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गांधी जयंती विशेष: बापू का व्यक्तित्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और प्रेरणा

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gandhi jayanti 2023 vision of mahatama gandhi and leadership of narendra modi
गांधी जयंती विशेष: बापू का व्यक्तित्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व - फोटो : Social Media

प्रो. (डॉ.) जसीम मोहम्मद

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 स्वदेशी/मेक इन इंडिया, राष्ट्रीयता की समझ और अवधारणा, योग, सामाजिक समरसता, हाशियाकृत समाज के उत्थान की चिंता, विश्वबंधुत्व आदि पर जोर के नज़रिए से महात्मा गांधी जी और नरेंद्र मोदी जी,  दोनों के विचार समान कहे जा सकते हैं। स्वाभाविक रूप से इनके चिंतन को ‘गांधी -मोदी मार्ग या गांधी-मोदी दर्शन की संज्ञा दी जा सकती है।

भारत के आधुनिक इतिहास में महात्मा गांधी और नरेंद्र मोदी दोनों अलग-अलग युगों और विचारधाराओं द्वारा चिह्नित एवं प्रशंसित, चिरस्मरणीय, स्मारकीय दो महान हस्ताक्षर के रूप में खड़े हैं, फिर भी जनता को जगाने और सामाजिक उत्थान के अपने अविस्मरणीय साहसी प्रयासों की दृष्टि से एक साथ बंधे हुए हैं।
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गांधी जी के अथक प्रयास, अकाट्य तर्क और अडिग संकल्प ने अहिंसक विरोध एवं प्रतिरोध की दुर्जेय-अपराजेय ऊर्जा का उपयोग किया और ब्रिटिश औपनिवेशिक साम्राज्यवाद की दमनकारी नीतियों  एवं अत्याचारी शासन के विरूद्ध भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट किया। उनका प्रतीकात्मक नमक मार्च, नागरिक अवज्ञा की प्रभावशीलता का एक अचूक प्रमाण है, जिसने आम नागरिकों को अन्यायपूर्ण कानूनों का सामना करने के लिए सशक्त बनाया। इस प्रकार अपने अदम्य साहस और संकल्प से उन्होंने स्वतंत्रता के लिए एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन को जन्म दिया।
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इसके विपरीत, चुंबकीय आकर्षण से संपृक्त अनुपमेय करिश्माई व्यक्तित्व के धनी समकालीन भारतीय राजनीति के प्रखर और कुशल नेतृत्वकर्ता माननीय नरेंद्र मोदी ने आधुनिक भारत के अपने भव्य और महान दृष्टिकोण के आसपास लाखों-लाखों लोगों को एकत्र करने के लिए बहुत चतुराई और सूझबूझ से युगपरिवेश की अपेक्षाओं के अनुरूप तकनीकी उपकरणों और संसाधनों का कौशलपूर्ण उपयोग किया।

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ताकत शारीरिक शक्ति से नहीं आती है, यह अदम्य इच्छाशक्ति से आती है: महात्मा गांधी - फोटो : Social Media

उनकी आकर्षक एवं चुंबकीय करिश्माई उपस्थिति ने विशाल रैलियों के लिए उत्प्रेरक का कार्य किया, जहां उनकी प्रेरक वाक्पटुता और अटूट विश्वास ने जनता में राष्ट्रीय स्वाभिमान एवं अटूट देशभक्ति का व्यापक जुनून जगाया। उनके द्वारा प्रेरित ‘स्वच्छ भारत’ जैसी पहल ने न केवल राष्ट्रीय प्रगति के प्रति उनके समर्पण को प्रदर्शित किया, बल्कि इसमें  व्यापक सार्वजनिक भागीदारी भी विकसित की, जिससे नागरिकों को देश के इस महत् उपक्रम को आकार देने में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।

संक्षेप में, समय और अलग-अलग विचारधाराओं के कारण अलग-अलग होने के बावजूद, महात्मा गांधी और नरेंद्र मोदी दोनों ने महान आदर्शों की खोज में जनता को एकजुट करने और संगठित करने की अपनी उल्लेखनीय क्षमता के साथ भारतीय इतिहास के ताने-बाने को अमिट रूप में अंकित किया है।


भू-राजनीतिक एवं आर्थिक झड़पें एवं विवाद वर्तमान दौर में प्राय: वैश्विक कैनवास पर व्यापक रूप से सामने आ रहे हैं, जो भारत को अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए एक आत्मनिर्भर घरेलू बाजार के बुनियादी ढांचे को रणनीतिक रूप से उपयोग और लागू करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। स्वदेशी आंदोलन, स्वदेशी "मेड इन इंडिया" उत्पादों और योग जैसी सांस्कृतिक विरासत एवं उपलब्धियों की वकालत में गहराई से जुड़ा हुआ है।


