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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: भाषायी बाधा को पार करता डेनिस सिनेमा का इतिहास

Sun, 16 Apr 2023 11:19 AM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Sun, 16 Apr 2023 11:19 AM IST
सार

1972 में द डेनिश फिल्म इंस्टिट्यूट की स्थापना हुई। यह चुने हुए फिल्म प्रोजेक्ट को राज्य से अनुदान दिलाने लगा। यह प्रतिवर्ष डेनिश भाषा की 20 फीचर और 20 डॉक्यूमेंट्री को अनुदान दिलाने लगा।

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डेनिस फिल्म दि एनार्किस्ट मदर-इन-लॉ’ का दृश्य - फोटो : Twitter

विस्तार

डेनमार्क में सन् 1903 में पीटर एल्फेल्ट ने ‘दि कैपीटल एक्सक्यूशन’ नाम से पहली फीचर फिल्म बनाई थी, यह 2 मिनट की मूक फिल्म थी। यह फिल्म एक वास्तविक घटना से प्रेरित थी, जिसमें एक स्त्री अपने बच्चों को मार डालती है और फ्रांस में उस पर मुकदमा चलता है। यह फिल्म नोबेल पुरस्कृत साहित्यकार टोनी मॉरीसन के उपन्यास ‘बिलवड’ और उस पर बनी फिल्म ‘बिलवड’ की याद दिलाती है।

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वैसे 1897 में ही पीटर एल्फेल्ट ने ‘ट्रेवेलिंग विथ ग्रीनलैंडिक डॉग्स’ नामक डॉक्युमेंट्री बना ली थी। यहां 1904 में पहला मूवी थियेटर खुला। 1906 में नोर्डिस्क फिल्म की स्थापना हुई, जिसने कई फीचर फिल्म बना कर निर्यात की, जिसके कारण डेनमार्क यूरोप का फिल्म केंद्र बन गया। इसी ने अस्ता नेल्सन को पहली फिल्म स्टार के रूप में जमा दिया।
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1897 से 1907 के बीच पीटर एल्फेल्ट ने करीब 100 लघु फिल्में बनाई जो कुछ मिनट की हुआ करती थीं। इसमें वह डेनमार्क के दैनिक जीवन, संस्कृति, जनता से संबंधित घटनाएं तथा राजसी जीवन को प्रदर्शित करता था। बाद में वह रॉयल फोटोग्राफर बन गया। 1906 में विगो लार्सेन ने ‘दि एनार्किस्ट मदर-इन-लॉ’ बनाई, चार मिनट की इस मूक फिल्म में एक आदमी अपनी पत्नी के साथ मजे में रह रहा था, अचानक एक दिन उसकी सास आती है। इसके बाद सब उथल-पुथल हो जाता है और अंत में एक बहुत कठोर निर्णय से सब समाप्त होता है।
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विगो लार्सेन ने ही 1907 में 12 मिनट की फिल्म ‘द रोबर’स स्वीटहार्ट’ बनाई। इस मूक फिल्म में गैंग का एक सदस्य जिम गैंग के प्रमुख की पत्नी क्लारा के प्रति गलत व्यवहार करना चाहता है मगर वह उसे नकार देती है। बदला लेने के लिए वह प्रमुख को फंसा कार जेल में डलवा देता है। प्रमुख की पत्नी उसे मार डालती है और वह पहरेदारों को नशा करा कर अपने पति को छुड़ा लेती है मगर निकलते समय वे फिर से पकड़े जाते हैं। वह अपने घायल पति को पुन: निकाल लाती है घोड़े पर सवार वे भागते हैं और एक केबिन में शरण लेते हैं लेकिन पुलिस उन्हें मार गिराती है। यह फिल्म अपनी कॉस्ट्यूम तथा बेहतरीन फोटोग्राफी के लिए सराही गई।


डेनिस सिनेमा और मूक फिल्मों का दौर

उन्नीस सौ बीस के दशक में कार्ल ड्रेयेर मूक फिल्मों का सबसे महान निर्देशक बन कर उभरा। उसकी बनाई फिल्म ‘द पैशन ऑफ जॉन ऑफ ऑर्क’ सर्वकालिक प्रेरणादायक फिल्म है। मूक फिल्मों तक तो ठीक था मगर फिल्म के सवाक होते ही डेनमार्क की फिल्मों को भाषायी बाधा का सामना करना पड़ा। पर वहां दशकों तक हल्की-फुल्की कॉमेडी बनती रही।

साठ-सत्तर के दशक में डेनमार्क की इरोटिक फिल्मों ने भी दुनिया का ध्यान खींचा। अभी भी डेनमार्क सिनेमा पर इंग्लिश में अधिक सामग्री उपलब्ध नहीं है। 1972 में द डेनिश फिल्म इंस्टिट्यूट की स्थापना हुई। यह चुने हुए फिल्म प्रोजेक्ट को राज्य से अनुदान दिलाने लगा। यह प्रतिवर्ष डेनिश भाषा की 20 फीचर और 20 डॉक्यूमेंट्री को अनुदान दिलाने लगा।

