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एप्पल डेली अखबार का बंद होना: हांगकांग में विचार का सूरज अस्त हो गया

Fri, 25 Jun 2021 10:21 PM IST
Rajesh Badal राजेश बादल
Updated Fri, 25 Jun 2021 10:21 PM IST
सार

एप्पल डेली पर चीनी सत्ता ने राजद्रोह का आरोप लगाया था और दो दिन पहले ही उसके प्रधान संपादक रॉयन लॉ ,दो अन्य संपादक तथा तथा दो अन्य आला अफसरों को गिरफ़्तार कर जेल में डाल दिया गया था।

अख़बार की 17 करोड़ की संपत्ति भी ज़ब्त कर ली गई थी। पिछले दो साल में हांगकांग में लोकतंत्र के समर्थन में जो आंदोलन हुए,उसके बाद से यह पहली बड़ी कार्रवाई है।

इन आन्दोलनों की ख़बरें इस अख़बार में लगातार प्रकाशित होती रही है।

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closure of Hong Kong pro-democracy newspaper Apple Daily and china government
एप्पल डेली पर चीनी सत्ता ने राजद्रोह का आरोप लगाया था! - फोटो : social media

विस्तार

तो वही हुआ ,जिसका डर था। हांगकांग के लोग जब सुबह जागे ,तो पता चला कि उनके दरवाज़े सूर्यास्त की आख़िरी किरण खड़ी है। वहां का इकलौता लोकतंत्र समर्थक अखबार एप्पल डेली दम तोड़ गया था। वहां के लोग उसे अपने प्राणों से भी ज़्यादा प्यार करते थे। भारी और बोझिल मन से अख़बार के प्रबंधन और संपादकों ने यह फैसला लिया।

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आख़िरी सुबह उन्होंने घर घर अख़बार भेजने के अलावा दस लाख प्रतियां अतिरिक्त प्रकाशित कीं। सारे दिन इनको पढ़ने वाले कतारों में लगकर प्रतियां खरीदते रहे। समाचार-पत्र का सन्देश यह था कि आज हमारा अंतिम दिन है। हांगकांग से प्रेस की स्वतंत्रता समाप्त हो गई है।
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एप्पल डेली के बंद होने के पीछे चीनी सत्ता 
एप्पल डेली पर चीनी सत्ता ने राजद्रोह का आरोप लगाया था और दो दिन पहले ही उसके प्रधान संपादक रॉयन लॉ ,दो अन्य संपादक तथा तथा दो अन्य आला अफसरों को गिरफ़्तार कर जेल में डाल दिया गया था।

अख़बार की 17 करोड़ की संपत्ति भी ज़ब्त कर ली गई थी। पिछले दो साल में हांगकांग में लोकतंत्र के समर्थन में जो आंदोलन हुए,उसके बाद से यह पहली बड़ी कार्रवाई है। इन आन्दोलनों की ख़बरें इस अख़बार में लगातार प्रकाशित होती रही है।

सरकारी चेतावनी है कि जो पत्रकार लोकतंत्र के समर्थन में लिखेगा,उसे राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून का उल्लंघन माना जाएगा। लेकिन एप्पल डेली इसके आगे झुका नहीं। उसने विरोध में अगले दिन 5 लाख प्रतियां छापीं। उस दिन भी दिन भर लोग कतार में लगकर इस अंक को ख़रीदते रहे। आमतौर पर यह समाचार पत्र 80 हज़ार प्रतियां प्रकाशित करता है। 

closure of Hong Kong pro-democracy newspaper Apple Daily and china government
विरोधी मानते हैं कि इस क़ानून का इस्तेमाल शहर हांगकांग में विरोध को दबाने के लिए किया जाएगा। - फोटो : PTI

सरकारी बयान कहता है कि पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के उल्लंघन के संदेह पर एक कंपनी के पांच निदेशकों को गिरफ्तार किया। बयान के मुताबिक 47 से 63 साल की उम्र के बीच के चार पुरुषों और एक महिला को विदेश या राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाले बाहरी तत्वों के साथ मिलीभगत के संदेह में गिरफ्तार किया गया। एप्पल डेली के कार्यालयों में पुलिस अधिकारियों ने तलाशी ली।

सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के उल्लंघन के सबूत की तलाश में वॉरंट लिया गया था। यह दूसरी बार है जब पुलिस ने एप्पल डेली पर कार्रवाई की है। पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के उल्लंघन और धोखाधड़ी के संदेह में पिछले साल संस्थापक जिम्मी लई और अन्य पेशेवरों को गिरफ्तार किया था। आपको याद होगा कि हांगकांग में लोकतंत्र की बहाली के लिए दो साल पहले 12 जून को व्यापक आंदोलन शुरू हुआ था।

अखबार के बंद होने का कोई विरोध नहीं 
इस आंदोलन को दुनिया भर से भरपूर समर्थन मिल रहा है। आठ दिन पहले दो साल जब पूरे हुए तो एक बार फिर वहां आंदोलन तेज़ हो गया। क़रीब बीस देशों के पचास शहरों में भी हांगकांग की अवाम के हक़ में प्रदर्शन हुए थे। ब्रिटेन,ऑस्ट्रेलिया,अमेरिका,कनाडा, स्वीडन तथा अनेक देशों ने चीन के इस दमनपूर्ण रवैए की निंदा की है। 

हांगकांग 1997 तक ब्रिटेन के अधीन था, लेकिन 23 साल पहले ब्रिटेन ने उसे चीन को सौंप दिया था। उसके बाद से ही चीन वहां उदारवादी बयार के विरोध में है। चीन चाहता है कि कम्युनिस्ट पार्टी की शासन प्रणाली वहां भी लागू हो जाए। अवाम इसके ख़िलाफ़ है। चीनी पुलिस ने लोकतंत्र समर्थक आंदोलन चला रहे कार्यकर्ताओं को जेल में डाल रखा है।

हाल ही में चीन ने वहां नया सुरक्षा कानून लागू कर दिया था। इसमें तोड़फोड़, अलगाववादी गतिविधियों, आतंकवाद और विदेशी सहायता पर रोक लगाई गई है। विरोधी मानते हैं कि इस क़ानून का इस्तेमाल शहर हांगकांग में विरोध को दबाने के लिए किया जाएगा। अफ़सोसनाक है कि चीनी कार्रवाई के विरोध में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारों की जमात का कोई अधिक समर्थन नहीं मिला है। यक़ीनन यह आने वाले दिनों में चीन को और क्रूर बनाएगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।


 

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