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शाहीन बाग आंदोलन: सहमतियों- असहमतियों के बीच सड़कों पर तैयार होता समय का दस्तावेज

Ratnesh Mishraरत्नेश मिश्र Updated Mon, 27 Jan 2020 08:58 PM IST
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रत्नेश मिश्र
रत्नेश मिश्र - फोटो : शाहीन-बाग प्रदर्शन
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संवादहीनता हमेशा संदेह को जन्म देती है और 'संदेह' किसी भी बात को 'बतंगड़' में बदल देता है। इसी बात-बतंगड़ को तोड़-मरोड़कर अगर जनता के बड़े भाग तक प्रसारित कर दिया जाए तो उसे बरगलाया भी जा सकता है, उसकी मानसिकता को बदला जा सकता है। लेकिन सत्य हमेशा निरंकुशता से लड़ता रहा है और देर-सबेर ही सही सामने आता ही रहा है। अक्सर होता यह भी है कि जिन आंखों से आप इस खूबसूरत दुनिया को देखते हैं, उन्हीं आंखों से सच दिखाई नहीं देता। 'सत्य' को देखने के लिए आंखों को आपकी सोच-समझ, मेहनत, तर्क-वितर्क इत्यादि के मदद की भी ज़रूरत होती है। बहरहाल कई तरह की सहमतियों-असहमतियों, गलत-सही प्रचारों के बीच शाहीन बाग आंदोलन अपनी रचनात्मक अभिव्यक्तियों के सहारे चल रहा है। 
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