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पर्यटन: आध्यात्मिक नक्शे पर आ रहा गोवा

Mon, 18 Mar 2024 02:39 PM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Mon, 18 Mar 2024 02:39 PM IST
सार

गोवा करीब 450 साल तक पुर्तगाली शासन के अधीन रहा, इस कारण यहां यूरोपीय संस्कृति का प्रभाव दिखता है, लेकिन गोवा के वास्तु शास्त्र में हिंदू प्रभाव दिखाई देता है। सबसे प्राचीन मंदिर गोवा में हैं।

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Goa Spiritual Tourism First State In India To Launch Regenerative Tourism in Goa
गोवा हमेशा सन, सेंड और सी के लिए जाना जाता रहा है। - फोटो : istock

विस्तार

पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक सोशल मीडिया पोस्ट से लक्षद्वीप एकाएक विश्व पर्यटन मानचित्र पर आ गया था। इसमें कोई दो राय नहीं है कि लक्षद्वीप बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल बनने की सभी खूबियां रखता है। वो पड़ोसी देश मालदीव को आसानी से पर्यटन में पछाड़ सकता है, लेकिन भारत के पर्यटन नेकलस में गोवा भी एक अहम हीरा है। मालदीव के मुकाबले गोवा न केवल देसी-विदेशी पर्यटकों को लुभाता है, बल्कि गोवा की प्रमोद सावंत सरकार राज्य में पर्यटकों को बढ़ावा देने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।    

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गोवा में खास


गोवा हमेशा सन, सेंड और सी के लिए जाना जाता रहा है। सूर्य के नीचे नहाते हुए सुनहरे रेत पर टहलना, नीले सागर में सर्फिंग का आनंद लेना और मनमोहक सूर्यास्त का दीदार करना गोवा के समुद्र तटों का यही सार है। गोवा अपनी नाइट लाइफ, स्वादिष्ट समुद्री भोजन और खूबसूरत समुद्र तटों के लिए जाना जाता है।

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गोवा में 75 मील लंबी तटरेखा और 40 बीच हैं, जिनमें कुछ अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं, जो गोवा को इंटरनेशनल टूरिज्म मैप पर एक अलग पहचान दिलाते हैं। हरे-भरे ताड़ के पेड़ों से घिरे बीच सैलानियों का मन मोह लेते हैं। कलंगुट बीच, पालोलेम बीच, बागा बीच, अंजुना बीच, कैंडोलिम बीच, अरामबोल बीच, अगोंडा बीच, मोरजिम बीच और मीरामार बीच प्रसिद्ध हैं। अंजुना, कलंगुटे और बग जैसे बीच तो मालदीव को पीछे छोड़ते हैं।
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अब गोवा सरकार राज्य को आध्यात्मिक पर्यटन के नक्शे पर लाने के प्रयास में जुटी है। आध्यात्मिक पर्यटन के लिए जिस इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी, उसके लिए सरकार काम कर रही है। राज्य सरकार ने गोवा में देश का पहला रीजेनरेटिव पर्यटन लॉन्च किया है। गोवा की आजादी की 62वीं वर्षगांठ पर राज्य के पर्यटन विभाग ने नई पर्यटन नीति रीजेनरेटिव टूरिज्म की घोषणा की थी। रीजेनरेटिव के माध्यम से सरकार राज्य में पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक संरक्षण और सामुदायिक सशक्तिकरण को मजबूत करना चाहती है। नई नीति के माध्यम से प्रमोद सावंत एकादश तीर्थ की शुरुआत के साथ ही आध्यात्मिकता, स्वदेशी, सभ्यतागत और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, सजग पर्यटन पर जोर देते हुए भारतीय पर्यटन को एक नया आयाम देना चाहते हैं।

महाभारत काल में गोवा

यदि गोवा के इतिहास की बात करें तो इसका उल्लेख महाभारत में भी आता है। महाभारत में गोवा गोपराष्ट्र यानी गोपालकों के देश के रूप में मिलता है। संस्कृत के कुछ अन्य पुराने स्रोतों में गोवा को गोपकपुरी और गोपकपट्टन कहा गया है, जिनका उल्लेख हरिवंशम और स्कंद पुराण में मिलता है। जनश्रुति के अनुसार, गोवा की रचना भगवान परशुराम ने की थी। मान्यता है कि परशुराम ने एक यज्ञ के दौरान अपने बाणों की वर्षा से समुद्र को कई स्थानों पर पीछे धकेल दिया था। इसी वजह से आज भी गोवा में बहुत से स्थानों का नाम वाणावली, वाणनस्थली आदि है।


