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कोरोना से जंग: सुरक्षित सफर के लिए साइकिल बनी उम्दा सवारी

Sat, 23 May 2020 12:12 PM IST
Priyamvada Sahay प्रियंवदा सहाय
Updated Sat, 23 May 2020 12:12 PM IST
सार

  • यूरोपीय देशों में लोग शहर के अंदर दूरी तय करने के लिए साइकिल को तवज्जो देते हैं।
  • यूरोप की ढांचागत व्यवस्था और तापमान दोनों ही साइकिल चालकों को सहयोग करते हैं।
  • यूरोपीय देश साइकिल को कोरोना काल में सफर के लिए सबसे अच्छा वाहन मान रहे हैं।
  • विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि बसों या मेट्रो में सफर करना फिलहाल जोखिम भरा है।

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coronavirus social distancing benefits importance of cycling during lockdown
यूरोपीय देशों में आज भी साइकिल एक प्रमुख वाहन है। - फोटो : Pixabay

विस्तार

लॉकडाउन टूटेगा तो आना-जाना कैसे होगा? पब्लिक ट्रांसपोर्ट ठीक रहेगा या फिर अपनी गाड़ी से जाना? कौन सा साधन महंगा साबित हो सकता है और कौन इस मुश्किल में बजट को थोड़ा राहत पहुंचा सकता है? ऐसी कई बातें धीरे-धीरे लोगों के जेहन में आने लगी होंगी। इसलिए जरूरी है कि आने वाले दिनों के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी जाए।

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ऊपर दिए गए सभी सवालों के जवाब में साइकिल व इलेक्ट्रिक स्कूटर काफी फिट बैठते हैं। जी हां अगर साइकिल को अभी से भी प्रधानता देना शुरू किया जाए तो निश्चित रूप से यह आम आदमी की सेहत और जेब दोनों के लिए कारगर साबित हो सकता है। यही नहीं प्रदूषण नियंत्रण व पर्यावरण के लिए खर्च होने वाली रकम का बोझ सरकारी खजाने पर से कम हो सकता है। साथ ही यह स्वदेशी अपनाने के संकल्प को पूरा करने में भी मददगार होगा। 
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यूरोपीय देशों में आज भी साइकिल एक प्रमुख वाहन है। यहां लोग शहर के अंदर दूरी तय करने के लिए साइकिल को तवज्जो देते हैं। मौजूदा समय में कोरोना की वजह से इसका महत्व और भी बढ़ गया है। लोग शहर के अंदर सार्वजनिक वाहनों की सवारी के अलावा साइकिल या इलेक्ट्रिक स्कूटर को चलाना ज्यादा बेहतर विकल्प समझते हैं।
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लंबी दूरी तय करने या फिर शहर से बाहर जाने के लिए कार व दूसरे चार पहिया वाहनों को तवज्जो दी जाती है। हालांकि यूरोप की ढांचागत व्यवस्था और तापमान दोनों ही साइकिल चालकों को सहयोग करते हैं। वहीं सोशल डिस्टेंसिंग, व्यायाम के अलावा यह पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी उम्दा सवारी है। इसलिए यूरोपीय देश साइकिल को कोरोना काल में सफर के लिए सबसे अच्छा वाहन मान रहे हैं।
 

तमाम यूरोपीय देशों में साइकिल चालकों की बढ़ती संख्या देख...

coronavirus social distancing benefits importance of cycling during lockdown
सार्वजनिक वाहनों में सफर करते हुए कोरोना संक्रमण का खतरा अधिक है। - फोटो : फाइल फोटो

सार्वजनिक वाहनों में सफर करते हुए कोरोना संक्रमण का डर लोगों में काफी ज्यादा है। विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि बसों या मेट्रो में सफर करना फिलहाल जोखिम भरा है। जिसकी वजह से साइकिल की मांग दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। आंकड़े बताते हैं कि बीते कुछ महीनों में यूके में साइकिल की मांग 200 फीसदी तक बढ़ गई है।

साइकिल विक्रेता मांग पूरी करने में असमर्थता जता रहे हैं। वहीं साइकिल की मरम्मत जो कुछ हफ्ते पहले तक महज एक दिन में हो जाती थी, उसके लिए अब दो हफ्ते तक का इंतजार करना पड़ रहा है। लोग पुरानी साइकिल ठीक कराने के लिए वेटिंग में हैं।
 
