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कोरोना पर पश्चिम बंगाल में छिड़ी राजनीतिक जंग

Prabhakar Mani Tewari प्रभाकर मणि तिवारी
Updated Mon, 20 Apr 2020 12:54 PM IST
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corona virus in west bengal politics over covid-19 outbreak starts mamata banerjee bjp congress
कोरोना को लेकर टीएमसी भाजपा आमने-सामने हैं। - फोटो : Twitter

पश्चिम बंगाल में एक ओऱ जहां कोरोना से मुकाबले की लड़ाई चल रही है वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे पर राजभवन और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक जंग भी लगातार तेज हो रही है। भाजपा ने सरकार पर कोरोना के मामलों और मृतकों की तादाद छिपाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने भाजपा सांसद सुभाष सरकार के खिलाफ अफवाह फैलाने के आरोप में भारतीय दंड संहिता और आपदा प्रबंधन अधिनियम (डीएमए), 2005 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। 

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सुभाष सरकार पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दो शवों के दाह संस्कार को लेकर अफवाह फैलाने का आरोप है। वहीं, अलीपुरद्वार के पार्टी सांसद जॉन बारला ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि जिला प्रशासन ने उनको घर में ही नजरबंद कर दिया है। इसबीच, राज्यपाल जगदीप धनखड़ में शुक्रवार को आरोप लगाया कि राज्य सरकार भाजपा सांसदों के कामकाज में अड़चन डाल रही है। राज्यपाल का आरोप है कि राज्य प्रशासन पार्टी के सांसदों की गतिविधियों में रुकावट पैदा कर रहा है। 
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धनखड़ का कहना है कि पुलिस-प्रशासन के इस राजनीतिक झुकाव को स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोरोना जैसी आपदा के समय इन सांसदों को अपने क्षेत्र में खाना और राहत सामग्री नहीं बांटने दिया जा रहा है। ऐसा कोई भी दिन नहीं बीत रहा है जब राज्यपाल ने कोरोना के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में नहीं खडा किया हो।

धनखड़ ने अपने ताजा ट्वीट में बंगाल में लॉकडाउन के सरेआम उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दोषी अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाने और लॉकडाउन को सख्ती से लागू कराने के लिए राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती करने की बात कही है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राजभवन के साथ जारी लॉकडाउन को खत्म करना चाहिए। उनका कहना था कि सरकार राज्यपाल को कोरोना से निपटने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रही है। धनखड़ ने कहा कि राज्यपाल के साथ सरकार का लॉकडाउन असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। 
 

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भाजपा का आरोप है कि टीएमसी कोरोना के मामले छिपा रही है। - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी राज्यपाल का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधती रही हैं। राज्यपाल ने तो लॉकडाउन को लागू करने के लिए बंगाल में केंद्रीय बलों की तैनाती का सुझाव तक दे दिया है। लेकिन ममता का कहना है कि संकट के मौजूदा दौर में राजनीति से परहेज करना चाहिए।

राज्यपाल ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल सरकार पर आरोप लगाया कि वह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने और धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस व प्रशासन के जो अधिकारी प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए। राज्यपाल ने यह भी मांग की कि राज्य में लॉकडाउन लागू कराने के लिए केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों को तैनात करने की जरूरत पर विचार होना चाहिए। 

दूसरी ओर, पुलिस ने भाजपा सांसद सुभाष नस्कर के खिलाफ कोरोना से मरने वालो के अंतिम संस्कार के बारे में सोशल मीडिया पर अफवाह पैलाने के आरोप में एक मामला दर्ज किया है। भाजपा सांसद के खिलाफ पुलिस की यह कार्रवाई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की 15 अप्रैल की उस चेतावनी के बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोविड-19 को लेकर गलत सूचना फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कर्रवाई की जाएगी।

पार्टी के एक अन्य सांसद जॉन बारला ने अमित शाह को 15 अप्रैल को भेजे एक पत्र में आरोप लगाया है कि उनके घर के बाहर 40 पुलिसवाले तैनात हैं ताकि वह घर से बाहर नहीं निकल सकें। बारला का कहना है कि जिला प्रशासन तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं को तो राहत सामग्री बांटने में सुविधा प्रदान कर रहा है। लेकिन उनके बाहर निकलने पर राहत सामग्री जब्त कर ली गई और घऱ लौटा दिया गया।

भाजपा का प्रदेश नेतृत्व भी कई बार आरोप लगा चुका है कि कई इलाकों में लॉकडाउन का सरेआम उल्लंघन हो रहा है। पार्टी के एक प्रतिनिधमंडल ने बीते सप्ताह राज्भवन में राज्यपाल से मुलाकात कर उनको भी यह शिकायत की थी। पार्टी के नेताओं ने राज्य सरकार पर कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा चिपाने का भी आरोप लगाया है। 

प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने आरोप लगाया है कि सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस के नेता मनमाने तरीके से राहत सामग्री बांट रहे हैं। लेकिन भाजपा के सांसदों और नेताओं को सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर ऐसा करने से रोका जा रहा है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।


 

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