चूंकि, गोवा करीब 450 साल तक पुर्तगाली शासन के अधीन रहा, इस कारण यहां यूरोपीय संस्कृति का प्रभाव दिखता है, लेकिन गोवा के वास्तु शास्त्र में हिंदू प्रभाव दिखाई देता है। सबसे प्राचीन मंदिर गोवा में हैं। गोवा की संस्कृति काफी प्राचीन है। 1000 साल पहले गोवा कोंकण काशी के नाम से जाना जाता था। यहां का श्री कामाक्षी, सप्तकेटेश्वर, श्री शांतादुर्ग, महालसा नारायणी, परनेम का भगवती मंदिर, महालक्ष्मी आदि बेहद दर्शनीय हैं। पुर्तगालियों ने गोवा की संस्कृति का नामोनिशान मिटाने के लिए बहुत प्रयास किए, लेकिन यहां की मूल संस्कृति इतनी शक्तिशाली थी कि उनके प्रयास असफल ही रहे।

Goa Spiritual Tourism First State In India To Launch Regenerative Tourism in Goa
गोवा में वर्ष 2023 में जनवरी से नवंबर के बीच अकेले 4.03 लाख विदेशी पर्यटक घूमने आए। - फोटो : pixabay

वैसे तो गोवा में पर्यटक सीजन साल भर चलता है, लेकिन अक्टूबर से फरवरी गोवा घूमने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इसमें भी फरवरी को बेस्ट माना जाता है, क्योंकि इस महीने गोवा का मौसम बेहद खुशनुमा रहता है। फरवरी में गोवा कार्निवल फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। गोवा में होटल्स की अच्छी सुविधा है। यहां आसानी से होटल मिल जाते हैं। गोवा में रेकी और योग सीख सकते हैं। यहां कई योग केंद्र हैं, जहां सैलानी कई दिनों तक रहकर योग सीखते हैं।

मालदीव की तुलना में गोवा पहुंचना ज्यादा आसान

जहां तक कनेक्टिविटी की बात है तो मालदीव की तुलना में गोवा पहुंचना ज्यादा आसान है। गोवा घरेलू और इंटरनेशनल एयर कनेक्टिविटी से जुड़ा है। गोवा मुंबई और बेंगलुरु से सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। इन शहरों से गोवा के लिए सीधी लग्जरी बसें भी चलती हैं। कोंकण रेलवे की शुरुआत के बाद गोवा देश के पूर्वी तटीय शहरों से जुड़ गया था। गोवा के लिए देश के अधिकांश शहरों से सीधी ट्रेन चलती हैं। मालदीव के मुकाबले गोवा घूमना बेहद सस्ता भी है। जहां दो लोगों को मालदीव घूमने पर 1.5 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं, वहीं गोवा घूमने का दो लोगों का खर्च मात्र 40 हजार रुपये आता है।

वर्ष 2023 में मालदीव पहुंचने वाले टूरिस्ट की संख्या 18 लाख थी, जिनमें एक बड़ी संख्या भारतीयों की थी, जबकि गोवा में वर्ष 2023 में जनवरी से नवंबर के बीच अकेले 4.03 लाख विदेशी पर्यटक घूमने आए। कोविड से पहले वर्ष 2019 में 9.37 लाख विदेशी पर्यटक गोवा पहुंचे थे। हर साल 20 साल से अधिक भारतीय भी गोवा घूमने आते हैं। गोवा सरकार ने कोविड से पहले की स्थिति को लाने के लिए कमर कसी है।

सावंत सरकार गोवा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल मार्ट और प्रदर्शनियों में भाग ले रही है। अंतरराष्ट्रीय रोड शो आयोजित कर रही है। गोवा सरकार होम स्टे और बी एंड बी नीति को भी बढ़ावा दे रही है, जिसे बेड और ब्रेकफास्ट नीति के रूप में भी जाना जाता है। इस पहल का उद्देश्य गोवा के भीतरी इलाकों को प्रदर्शित करना है। वो दिन दूर नहीं, जब गोवा देश-दुनिया का सबसे पसंदीदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन होगा।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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