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प्रकृति और जैव विविधता के रंग: रेगिस्तान में शान और स्वाभिमान की कहानी कहता कैर

Tue, 26 May 2026 05:19 PM IST
Ramawtar Singh रामावतार सिंह
Updated Tue, 26 May 2026 05:19 PM IST
सार

राजस्थान की मरुधरा में उगने वाला कैर सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि रेगिस्तान की जीवनरेखा है। यह पेड़ वन्यजीवों को आश्रय देने के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका और जैव-विविधता को भी सहारा देता है।

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Desert’s Lifeline: How Ker Trees Protect Rajasthan’s Ecology, Wildlife And Rural Livelihoods
कैर सिर्फ एक छोटा फल नहीं है। यह रेगिस्तान का बेहद कीमती आभूशण है - फोटो : रामावतार सिंह

विस्तार

पीत वर्ण पर हरी शिखाएं, फूल गुलाबी लाल। 

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अगर मनाओ ख़ैर कैर की, मरूधरा खु़षहाल। 

कैर का ज़िक्र होते ही अकसर हम राजस्थान के विषेश व्यंजन ‘कैर-सांगरी’ को याद करते हैं या फिर कैर के अचार को। लेकिन कैर सिर्फ एक छोटा फल नहीं है। यह रेगिस्तान का बेहद कीमती आभूषण है, जो मरूभूमि के कटाव को रोकता है। यहां के वन्य जीवों को भीषण गर्मी में सुरक्षा, आवास एवं भोजन प्रदान करता है। यहां की कठोर जलवायु एवं जटिल भौगोलिक परिस्थितियों में भी जैव-विविधता को बनाए रखने में मदद करता है।  

कैर अत्यधिक तापमान वाले मरूस्थलों में भी शान से खड़े होकर रेतीले तूफानों से लड़ता है, यहां के जन-जीवन की सुरक्षा करता है। गोडावण, लोमड़ी, जंगली बिल्ली सहित कई ऐसे जीवों को शरण देता है, जो इन पेड़ों के अभाव में दुर्लभ होते जा रहे हैं। राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण एवं गिद्धों की सात प्रजातियां, जो कभी प्रचुर संख्या में पाए जाते थे, आज उनके प्राकृतिक आवास संकुचित होने के कारण लुप्त-प्राय हो रहे हैं। 
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कैर, एक कंटीला झाड़ीनुमा पेड़ है, जिसमें प्रायः पत्तियां नहीं होती। सिर्फ बारिष के मौसम में इसमें छोटी-छोटी पत्तियां आती है, जो कुछ ही दिनों में झड़ जाती है। इसकी कोमल हरी एवं नुकीली शाखाओं में ही क्लोरोफिल होता है, जो प्रकाश-संश्लेषण करके भोजन बनाती है। पत्तियां नहीं होने के कारण कैर के पेड़ से वाश्पोत्सर्जन कम होता है, यानि सूखे/अकाल या अधिक गर्मी के मौसम में यह अपने भीतर पानी को बचाए रखने में सक्षम होता है। इसकी शाखाएं जटाओं की तरह एक झुरमुट बनाते हुए इस तरह घेरा बनाती है कि इसके भीतर तापमान नियन्त्रित रहता है। इसी कारण इसकी छांव में लोमड़ी, नेवला, सॉप, हेजहोग, जैसे जीव निवास करते हैं या प्रजनन के दौरान इसका उपयोग करते हैं।  

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Desert’s Lifeline: How Ker Trees Protect Rajasthan’s Ecology, Wildlife And Rural Livelihoods
ग्रामीण इलाकों में कैर भेड़, बकरी, ऊंट आदि पशुओं का भोजन है। - फोटो : रामावतार सिंह

रेगिस्तान में सरीसृप एवं चूहे आदि काफी तादाद में होने के कारण यहां कई तरह के षिकारी पक्षी भी निवास करते हैं। इन पक्षियों को शिकार करने के लिए ऐसे पेड़ों की जरूरत होती है, जिनकी शाखाओं पर बैठकर वे अपने षिकार पर निगरानी रख सके।

डेजर्ट नेशनल पार्क, जैसलमेर एवं ताल छापर अभयारण्य, चुरू जैसे क्षेत्रों में कैर के पेड़ बहुलता से होने के कारण यहां कई प्रजातियों के बाज़, चील, गिद्ध आदि देखे जा सकते हैं। इसी कारण दुनियाभर के वन्य जीव प्रेमी/पर्यटक इन षिकारी पक्षियों के अवलोकन/अध्ययन के लिए यहां आते हैं। राजस्थान के सूखे एवं रेगिस्तानी क्षेत्रों में कैर भोजन एवं आजीविका का बहुत बड़ा साधन है। विषेशकर गर्मी के मौसम में यहां के लोग कैर के फल एकत्रित करते हैं, अचार बनाने के अतिरिक्त इन्हें सुखाकर रखते हैं, ताकि सब्जियों की उपलब्धता ना होने पर इन्हें पकाकर खाया जा सके। ग्रामीण इलाकों में कैर भेड़, बकरी, ऊंट आदि पशुओं का भोजन है।

किसान लोग कैर की लकड़ी को खेती के औजार बनाने एवं खेतों की फेंसिंग में इस्तेमाल करते हैं। अपनी मजबूती के कारण इसकी लकड़ी ईंधन के रूप में जलाने एवं कोयला बनाने में काम में ली जाती है। कैर की जड़, छाल, फल, पत्तियों आदि का आयुर्वेद एवं यूनानी औषधियों में भी बहुत महत्त्व है।  

इन दिनों कैर के पेड़ लाल-गुलाबी फूलों से लदे हुए हैं, इन सूखे क्षेत्रों की शाेभा बढ़ाते हुए ये फूल पक्षियों, तितलियों, मधुमक्खियों, ततैयों सहित कई जीवों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। जल्द ही ये फूल छोटे-छोटे फलों में तब्दील हो जाएंगे और यहां के ग्रामीण लोग छोटे-छोटे समूहों में अपने झोलों में कैर के फल बटोरते हुए दिखाई देंगे। गर्मियां आते ही राजस्थान के कस्बों और बाजारों में भी कैर बिकते हुए दिखेंगे।  

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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