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मोटा चालान तो काट लेगी सरकार, लेकिन सड़कों के गड्ढों से हो रही मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा?

Wed, 04 Sep 2019 01:23 PM IST
Prabudhh Jain Prabudhh Jain
Updated Wed, 04 Sep 2019 01:23 PM IST
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gurugram man fined 23000 challan and deaths due to potholes in india
क्या 23 हजार का चालान ठीक है?  क्या बढ़ी हुई चालान दरों का बेजां इस्तेमाल नहीं होगा?  - फोटो : अमर उजाला

मंगलवार को मौसम गरम था और खबर उससे भी गरम। 23 हजार का चालान। गुड़गांव में। माफ कीजिएगा...गुरुग्राम में। कहीं गलत नाम के लिए चालान न हो जाए ! 

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इस भारी भरकम चालान ने अब बहस भी गरम कर दी है। 

  • क्या 23 हजार का चालान ठीक है? 
  • क्या बढ़ी हुई चालान दरों का बेजां इस्तेमाल नहीं होगा? 
  • क्या सरकार जरूरत से ज्यादा वसूली नहीं कर रही?
  • क्या इस देश में एक वाहन चालक को सबसे जरूरी चीज मुहैया हो पाती है- यानी एक ठीकठाक सड़क। 
  • और क्यों न हुक्मरानों का, एक गड्ढे भरी सड़क बनाने वालों का, खराब क्वालिटी की सड़क के लिए जिम्मेदार प्रशासन का उसी शिद्दत से चालान काटा जाए जैसे गुरुग्राम के दिनेश मदान का काटा गया। 
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gurugram man fined 23000 challan and deaths due to potholes in india
क्या सड़कों की हालत से मुंह मोड़कर गहरी नींद सोई एजेंसियों की लापरवाही का बचाव किया जा सकता है।  - फोटो : फाइल फोटो

कहने वाले कह सकते हैं कि दिनेश मदान ने एक, दो नहीं पूरे पांच ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया था। न तो उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस था, न आरसी, न थर्ड पार्टी इंश्योरेंस, न पॉल्यूशन सर्टिफिकेट और हेलमेट पहनना भी भूल ही गए थे। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया कि स्कूटी की कीमत 15 हजार होगी और चालान हुआ 23 हजार का।

सच ये है कि उनकी लापरवाही का बचाव नहीं किया जा सकता। 

लेकिन, क्या सड़कों की हालत से मुंह मोड़कर गहरी नींद सोई एजेंसियों की लापरवाही का बचाव किया जा सकता है। 

वो 15 अगस्त का दिन था। आजादी के उत्सव का। मुंबई में रहने वाला 5 साल का वेदांत अपने पिता के साथ बाइक पर जा रहा था। अचानक एक गहरे गड्ढे पर बाइक फिसली और पीछे बैठा वेदांत उछलकर सड़क पर आ गिरा। पीछे से आ रहे टेंपो ने मासूम को कुचल दिया। ये अकेले मुंबई में एक महीने में तीसरी मौत थी जो सड़क पर गड्ढों की वजह से हुई। मामला टेंपो ड्राइवर पर दर्ज हुआ। प्रशासन के किसी अधिकारी पर नहीं। 

ये सिर्फ वेदांत की कहानी नहीं है। 

तत्कालीन परिवहन राज्य मंत्री मनसुख मांडविया ने एक सवाल के जवाब में संसद में माना कि साल 2015 से 2017 के बीच सड़क के गड्ढों ने 9,300 लोगों की जान ले ली। इन सड़क हादसों में 25 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए। और ये सिर्फ तीन साल के आंकड़े हैं। ये वही मनसुख मांडविया हैं जो मोदी सरकार-2 में पहले दिन संसद पहुंचे तो साइकिल पर सवार होकर दरवाजे तक आए।

शायद, संसद की सड़क पर गड्ढे नहीं होते होंगे ! 

हालात इतने बुरे हैं कि जुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट को कहना पड़ गया कि इतनी जानें तो आतंकवाद ने भी नहीं लीं। यानी, आतंकवाद से ज्यादा जानलेवा साबित हुए सड़क पर बिछे गड्ढे।

ज्यादा पीछे क्यों जाना। इसी महीने की दो सितंबर को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 2014 के एक मामले में इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी एलएंडटी के चेयरमैन एएम नाइक को उन 15 निदेशकों के नाम बताने को कहा जिन पर आगरा-दिल्ली हाईवे के रख-रखाव की जिम्मेदारी थी। इसी हाईवे पर 2014 में 3 साल के पवित्र की खराब सड़क की वजह से हुए हादसे में मौत हो गई थी। 

क्या कुसूर था इन मासूमों का? या हर साल इन्हीं गड्ढों की कब्र में सो जाने वाले तीन हजार से ज्यादा लोगों का। 

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क्या कभी आपने सुना या पढ़ा कि खराब सड़क से हुए हादसे के कारण एक अधिकारी पर 30 लाख का जुर्माना लग गया हो? - फोटो : अमर उजाला

मुंबई में एक पिता वो काम कर रहा है जो बीएमसी को करना चाहिए ताकि कोई उन गड्ढों में न समा जाए जिसमें 2015 में उनका जवान बेटा समा गया। बीते चार साल से दादाराव बिल्होरे अपने दम पर शहर की सड़कों पर बिछी कब्रों पर पत्थर लगा रहे हैं। 

चालान की राशि 10 गुना तक बढ़ाने से राजस्व तो बढ़ जाएगा। हो सकता है लोग, सारे कागजात साथ लेकर भी चलने लगें। कानून का पालन हो। सब अच्छी बातें हैं।  लेकिन क्या कभी आपने सुना या पढ़ा कि खराब सड़क से हुए हादसे के कारण एक अधिकारी पर 30 लाख का जुर्माना लग गया हो। अगर कभी ऐसा होता भी है तो बलि ठेकेदार की दी जाती है। प्रशासनिक अमला इस गिरफ्त में नहीं आता भले वो ठेकेदार उसकी मर्जी से ही क्यों न चुना गया हो। 

तो क्यों न हजारों के चालान के बरक्स एक नई मुहिम शुरू हो। ठीक सड़क नहीं तो रोड टैक्स नहीं। ठीक सड़क नहीं तो जिम्मेदार अधिकारियों के चालान काटे जाएं। किसी बेगुनाह की मौत पर, उसके परिजनों को अधिकारियों की जेब से मुआवजा दिया जाए। 

गुरुग्राम के दिनेश मदान को चालान से बचने के लिए पांच चीजें चाहिए थीं।  लेकिन वाहन चालक को सरकार की तरफ से सिर्फ एक चीज चाहिए- बिना गड्ढों की ठीकठाक सड़क। 

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।            

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