फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   domestic violence in indian families and women rights in india

आपस की बात: घर और बाहर भी पिटती महिलाएं

Thu, 19 Dec 2019 11:56 AM IST
Veena Nagpal वीना नागपाल
Updated Thu, 19 Dec 2019 11:56 AM IST
विज्ञापन
domestic violence in indian families and women rights in india
घरेलू उत्पीड़न और प्रताड़ना से महिलाएं त्रस्त रहती हैं और प्राय: इसे चुपचाप सहती भी रहती हैं। - फोटो : फाइल फोटो

घरेलू उत्पीड़न और प्रताड़ना से महिलाएं त्रस्त रहती हैं और प्राय: इसे चुपचाप सहती भी रहती हैं। आजकल बस इतना भर होने लगा है कि जब पानी सिर के ऊपर गुजर जाता है और उनकी सहनशक्ति जवाब देने लगती है तो वह इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने पुलिस थाने पहुंचने लगी हैं। इस घरेलू हिंसा के विरुद्ध शासन भी बहुत संवेदनशील हैं और महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने के लिए उसने सख्त कानून भी बनाएं हैं, लेकिन महिलाओं पर यह जुल्म होना बंद नहीं हुआ।

विज्ञापन


घरेलू उत्पीड़न तो महिलाओं का हो रहा है परंतु अब घर के बाहर भी उनकी कुटाई-पिटाई हो रही है। आए दिन आजकल समाचार-पत्रों में यह खबर पढ़ने को मिलती है कि महिला के डायन व चुड़ैल होने के संबंध में शक था फिर उस पर बच्चा चोरी का इल्जाम लगाकर  सरेआम पीटा गया।
विज्ञापन


यह पिटाई इतनी क्रूरता से की जाती है कि उसका शरीर मानों हाड़-मांस का न बना होकर एक पत्थर हो जिस पर इस तरह से प्रहार किया जाए। इतना ही नहीं उसके परिवार अर्थात् पति व बच्चों के सामने तक एक नहीं बल्कि पांच-छह पुरुष मिलकर उसको कूटते-पीटते हैं। यह सब सार्वजनिक स्थान पर किया जाता है। प्रताड़ना की हद तो यहां तक पहुंच जाती है कि उसे किसी पेड़ से बांधकर पीटा जाता है ताकि वह किसी भी प्रकार अपना बचाव न कर सके।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस सारे दृश्य को जमा होकर भीड़ देखती रहती है, लेकिन किसी के भी मन में उस औरत के प्रति दया नहीं उपजती। मारने वालों से लेकर भीड़ तक लोग मनुष्य न होकर अमानुष बन जाते हैं। घरेलू हिंसा तो घर की चारदीवारी में होती है लेकिन खुले में, भीड़ भरे सार्वजनिक स्थान पर जब महिला की इतनी क्रूरता से पिटाई होती है तो उसकी चीखें आसमान तक गूंज जाती होंगी पर तब भी यह दर्द भरी आवाज किसी को सुनाई नहीं देती।

इतना ही नहीं, सब हदें तो तब पार हो जाती हैं जब उस महिला को नग्न कर गांव या कस्बे भर में घुमाया जाता है और साथ ही उस पर पत्थर बरसाते रहते हैं। यह अमानवीयता महिलाओं के साथ ही क्यों होती है? उन्हें ही क्यों चुड़ैल और डायन ठहराया जाता है? पुरुष को तो कभी भूत-प्रेत नहीं ठहराया जाता? ऐसा क्यों?
 

domestic violence in indian families and women rights in india
महिलाओँ पर यूं बाहर खुले में की जाने वाली हिंसात्मक प्रताड़ना पुरुष के वहशीपन का खुला प्रमाण है। - फोटो : शटरस्टॉक्स

इस पर प्रसिद्ध लेखिका ने भी सवाल उठाए हैं और बार-बार कहा है कि महिलाओँ पर यूं बाहर खुले में की जाने वाली हिंसात्मक प्रताड़ना पुरुष के वहशीपन का खुला प्रमाण है। जितनी घरेलू हिंसा एक अपराध है उससे कई गुना ज्यादा किसी महिला का यूं सार्वजनिक रूप से किया गया अपमान इतना गंभीर अपराध है कि इसकी सबसे कठोर सजा होनी चाहिए।

कानून अपनी जगह है पर, इनको लागू करने वाले भी ईमानदार होने चाहिए, नहीं तो कानूनों का जमीनी तौर पर कितना असर है यह हम सब जानते हैं। जब तक निचले स्तर तक यह बात नहीं पहुंचाई जाएगी कि किसी भी महिला का उत्पीड़न चाहे घर में हो या बाहर एक घोर अपराध है।

निचले स्तर से मतलब उन थानों से है जो दूर-दराज के इलाकों में हैं। वहीं इस तरह के अपराधों को होने से महिलाओं का बचाव कर सकते हैं। कई बार तो इन इलाकों में राजनीतिक सत्ता इतनी हावी होती है कि उसी के गुर्गे महिला या महिलाओं का इस तरह अपमान करते हैं।

एक घटना में तो ऐसे ही राजनीतिक सत्ता वाले बाहुबली के इशारे पर पुलिस वालों ने एक महिला को बेल्ट से पीटा। दरअसल, उस बाहुबली का एक कार्यकर्ता उस विधवा महिला की जमीन हथियाना चाहता था। 

कानून को बेअसर व लाचार नहीं होना चाहिए। कानून का भय होना चाहिए। महिलाओं के प्रति होने वाली घरेलू व सार्वजनिक हिंसा की एक भी घटना नहीं हो तभी महिलाएं सम्मान से जी सकेंगी। 

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।       

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed