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हिंदी गांव से ग्लोबल तक: आज आत्मगौरव-राष्ट्रनिर्माण का दिन, जब तक जनता अपनी भाषा में संवाद न करे, लोकतंत्र...

Sun, 14 Sep 2025 05:06 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला नेटवर्क।
अमर उजाला नेटवर्क। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 14 Sep 2025 05:06 AM IST
सार

हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीयों का लोक जीवन है। यह मातृभाषा है, क्योंकि इसमें भारतीय समाज की संवेदनाएं हैं। यह विविधताओं से भरे भारतीय समाज को जोड़ती है। अब तो दुनिया के अनेक देशों में हिंदी का सम्मान किया जा रहा है।

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Hindi global 14 Sept self-esteem and nation-building day people talking in own language vital for democracy
हिंदी दिवस (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी

विस्तार

भारत विविधताओं वाला देश है। आधुनिकता, वैश्वीकरण और तकनीकी विकास के इस दौर में अंग्रेजी बोलना भले ही प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाने लगा हो, लेकिन यह सत्य है कि हिंदी आज भी भारत की आत्मा, संस्कृति और जनमानस की पहचान है।

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लोकतंत्र ऐसे मजबूत नहीं बन सकता
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिंदी को जनमानस की भाषा मानते हुए 1918 में आयोजित हिंदी साहित्य सम्मेलन में इसे भारत की राष्ट्रभाषा बनाने का समर्थन किया। उनका विचार था कि जब तक जनता अपनी भाषा में संवाद नहीं करेगी, तब तक लोकतंत्र मजबूत नहीं बन सकता।
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जब संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा बनाने का प्रस्ताव आया
देश की आजादी के बाद संविधान सभा में 12 सितंबर, 1947 को गोपालस्वामी आयंगर ने हिंदी को राजभाषा बनाने का प्रस्ताव रखा। हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोक जीवन और सामाजिक संवेदना की वाहक है। यह भाषा विविधता से भरे भारतीय समाज को जोड़ती है।
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दुनिया के कई देशों में भारतीय प्रवासी समुदाय, हिंदी का सम्मान...
आज हिंदी न केवल भारत के विभिन्न राज्यों में बोली जाती है, बल्कि फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, नेपाल, त्रिनिदाद, गुयाना, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ब्रिटेन सहित दुनिया के कई देशों में भारतीय प्रवासी समुदाय द्वारा इसका सम्मान किया जाता है।


हिंदी दिवस केवल औपचारिक आयोजन नहीं, आत्मगौरव और राष्ट्र निर्माण का पर्व
इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र में भी हिंदी को लेकर चर्चा होती रही है और इसे वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाने का प्रयास जारी है। हिंदी की यह वैश्विक पहचान उसकी सरलता, वैज्ञानिक व्याकरण, समृद्ध साहित्य और व्यापक उपयोगिता के कारण संभव हुई है। यही कारण है कि हिंदी दिवस केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि भाषा के माध्यम से आत्मगौरव और राष्ट्र निर्माण का पर्व है।

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