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मध्य प्रदेश:  कोरोना के खिलाफ अकेले जंग लड़ रहे शिवराज, मंत्रियों के ना होने से आ रही मुश्किलें

Wed, 08 Apr 2020 03:17 PM IST
Satish Alia सतीश एलिया
Updated Wed, 08 Apr 2020 03:17 PM IST
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coronavirus in madhya pradesh indore bhopal shivraj singh chouhan
मप्र में सरकार के नाम पर केवल सीएम शिवराज सिंह चौहान हैं। - फोटो : ANI

ध्य प्रदेश में 14 महीने पुरानी कमलनाथ सरकार के पतन की तैयारी और बचाव की सियासत ने प्रदेश मे कोरोना के खिलाफ लंबी लड़ाई की जो कमजोर तैयारी बीते माह के आखिरी दिनों में हुई थी, उसका खामियाजा प्रदेश में कोरोना के पॉजिटिव मामले बढ़ने के रूप में लगातार सामने आ रहा है।

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करीब एक पखवाड़ा पहले मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान अकेले ही करीब ढाई दर्जन मंत्रियोें का काम कर रहे हैं। आते ही मुख्य सचिव कई बड़े अफसरों और मैदानी अफसरों की बदली ने भी पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री के वक्त में कोरोना से लड़ने के बने सिस्टम में कहीं न कहीं अल्प विराम जैसै हालात बने लेकिन इसके बाद से मुख्यमंत्री लगातार कोरोना पर ही पूरी तरह से सरकार और शासन को केंद्रित किए हुए हैं, लेकिन नौकरशाही के फैसलों और जानकारियां जाहिर नहीं करने के चलते स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव, संचालक, अपर संचालक से लेकर कई अफसर कर्मचारी काेरोना पॉजिटिव पाए गए हैँ।
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इसके पीछे अहम कारण उनमें से कुछ के परिवारों के सदस्यों का अमेरिका जैसे कोरोना प्रभावित देशों से आने की जानकारी के बावजूद इन अफसरों का खुद को कोरंटाइन करने के बजाय सरकारी कामकाज में जुटे रहना और परिवार की ट्रेवल हिस्ट्री को अपने तक ही बनाए रखने जैसी गंभीर लापरवाही है। 
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ढाई दर्जन मंत्री बन सकते हैं, बनते तो सरकार चलाने में होती सहूलियत
मध्य प्रदेश विधानसभा में अभी 230 में से 24 सीटें रिक्त हैँ। यानी वर्तमान मेे 206 विधायक हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में विधायक संख्या के 15 फीसदी यानी 29 मंत्री हो सकते हैं। कोराना संकटकाल में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, नगरीय प्रशासन, होम, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ऊर्जा, श्रम समेत करीब एक दर्जन ऐसे महकमे हैँ, जिनमें समन्वय और प्रशासन चुस्ती परम आवश्यक है।

पूरा मंत्रिमंडल भले न सही लेकिन एक दर्जन मंत्री बनाए जाते तो बेहतर काम हो सकता था। वर्तमान मेे अकेले मुख्यमंत्री समूची सरकार की तरह दिन-रात जूझ रहे हैं। तंत्र का आलम यह है कि 21 के टोटल लॉक डाउन में भी राजधानी भोपाल समेत ज्यादातर शहरोें और कस्बों में इसका उल्लंघन होता रहा। इससे कोरोना संकमण के फैलाव की आशंका बलवती होने के चलते अब मंगलवार से सख्त लॉक डाउन करने के निर्देश दिए गए हैं।

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मप्र में सरकार के नाम पर केवल सीएम शिवराज सिंह चौहान हैं। - फोटो : फाइल फोटो

