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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की धनवर्षा में भी कुछ हिमालयी राज्य रह गये सूखे

Jay singh Rawatजयसिंह रावत Updated Sat, 06 Jul 2019 02:39 PM IST
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI
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देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का पहला बजट और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट का गांव, गरीब और किसान पर केन्द्रित होने का मतलब बजट का सम्पूर्ण भारत की आशाओं और अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुये तैयार किया जाना ही है। क्योंकि भारत सचमुच गावों का देश होने के साथ ही कृषि प्रधान देश है जिसकी 29.5 प्रतिशत आबादी गरीबी की सीमा रेखा से नीचे रहती है, (रंगराजन कमेटी)। इसलिये उत्तराखण्ड हो या हिमाचल प्रदेश जैसा कोई भी अन्य हिमालयी राज्य भी मोदी सरकार के विकास के लक्ष्य से आच्छाादित माना जायेगा। लेकिन आप अगर इन हिमालयी राज्यों और खास कर उत्तराखण्ड या हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों की विशेष सामाजिक, आर्थिक, सामरिक और भौगोलिक परिस्थितियों की कसौटी पर इस बजट को परखें तो कम से कम हिमाचल प्रदेश और उत्तराखण्ड इस बजट में बिल्कुल खाली हाथ नजर आते हैं।
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जबकि इन दोनों पहाड़ी राज्यों ने प्रधानमंत्री मोदी से ऐसी अभूतपूर्व अपेक्षाऐं की थीं जिनका अनुमान गत लोकसभा चुनावों के नतीजों से लगाया जा सकता है।

हिमालयी राज्यों को भारी उम्मीदें थीं केन्द्रीय बजट से
गत लोकसभा चुनाव के नतीजों पर गौर करें तो सभी हिमालयी राज्यों में सत्ताधारी भाजपा सर्वाधिक 69.1 प्रतिशत मत हिमाचल प्रदेश में तथा 61.01 प्रतिशत मत उत्तराखण्ड में मिले थे, जबकि इन राज्यों में कांग्रेस 27.3 एवं 31.4 प्रतिशत मतों पर ही सिमट गयी थी। उत्तराखण्ड में तो सबसे कम 2,32,986 मतों से जीतने वाले अल्मोड़ा के भाजपा प्रत्याशी अजय टमटा तथा सबसे अधिक 3,39,096 मतों के भारी मतों के अन्तर से जीतने वाले अजय भट्ट थे जिन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर कांग्रेस के महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को भारी अन्तर से हराया था।

भाजपा और विशेषकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इन दो पहाड़ी राज्यों से जो अपार जनसमर्थन मिला लेकिन उसके बदले में इनको केन्द्र सरकार के वर्ष 2019-20 के वार्षिक बजट में अलग से कुछ भी नहीं मिला। अन्य हिमालयी राज्यों में भी भाजपा को सर्वाधिक 58.2 प्रतिशत मत अरुणाचल से ही मिल पाये जबकि नागालैण्ड में भाजपा खाता तक नहीं खोल पायी थी और मेघालय तथा मीजोरम में तो भाजपा को 10 प्रतिशत से कम मत मिले थे।
 
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