विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: ऊजान पैल्सी- हॉलीवुड की अश्वेत निर्देशक
लोग कहते हैं, फिल्म बनाना कठिन है। हां, यह कठिन है, तब तो और भी अधिक कठिन है, जब आप एक स्त्री हैं, साथ ही अश्वेत और फिल्म बनाना चाहती हैं। लेकिन ऊजान पैल्सी के अनुसार, अगर औरत फिल्म से प्यार करती है, अगर औरत निर्देशक बनना चाहती है, तो उसे लड़ना चाहिए, खूब लड़ना चाहिए। यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि औरत का अपना एक नजरिया होता है, जो आदमी से भिन्न होता है। उनके अनुसार यह बहुत महत्वपूर्ण और अति आवश्यक है कि औरतें आगे आएं एवं फिल्म बनाएं।
अपनी झोली में 15 पुरस्कार लिए ऊजान पैल्सी के लिए यह बहुत कठिन रहा, क्योंकि वे न केवल स्त्री हैं, वरन अश्वेत भी हैं। उनके अश्वेत होने के कारण ही वे इस दिशा में आईं। बचपन में जब भी वे फिल्म देखतीं तो उन्हें लगता उनके लोग तो इस फिल्म में कहीं हैं ही नहीं, अगर कभी होते भी तो बहुत बदसूरत और बहुत नीचे होते, उन्हें गंदा काम करते दिखाया जाता। पढ़ना उन्होंने बहुत पहले प्रारंभ कर दिया था और लिखने भी लगी थीं। वे खूब प्रश्न पूछती थीं, नतीजन परिवार में उनका नाम पड़ गया, ‘मिस व्हाई?’
‘शुगर केन एली’ की निर्देशक ऊजान
ऊजान का जन्म 1957 में फ्रांस के एक टापू मार्टिनिक में हुआ, पढ़ने हेतु वे फ्रांस गईं, उन्होंने अपनी पहली फिल्म 17 वर्ष की उम्र में बनाई। पेरिस में उन्होंने कई सिने-निर्देशकों के साथ सहायक के रूप में काम किया और वे फ्रांस के सिने-निर्देशक-समीक्षक फ्रांसुआ त्रूफो से मिलीं। वह त्रफो जिसने फ्रेंच फिल्म में क्रांति ला दी थी।
त्रूफो ने उन्हें फंड जमा करने में सहायता की इस तरह वे अपनी पहली फीचर फिल्म, ‘शूगर केन एली’ (1983) बना सकीं। अपने लोगों को परदे पर लाने का उनका जुनून साकार हुआ। इस फिल्म को उन्होंने इस कहानी के लेखक जोसेफ जोबेल (वे भी मार्टिनिक के निवासी हैं, एवं यह कहानी आत्मकथात्मक है) के साथ मिल कर लिखा।
‘शुगर केन एली’ की कहानी 1931 में स्थित है जब फ्रांस उपनिवेश था। यह ‘कमिंग ऑफ एज’ की कहानी है। अनाथ जोस (गैरी कैडेनेट) टापू मार्टिनिक में गन्ने के खेत में कठिन जीवन बिता रहा है। उसका बचपन जल्द समाप्त हो जाता है, बाकी जिंदगी उसे खेत में कमर तोड़ मेहनत करनी है। मेहताना इतना कम है कि किसी तरह गुजारा होता है। हालांकि गुलामी को गैरकानूनी घोषित किया जा चुका था मगर काम ऐसे लिया जाता मानो वे अभी भी जंजीरों में हों।
कामगर स्वतंत्र हैं मगर उनके लिए कोई अवसर उपलब्ध नहीं है। जोस के द्वारा निर्देशक भविष्य दिखाने का प्रयास कर रही है।
जोस बहुत स्मार्ट बच्चा है, वह बहुत रिसोर्सफुल भी है। वह अफ्रीका की कहानियां सुनता है और एक दिन वहां जाना चाहता है। वह अपनी शिक्षा का उपयोग कर ग्रामीण जीवन से निकल कर यूनिवर्सिटी पहुंचता है एवं बाद में अपने अनुभव लिखता है। मगर उनकी चुनौतियां कम नहीं हैं। उसे अपमान सहन करना पड़ता है मगर वह अपने लक्ष्य से भटकता नहीं है। उसे खुद रास्ता बनाना है उसका कोई रोल मॉडल नहीं है। फिल्म ‘शूगर केन एली’ गरीबी, संघर्ष, मेहनत, लगन का पर्याय है।