इनकी ऐतिहासिक विचारधारा महात्मा गांधी द्वारा रखी गई तथा उनके द्वारा स्थापित वैचारिक आधारशिला से हुई है, जिसकी प्रतिध्वनि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्ववाली समकालीन नीतियों के माध्यम से गूंजती है। आत्मनिर्णय के लिए भारत के लंबे संघर्ष के दौरान स्वदेशी के लिए महात्मा गांधी के स्पष्ट आह्वान की गूंज पर्याप्त रूप से सुनाई देती है। उनके मौलिक ग्रंथ "हिंद स्वराज" से इसका स्पष्ट प्रमाण मिलता है। उसमें दिए गए प्रभावी लोकाचार में आत्मनिर्भरता और विदेशी वस्तुओं के दृढ़ त्याग के गुणों की प्रशंसा की गई है।

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किसी देश की महानता और उसकी नैतिक उन्नति का अंदाजा हम वहां जानवरों के साथ होने वाले व्यवहार से लगा सकते हैं: महात्मा गांधी - फोटो : Social Media

ब्रिटिश वस्त्रों और नमक के सुनियोजित बहिष्कार जैसे साधारण , किंतु प्रभावी उपायों के माध्यम से शक्ति में वृद्धि करनेवाला यह आंदोलन, सन् 1930 ई. के प्रतिष्ठित दांडी मार्च के साथ शानदार ढंग से चरम पर पहुंच गया। ऐतिहासिक पूर्ववृत्त में विद्वतापूर्ण कौशल के साथ, प्रख्यात आर्थिक इतिहासकार तीर्थंकर रॉय की गहन विद्वता उसकी गहरी छाप को उजागर करती है। स्वदेशी भारतीय उद्योगों पर स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव। रॉय की सूक्ष्म व्याख्या कपड़ा, कागज और रासायनिक विनिर्माण क्षेत्रों के स्वायत्त विकास को बढ़ावा देने में आंदोलन की उत्प्रेरक भूमिका को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है, जिससे गांधी द्वारा समर्थित आत्मनिर्भरता के लोकाचार की पुष्टि होती है।

समसामयिक आख्यानों के संदर्भ में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वास्तुशिल्प रूप से कल्पना की गई दूरदर्शी "मेक इन इंडिया" अभियान, स्वदेशी विनिर्माण को फिर से मजबूत करने और विदेशी निवेश के प्रवाह को बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट रैली के रूप में उभरता है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा प्रस्तुत अनुसंधान स्पष्ट रूप से इस प्रयास से मेल खाता है, जो कई गुना विनिर्माण क्षेत्रों पर अभियान के परिवर्तनकारी प्रभावों और लाभकारी रोजगार के अवसरों के परिणामी प्रवर्धन को बढ़ाता है। इसके अलावा, योग की प्रतिष्ठित परंपरा के लिए मोदी की विश्व स्तर पर गूंजती वकालत इसके प्राचीन, समग्र और स्वास्थ्य-प्रदाता सिद्धांतों से पोषण लेती है।
 

द लांसेट द्वारा विविध अध्ययनों की सूक्ष्म समीक्षा मानसिक कल्याण, तनाव क्षीणन और समग्र शारीरिक सद्भाव पर लाभकारी प्रभाव उत्पन्न करने में योग की स्पष्ट प्रभावकारिता को उजागर करती है। यह वास्तविक मान्यता निर्विवाद रूप से एक शक्तिशाली "सॉफ्ट पावर" साधन के रूप में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है, जो केवल आर्थिक लेनदेन के दायरे से परे अंतर-सांस्कृतिक बंधनों और संबद्धताओं को विकसित करने और पोषित करने के लिए एक राष्ट्र की क्षमता को बढ़ाती है।


कह सकते हैं कि गांधी जी के विचारों और सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से आगे ले जाने और उसे सुदृढ़ स्वरूपप्रदान करने में नरेंद्र मोदी का अविस्मरणीय योगदान है। गांधी जी के मूलभूत विचारों का व्यावहारिक विस्तार मोदी जी के अग्रगामी सोच का परिणाम कहा जाना चाहिए। दोनों भारतीय समाज को संगठित एवं प्रेरित करने की दृष्टि से एक ही पथ के महायात्री कहे जाने चाहिए। 


 (लेखक,नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र नई दिल्ली के सभापति हैं। इनसे profjasimmd@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है!)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):
 यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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