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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: डोरोथी अर्जनर, जिसके नाम कई प्रथम दर्ज हैं

Sat, 30 Nov 2024 07:47 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Sat, 30 Nov 2024 07:47 PM IST
सार

मूक फिल्मों में एकाध स्त्री सिने-निर्देशक थीं मगर सवाक फिल्मों के दौर में काफी समय तक इस क्षेत्र में डोरोथी एकमात्र स्त्री थीं। वे हॉलीवुड की प्रथम एडिटर थी (स्त्री-पुरुष दोनों में) जिसका नाम परदे पर क्रेडिट में लिखा गया। उन्होंने इस हैसियत से 52 फिल्मों में काम किया।

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history of world cinema Dorothy Arzner American film director films review
सिनेमा का इतिहास - फोटो : istock

विस्तार

ऐसा माना जाता है कि सिने-निर्देशन पुरुषों का क्षेत्र है। हो सकता है, मगर इस क्षेत्र में बहुत पहले एक महिला सेंध लगा चुकी थी। डोरोथी अर्जनर का जन्म लगभग सिनेमा के उदय के साथ हुआ। 3 जनवरी 1897 (कहीं कहीं यह 1900 लिखा है) को कैलिफोर्निया में जन्मी डोरोथी अर्जनर ने अपने मात्र पंद्रह साल के कैरियर में 3 मूक तथा 14 सवाक फिल्में बनाईं। वे गोल्डन एज की एकमात्र स्त्री निर्देशक मानी जाती हैं, जिसने हॉलीवुड स्टूडियो सिस्टम में काम किया।

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उनके पिता जर्मन-अमेरिकन थे और मां स्कॉट थीं। उनके माता-पिता कैफे चलाते थे, जिसके जर्मन व्यंजन खूब प्रसिद्ध थे। जहां हॉलीवुड के निर्देशक और अभिनेता अक्सर आते थे, इनमें चार्ली चैपलिन जैसे अभिनेता/निर्देशक भी शामिल थे। अपने माता-पिता के कैफे में डोरोथी वेटर थी, तब किसने सोचा था, एक दिन वह हॉलीवुड की पुरुष संचालित परम्परा तोड़ेगी और निर्देशन के क्षेत्र में शासन करेगी।
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जैसा उन दिनों चलन था डोरेथी ने भी सिने उद्योग के निचले पायदान से काम प्रारंभ किया और एक-एक सीढ़ी चढ़ती हुई निर्देशक की कुर्सी तक पहुंचीं। उन दिनों आजकल की भांति न तो सिने-प्रशिक्षण केंद्र थे और न ही अभिनेता सीधे निर्देशक बनते थे। डोरोथी के अनुसार यह बेहतर तरीका था। वैसे उन्होंने दक्षिण कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी।

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एंबुलेंस ड्राइवर से फिल्मों तक का सफर

वे 1917 में प्रि-मेडिकल की पढ़ाई कर रही थीं, तभी अमेरिका प्रथम विश्वयुद्ध में शामिल हुआ। डोरोथी मिलिट्री में जाना चाहती थीं, मगर उन दिनों स्त्रियों केलिए इसके दरवाजे खुले नहीं थे अत: वे एंबुलेंस ड्राइवर बन गईं। इसी दौरान उनकी मुलाकात सिने-निर्देशक विलियम सी. डिमिले से हुई जो पैरामाउंट पिक्चर के डिस्ट्रिब्युशन युनिट के सह-संस्थापक थे। डोरोथी फिल्म में कैरियर बनाने के ख्याल से सेट पर गई और उन्होंने वहां एडिटिंग की सुविधाएं देखीं। उन दिनों निर्देशन तथा एडिटिंग का काम अलग विभाग का नहीं था। डोरोथी ने निर्देशक बनना तय किया।


मूक फिल्मों में एकाध स्त्री सिने-निर्देशक थीं मगर सवाक फिल्मों के दौर में काफी समय तक इस क्षेत्र में डोरोथी एकमात्र स्त्री थीं। मगर जैसा ऊपर लिखा है, वे सीधे निर्देशक नहीं बन गईं। पहले वे विलियम डिमिले की स्टेनो बनीं। वे अच्छी टाइपिस्ट नहीं थीं, उन्होंने सिनप्सिस लिखने की पेशकश की और वे राइटर बनीं। उनके काम से पैरामाउंट के शक्तिशाली लोग प्रसन्न हुए और उन्हें फिल्म कटर का काम मिल गया।

एक साल बाद वे स्क्रिप्ट गर्ल बन गईं और उनके काम से प्रभावित हो उन्हें एडिटिंग का काम सौंपा गया।

वे हॉलीवुड की प्रथम एडिटर थी (स्त्री-पुरुष दोनों में) जिसका नाम परदे पर क्रेडिट में लिखा गया। उन्होंने इस हैसियत से 52 फिल्मों पर काम किया। ‘ब्लड एंड सैंड’, ‘द कवर्ड वैगन’, ‘रागल्स ऑफ रेड गैप’, ‘मेट्रन ऑफ द मूवज’, ‘ओल्ड आयरनसाइड्स’ आदि फिल्में इसमें शामिल हैं। साथ में उनका स्क्रीनप्ले लिखना जारी था।