रोजर एबर्ट कहते हैं कि ऊजान पैल्सी मुझे महान निर्देशक का उदाहरण लगती हैं, जो कहीं से आ सकती हैं- लेकिन उसे मालूम होना चाहिए कि वह महान है और उन्हें विश्वास करना चाहिए कि वह महान है। ऊजान मानती-जानती हैं कि वे महान हैं, उन्होंने अकेले लड़ाई लड़ी है और अपना स्थान बनाया है।
फिल्म ‘ए ड्राई व्हाइट सीजन’
एक साक्षात्कार में वे कहती हैं, उन्होंने अपने लोगों को सिने-मानचित्र पर स्थापित करने हेतु चीते की भांति लड़ाई की है। यह बहुत कठिन था, मगर उन्हें खुद पर विश्वास है कि वे कर सकती हैं और उन्होंने कर दिखाया। 1983 में वे मात्र 25 साल की थीं जब उन्होंने हॉलीवुड के एक सबसे बड़े स्टूडियो एमजीएम के पैसों से फीचर फिल्म बनाई और सिने-इतिहास में सदा के लिए दर्ज हो गईं क्योंकि वे पहली अश्वेत स्त्री सिने-निर्देशक हैं जिसकी फिल्म हॉलीवुड ने प्रड्यूस की। फिल्म ‘ए ड्राई व्हाइट सीजन’ 1989 में रिलीज हुई। मैंने यूट्यूब पर नायाब इस फिल्म को देखा। आपको भी देखने की सलाह दूंगी।
उस समय यह हिम्मत का काम है, एक अश्वेत निर्देशक द्वारा श्वेत-अश्वेत दोनों अभिनेताओं को निर्देशित करना। ऊजान ने यह कर दिखाया और ऐसा किया कि अश्वेत दर्शक तो आए ही श्वेत दर्शकों एवं समीक्षकों ने भी जम कर प्रशंसा की। फिल्म को ऑस्कर का नामांकन मिला। यह साउथ अफ्रीका में रंगभेद नीति के समय हुई हिंसा एवं अत्याचार को दिखाती फिल्म ऐतिहासिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है।
एक व्यक्ति यदि ठान ले तो कितना कुछ कर सकता है। ये सही है कि परिवर्तन हेतु बहुत लोगों को आहूति देनी पड़ती है, लेकिन बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता है। रंगभेद नीति के खिलाफ आंदोलन में कुछ श्वेत भी शामिल थे, भले ही उनकी संख्या कम थी मगर इसे रेखांकित किया जाना चाहिए, फिल्म ‘ए ड्राई व्हाइट सीजन’ इसे रेखांकित करती है।
फिल्म में डोनाल्ड सदरलैंड, मैर्लिन ब्रैंडो, सुसैन सारंडन जैसे श्वेत कलाकार हैं तो जैक्स मोके एवं विंस्टन न्शोना जैसे अश्वेत अभिनेता भी।
1992 में उन्होंने करीब दो घंटे की फिल्म ‘सिमेओन’ बनाई, जिसने चार पुरस्कार जीते। इस फिल्म में एक संगीत टीचर का भूत एक युवा मैकेनिक को संगत में कैरियर बनाने की ओर ले जाता है। ऊजान पैल्सी के साक्षात्कार यूट्यूब पर उपलब्ध हैं। खासकर उनका 2023 का वक्तव्य अवश्य देखा जाना चाहिए। यह कथन उन्होंने ऑनरेरी ऑस्कर ग्रहण करते समय किया है।
2023 में उन्हें ऑस्कर प्रदान करते हुए कहा गया, ‘एक मास्टरफुल फिल्ममेकर जिसने अश्वेत स्त्री सिने-निर्देशकों केलिए राह खोली और दुनिया के हर कोने के हर तरह के कहानी कहने वालों को प्रेरित किया।’
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