तमाम यूरोपीय देशों में साइकिल चालकों की बढ़ती संख्या देख साइकिल लेन को चौड़ा किया जा रहा है। ऐसा करने वाले देशों में यूके के अलावा जर्मनी, फ़्रांस सबसे आगे है। जबकि पेरिस में 650 किलोमीटर का साइकिल पथ तैयार करने का काम पिछले कुछ हफ्तों में हुआ है। साथ ही साइकिल लेन को भी बेहतर किया गया।

यही शुरूआत स्कॉटलैंड में भी हुई है। इस दौरान स्वीडन और फिनलैंड में भी सार्वजनिक वाहनों व टैक्सी के इस्तेमाल में कमी आई है और इसकी जगह साइकिल चालकों की संख्या बढ़ी है।

एक स्थानीय महिला से जब इस बारे में बात हुई तो उन्होंने कहा कि वे बीते कुछ सालों से साइकिल नहीं चला रही, लेकिन अब उनके स्वास्थ्य और बजट वाले सोशल डिस्टेंसिंग के लिए यह काम आने वाली है। इसका रखरखाव भी दूसरे गाड़ियों से सस्ता है।

यह दुखद है कि हमारे बच्चों को सबसे पहले साइकिल चलाना इसलिए सिखाया जाता है ताकि वे....

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यूरोप के ज्यादातर देशों में कंपनियों के ऊंचे ओहदे पर बैठे लोग भी सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। - फोटो : Social media

आपको यह जानकर दिलचस्प लगेगा कि यूरोप के ज्यादातर देशों में कंपनियों के ऊंचे ओहदे पर बैठे लोग भी सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल धड़ल्ले से करते हैं। स्वीडन, लंदन या फिर डेनमार्क सभी जगहों पर राजनेताओें और वीआईपी लोगों को सड़क इस्तेमाल के लिए कोई विशेष अधिकार नहीं है।

सड़क इस्तेमाल के लिए आम जनता और राजनेता सभी को बराबर अधिकार मिले हुए हैं। वे आम जनता की तरह सार्वजनिक सेवाओं का लाभ उठाते हैं। यहां की सड़कों पर जाम नहीं लगने का यह भी एक बड़ा कारण है। जबकि कई ऐसे लोग भी आपको मिलेंगे जो मोटी कमाई तो करते हैं, लेकिन दफ्तर जाने के लिए साइकिल या इलेक्ट्रिक स्कूटर व बाईक को पहली पसंद बनाते हैं। 

साइकिल की लोकप्रियता यूरोप में नई नहीं है। बच्चों को साइकिल सिखाने के साथ अभिभावक खुद भी साइकिल का साथ कभी नहीं छोड़ते। यह किसी के लिए सोशल स्टेट्स सिंबल नहीं होता। इसकी एक वजह पर्यावरण के प्रति लोगों की जागरूकता, सेहत को लेकर गंभीरता और सस्ता टिकाऊ सवारी होना भी है।

अगर भारत में भी शहर के अंदर साइकिल को प्राथमिकता दी जाए या फिर साइकिल लेन बनाएं और उनका विस्तार किया जाए तो कोरोना से जंग में निश्चित ही यह सवारी मददगार होगी। वहीं पर्यावरण के लिहाज से भी कारगर साबित होगा।

यह दुखद है कि हमारे बच्चों को सबसे पहले साइकिल चलाना इसलिए सिखाया जाता है ताकि वे दूसरी गाड़ियों पर संतुलन बना सके। भारत के शहरी इलाकों में साइकिल की अहमियत इससे ज्यादा कुछ भी नहीं रह गई है, क्योंकि युवाओं का साइकिल चलाना स्टेट्स से जोड़कर देखा जाने लगा और देखते ही देखते हालत यह हो गई कि स्कूल, कॉलेज या दफ्तर कहीं भी साइकिल सम्मानजनक सवारी नहीं रह गई है।

सामाजिक व्यवस्था में यह महज गरीब व वंचित वर्ग की सवारी है तो अमीरों के लिए शौक पूरा करने का जरिया। जबकि छोटे बच्चों के लिए गाड़ी चलाना सीखने की पहली पाठशाला। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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