इधर काम नहीं होने से बेचैन हैं भाजपा के वरिष्ठ विधायक   
भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा कमलनाथ सरकार के तख्ता पलट में महत्वपूर्ण किरदार थे, लेकिन भारी सक्रियता के बाद अचानक कोरोना का में कोई सक्रिय भूमिका न मिलने से बीते एक पखवाड़े से वे अपने घर में नाती पोतों के साथ खेलते, गायों की सेवा करते और वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए अपने विधानसभा क्षेत्र दतिया के हालचाल जानते हुए न्यूज चैनलों पर दिखाए जा रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष और मंत्री रहे गोपाल भार्गव भी यदा कदा टीवी चैनलों पर दिखते हैं। दूसरी तरफ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष  विष्णुदत्त शर्मा अकेले ऐसे नेता हैँ जो शिवराज की ही तरह खबरों में दिख रहे हैँ। दूसरी तरफ एक महीने पहले तक बतौर मंत्री भारी सक्रिय रहे सिधिया समर्थक पूर्व मंत्री दल बदलकर विधायक भी नहीं रहे लेकिन अब वे भी सक्रियता से निष्क्रियता के इस दौर में परेशान हैं। यह बेचैनी यदा-कदा सोशल मीडिया या प्रादेशिक न्यूज चैनलों में उनकी सक्रियता में दिखती रहती है।

जमातियों की खोज खबर रखने में तंत्र फेल    
दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके से मरकज की जमात से लौटे लोगाें में मप्र आए जमातियों की तादाद तो बताई जाती रही लेकिन वे कहां-कहां गए, यह एक हफ्ते बाद भी पूरी तरह पता नहीं है। कई जमाती छोटे छोटे कस्बों जिनमें तहसील मुख्यालय शामिल हैँ, पहुंचे थे और वे वहां मस्जिदों और घरों में भी रुके बताए गए हैं।

विदिशा जिले के सिरोंज में एक कोरोना पॉजिटव पाए जाने के बाद अब अन्य कस्बों में भी जमातियों के आने, रुकने और चले जाने की खबरों से लोगों में दहशत है। यह दहशत अब गांवों तक पहुंच रही है। लेकिन सरकारी तंत्र का इंटेलीजेंस फेल रहा है।                         

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सीएम शिवराज सिंह चौहान हर चीज को स्वयं संभाल रहे हैं। - फोटो : ANI

विदेश यात्रा से लौटे लोगों की सूची होने के बाद भी ट्रैकिंग नहीं की 
करीब एक पखवाड़े पहले इसकी सूची जारी होने के बावजूद विदेश यात्रा की हिस्ट्री वाले परिवारों की जांच नहीं की गई। अकेले भोपाल शहर में ऐसे लोगों की सूची 71 पेज की थी। इनमें अब कोरोना पाजिटिव पाई गई स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिवल पल्लवी जैन गोविल का पुत्र तथा स्वास्थ्य विभाग की अपर संचलक वीणा सिन्हा का पुत्र भी शामिल था। यह अफसर न केवल मुख्यमंत्री के साथ बल्कि स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अफसराें, डाक्टरों तथा अन्य स्टाफ के संपर्क में सतत बने रहे।

अब यह आशंका गहरा रही है कि अकेेले स्वास्थ्य महकमे के एक दर्जन अफसर आदि कोरोना पॉजिटव पाए जाने के बाद उनके संपर्क में रह चुके कितने लोगों को यह वायरस संक्रमण सामने आ सकता है? चौंकाने वाली बात यह भी है कि स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव ने खुद को किसी अस्पताल में इलाज के लिए ले जाने से साफ इंकार किया और उन्होंने घर पर ही इलाज के इंतजाम कराए और इस दौरान वे घर से ही मुख्यमंत्री के साथ वीडियों कांफ्रेंसिंग से समीक्षा में शामिल हो रही हैं, इसके लिए उनके बंगले पर अधिकारी कर्मचारी भी जाते रहे। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने उनकी तारीफ भी की।                                               
खतरे की आशंका और लापरवाही जारी
अभी भी भोपाल के अलावा अन्य जिलों तक पहुंचे बीते तीन माह में अमेरिका, इटली, दुबई, ब्रिटेन आदि से यात्रा कर लौटे लोगों की न तो पहचान की कई है और न ही जांच, वह भी आधिकारिक सूची उपलब्ध होने के बावजूद। इनके संपर्क में रहे हजारों लोग अब खुद की सेहत को लेकर चिंतित हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

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