर्देशक हैं वरन वे ‘अस्क्जा’ नाम से एक प्रोडक्शन कंपनी भी चलाती हैं। इस कम्पनी के द्वारा वे डॉक्यूमेंट्री एवं फिल्म बनाने वाली स्त्रियों की प्रमुखता से सहायता करती हैं। ‘गुड नाइट’ तथा ‘रैम्स’ उनकी अपनी बनाई हुई फिल्में हैं। ‘गुड नाइट’ को बाफ्टा नामांकन भी मिला था।

वास्तविक घटना पर आधारित बाल्टासार कोर्माकुर निर्देशित ‘जुपी’ (Djúpið), ‘रेक्विक’ (Reykjavík), ‘माइरिन’ तथा ‘हाफिओ’, ‘दि ओथ’, ऑस्कर जॉनसन निर्देशित ‘स्वर्टोर ए लेइक’, ‘रेक्विक रोटरडैम’, गनर बी. गोडमंडसन निर्देशित ‘अस्ट्रोपिया’, रेनिर लाइन्गडैल निर्देशित ‘फ्रोस्ट’, फ्रिडरिक पुर फ्रिडरिक्ससन निर्देशित ‘एन्गलैर एल्हेइमसिन्स’, पोर्स्टीन गनर जार्नासन निर्देशित ‘जोहान्स’, वाल्डीमैर जोहानसन निर्देशित ‘लैम’, गोडमन्डुर एर्नैर गोडमन्डसन निर्देशित ‘ब्युटिफुल बीइंग्स’, ‘हार्ट स्टोन’, ऑस्कर थोर एक्सेलसन निर्देशित ‘आई रिमेंबर यू’, अगस्ट जैकोबसन निर्देशित कॉमेडी ‘पार्डन माई आइसलैंडिक’ आदि इस सदी में आइसलैंद से आने वाली कुछ अच्छी फिल्में हैं।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): 
यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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