‘ओल्ड आयरनसाइड्स’ के बाद उन्हें सह-निर्देशक बनने का अवसर मिला। मगर राह अभी आसान न थी, निर्देशक बनने का अपना सपना पूरा करने केलिए उन्हें धमकी देनी पड़ी। पैरामाउंट पिक्चर्स उन्हें सह-निर्देशक बनाने तक राजी था, मगर डॉयरेक्टर की कुर्सी सौंपने को नहीं। अंतत: डोरोथी ने धमकी दी, कहा, यदि उसे यह पद नहीं दिया गया तो वह पैरामाउंट छोड़ कर कोलंबिया पिक्चर्स चली जाएगी। अगर आपके पास प्रतिभा है और कोई उसे पहचानने वाला है तो वह आपको छोड़ेगा नहीं।

पैरामाउंट बॉसेस डोरोथी की प्रतिभा का मूल्य जानते थे, वे उन्हें गंवाना नहीं चाहते थे। उन लोगों ने डोरोथी को ‘फैशन फॉर वीमेन’ (1927) का निर्देशन सौंपा। इस तरह उनका स्वप्न पूरा हुआ। उनकी बनाई पहली फिल्म खूब सफल रही।

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विश्व सिनेमा - फोटो : Adobe Stock

पैरामाउंटन ने ही अगले साल उन्हें सवाक फिल्म ‘मैनहट्टन कॉकटेल’ का बतौर निर्देशक दायित्व दिया। इस तरह वे सवाक फिल्मों की पहली महिला निर्देशक बन इतिहास में दर्ज हो गईं।

उनके स्क्रीनप्ले सफल होते थे क्योंकि उन्हें स्त्री मनोविज्ञान की खासी समझ थी, साथ ही स्त्रियों से उनकी खूब पटती थी। लेकिन उन्होंने एडवेंचर एवं वेस्टर्न एक्शन फिल्मों की पटकथा लिखी और वे भी सराही गईं। उन्होंने अधिकतर स्त्री मेलोड्रामा श्रेणी की फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी निर्देशित फिल्में स्त्री के बारे में, उनके जीवन तथा उसके संबंधों के विषय में होती थीं।
 

‘स्त्री होने के नाते मुझे किसी ने परेशान नहीं किया'

फिल्म उद्योग के स्त्री-पुरुष दोनों से सहयोग की कुशलता और प्रतिभा डोरोथी में थी। अक्सर हम सुनते हैं, स्त्री को काम करने में बहुत अड़चन आती है, पुरुष सहयोग नहीं करते हैं। ऐसे में डोरोथी अर्जनर का कथन ध्यातव्य है, वे कहती हैं, ‘स्त्री होने के नाते मुझे किसी ने परेशान नहीं किया। औरतों से अधिक मर्द सहायक थे।’ असल में आपका अपना व्यवहार अधिक महत्वपूर्ण होता है। 

उन्होंने पैरामाउंट पिक्चर्स के लिए कई सफल फिल्में बनाईं, मगर महामंदी के दौरान पैरामाउंट पिक्चर्स के पैर उखड़ने लगे और जब पैरामाउंट ने कर्मचारियों का वेतन काटने का निश्चय किया तो डोरोथी अर्जनर ने फ्रीलांस काम करना तय किया। आरकेओ रेडियो पिक्चर्स ने उन्हें ‘क्रिस्टोफर स्ट्रॉग’ निर्देशित करने केलिए रखा। इस फिल्म की नायिका युवा मगर बहुत जिद्दी स्टार कैथरीन हेबर्न थीं।

चूंकि निर्देशक और अभिनेत्री दोनों मजबूत व्यक्तित्व की मालकिन थीं, अत: शुरू में तनाव होना ही था। कोई पीछे हटने को राजी न था। कैथरीन ने स्टूडियो से शिकायत की, पर स्टूडियो ने निर्देशक के पक्ष में निर्णय दिया। डोरोथी ‘वीमेन’स पिक्चर्स’ की डॉरेक्टर के रूप में जानी जाती थीं। अंतत: दोनों साथ काम करने को सहमत हो गईं। काम किया पर दोनों का व्यवहार ठंडा बना रहा, दूरी बनी रहीं। हालांकि दोनों एक-दूसरे की प्रतिभा का आदर करती थीं।

डोरोथी अर्जनर के साथ एक और प्रथम जुड़ा हुआ है। 1933 में जब द डॉयरेक्टर्स गिल्ड ऑफ अमेरिका की स्थापना हुई तो वे उसकी पहली महिला सदस्य बनीं। असल में कई वर्षों तक वे उसकी एकमात्र स्त्री सदस्य थीं। वे स्वयं को केवल निर्देशक मानती थीं, उन्हें स्त्री निर्देशक कहलाने से परहेज था। वे समलैंगिक थीं और पुरुषों की पोशाक धारण करती थीं, कुछ लोगों का कहना था, वे हॉलीवुड की पुरुष बहुल दुनिया में समाहित होने केलिए पुरुष वेश धारण करती थीं।

डोरोथी अर्जनर ने ऊपर लिखित फिल्मों के अलावा ‘मेरिली वी गो टू हेल’, ‘एनिबडी’ज वूमेन’, ‘द वाइल्ड पार्टी’, ‘द लास्ट ऑफ मिसेज शिने’, ‘द ब्राइड वोर रेड’, ‘गेट योर मैन’, ‘डॉन्स, गर्ल, डॉन्स’ आदि फिल्मों का निर्देशन किया।

डोरोथी ने पेप्सी कमर्शियल्स का भी निर्देशन किया। 1 अक्टूबर 1979 को कैलिफोर्निया में उनकी मृत्यु हुई।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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