1988 की गैब्रियल एक्सेल की फिल्म ‘बेबट’स फीस्ट’ पहली डेनिश फिल्म है, जिसे सर्वोत्तम विदेशी फिल्म का पुरस्कार प्राप्त हुआ। ‘बेबट’स फीस्ट’ डेनिस लेखक करेन ब्लिक्सेन की कहानी पर आधारित है। 1995 में चार महत्वाकांक्षी युवा निर्देशकों– लार्स वोन ट्रिएर, थॉमस विन्टेरबर्ग, क्रिस्टीन लेवरिंग तथा सोरेन क्राघ-जेकब्सेन –  ने हॉलीवुड की बड़बोली फिल्मों से तंग आकर ‘डोग्मा’ का मेनीफेस्टो तैयार किया। उन्होंने दस नियम बनाए और इन नियमों के अनुसार फिल्म बनाई। ये कम खर्च में लोकेशन पर बिना प्रोप के फिल्म बनाने में विश्वास करते थे। थॉमस विन्टेरबर्ग्ग की डोग्मा फिल्म ‘डॉन्सर इन द डार्क’ खूब प्रसिद्ध हुई। 
 

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फिल्म ‘इटैलियन फॉर बिगिनर्स’ का दृश्य - फोटो : Twitter

सन् 2000 के बाद का डेनिस सिनेमा

इस सदी की बात करें तो डेनमार्क से कई बहुत अच्छी फिल्में आई हैं। 2000 में निर्देशक लोन सेर्फिग की फिल्म ‘इटैलियन फॉर बिगिनर्स’ डॉग्मा फिल्म एक कॉमेडी है जो बिखरे डेनिश परिवार को दिखाती है जिसके कुछ सदस्य इटैलियन बोलने की कोशिश करते हैं। अगले साल एंडर्स थॉमस जेनसेन की फिल्म ‘फ्लिकिरिंग लाइट्स’ आई जो कोपेनहेगन के अपराधियों को लेकर चलती है। कैसे उनका जीवन बदलता है यही इस फिल्म का कथानक है।

2010 में सुसैन बैएर की फिल्म ‘इन ए बेटर वर्ल्ड’ आई। करीब दो घंटे की इस फिल्म में दर्शक एक जटिल परिवार को देखता है। एक डॉक्टर डेनमार्क तथा सुडान में युद्ध में घायल हुए मरीजों का इलाज करता है। साथ ही वह और उसका बेटा अपने जीवन में भी संघर्ष कर रहे हैं। इसकी कहानी डेनमार्क के एक छोटे से गांव तथा अफ्रीका के शरणार्थी शिविर में चलती है। फिल्म को अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।

दो साल बाद 2012 में निकोलाज एर्सेल ने ‘ए रॉयल अफेयर’ बनाई, वास्तविक घटना पर आधारित यह फिल्म ऐतिहासिक ड्रामा है। इसमें इंग्लैंड की एक राजकुमारी केरोलीन मथिल्डे की डेनिस राजकुमार क्रिस्चियन छठवें से ब्याह दी जाती है। राजकुमार मानसिक रूप से अस्वस्थ है। यह नाखुश राजकुमारी राजकुमार के चिकित्सक से अफेयर शुरू करती है।

इसाबेल एक्लोफ की फिल्म ‘होलीडे’ एक अपराधी के विषय में है जो अपनी प्रेमिका को एक ट्रिप पर ले जाता है। पूरी फिल्म कार, क्लब, शराब और सेक्सुअल अत्याचार को चित्रित करती है। सवा दो घंटे की 2018 की यह फिल्म निर्देशक की पहली फिल्म है। दर्शक को पूरी तरह से खींचती यह फिल्म टर्किश रिविएरा की सैर कराती है।

2019 की फिल्म ‘क्वीन ऑफ हार्ट’ अभिभावक, बच्चा, मां-प्रेमी सारी सीमाओं को तोड़ती है। यहां स्त्री अपने सौतेले बेटे के साथ एक खतनाक संबंध बनाती है। इस फिल्म में भी भरपूर सेक्स सीन हैं। यह फिल्म दर्शक को असहज बनाती है। अगले साल थॉमस विन्टेरबर्ग ने ‘अनादर राउंड’ फिल्म बनाई जो डेनमार्क की पियक्कड संस्कृति को दिखाती है। इस मास्टरपीस में हाई स्कूल के चार शिक्षक नॉर्वेजियन फिलॉसफर की एक हाईपोथिसिस पर अमल करने के लिए पीना शुरू करते हैं, वे जानना चाहते हैं क्या इससे वे बेहतर टीचर और बेहतर इंसान बन जाएंगे? पर क्या ऐसा होता है? यह फिल्म डेनमार्क से ऑस्कर जीतने वाले चौथी फिल्म है।

आज डेनमार्क में निकोलाई विंडिंग रेफ्न, सुसैन बैएर, थॉमस विंटरबर्ग, निकोलाई आर्सेल खूब सक्रिय सिने-निर्देशक हैं। इसमें शक नहीं है कि डेनमार्क की फिल्मों में हमें सृजनात्मकता देखने को मिलती है भले ही वे डार्क क्यों न हों। दर्शक इन्हें देखते हुए कभी भी ऊबता नहीं है। डेनिश फिल्में अपने कथानक और कलात्मकता के लिए जानी जाती हैं।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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