कृष्णा सोबती स्मृति शेषः कविताएं भी लिख गई थी 'वह लड़की'

अतुल सिन्हा Updated Fri, 25 Jan 2019 07:56 PM IST
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94 साल की उम्र में कृष्णा सोबती का चले जाना एक युग के खत्म होने जैसा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि कृष्णा सोबती ने कुछ कविताएं भी लिखी हैं। कुछ ऐसी कविताएं जिनसे उनके सत्ता और सरकारों के प्रति नाराज़गी भी झलकती है और उनके भीतर छिपी बेचैनी भी दिखती है। उनके उपन्यास, उनकी कहानियां और संस्मरण खूब चर्चा में रहे हैं।
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एक लंबी फेहरिस्त है उनकी किताबों की – मित्रो मरजानी, डार से बिछुड़ी, ज़िंदगीनामा, ऐ लड़की, यारों के यार तिनपहाड़, दिलो दानिश, ज़िंदारुख और भी ढेर सारी। उनकी रचनाओं में बंटवारे का जो दर्द आपको महसूस होता है और जीवन की जो सच्चाइयां मिलती हैं, उससे कहीं ज्यादा उनके भीतर अपने सत्ता प्रतिष्ठानों और सियासत के घिनौने खेल को लेकर नाराज़गी झलकती है।
 
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