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चीन के राष्ट्रपति की भारत यात्रा: जिनपिंग कुछ देंगे या सिर्फ कुछ हासिल करने की चाहत में आ रहे हैं

Sanjiv Pandeyसंजीव पांडेय Updated Fri, 11 Oct 2019 10:02 AM IST
तामिलनाडु के महाबलिपुरम में जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनौपचारिक बैठक होगी।
तामिलनाडु के महाबलिपुरम में जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनौपचारिक बैठक होगी। - फोटो : ANI
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आखिरकार जिस दौरे पर असमंजस की स्थिति थी वो खत्म हो गई। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ रहे हैं। तामिलनाडु के महाबलिपुरम में जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनौपचारिक बैठक होगी। समुद्री के किनारे बसे इस शहर में जिनपिंग और मोदी के बीच होने वाली वार्ता का महत्व इसलिए है कि समुद्रतटीय महाबलिपुरम का महत्व पल्लव और चोलों के काल में काफी बढ़ा।
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यह शहर चीन और दक्षिण एशिया से व्यापार के लिए बड़ा केंद्र बना। यह शहर समुद्र के रास्ते चीन से जुड़ा था। महाबलिपुरम के बंदरगाह से चीनी बंदरगाहों के लिए सामान जाता था। दक्षिण भारतीय समुद्रतटीय शहर में बैठक का मुख्य उद्देश्य दक्षिण पूर्व एशिया और चीन से भारत के व्यापार संबंधों को और मजबूत करना है। हालांकि बैठक से पहले कश्मीर को लेकर तनाव की स्थिति है।

कश्मीर राज्य को धारा 370 के तहत मिले विशेष अधिकार को खत्म किए जाने के बाद पाकिस्तान के साथ चीन अंतराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ मोर्चा खोल बैठा है। वहीं, भारत और चीन के बीच व्यापार संतुलन को लेकर लगातार तनाव है। इस बीच भारत के अरुणाचल प्रदेश में सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। सैन्य अभ्यास हिमविजय शुरू हो चुका है, इस कारण चीन खासा नाराज है।

हालांकि तमाम तनावों के बीच मंदी के संकट में आने की संभावना के डर से चीन भारतीय बाजार को खोना नहीं चाहता है। महाबलिपुरम में दोनों नेताओं के बीच व्यापार असंतुलन और सीमा विवाद पर बातचीत होने की संभावना है। लेकिन जिनपिंग का भारत आने का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीए मुक्त व्यापार समझौता है, जिसे जल्द से जल्द चीन लागू करवाना चाह रहा है। इसमें भारत की सहमति होगी तो मंदी के मार झेल रहे चीनी उत्पाद भारतीय बाजार में डंप हो जाएंगे।

कश्मीर को लेकर अंतराष्ट्रीय मंचों पर भारत विरोधी बयान
कश्मीर से धारा 370 के तहत मिलने वाले विशेष अधिकार को हटाए जाने के बाद अंतराष्ट्रीय मंचों पर चीन पाकिस्तान के साथ खड़ा है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मसला उठाया। चीनी अखबाल लगातार कश्मीर को लेकर भारत विरोधी लेख लिख रहे हैं।

लेखों में कहा जा रहा है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मसला नहीं है। कश्मीर में चीन के आर्थिक हित हैं। भारत के किसी भी कार्रवाई से चीनी हित प्रभावित हो रहे हैं। लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश घोषित किए जाने से भी चीन नाराज है। दिलचस्प बात है कि मोदी और जिनपिंग के बीच होने वाली दूसरी अनौपचारिक बैठक से पहले चीन ने एक सस्पेंश रखा। ये सस्पेंश जानबूझकर चीनी लीडरशीप ने रखा था। चीन पिछले सत्तर साल से भारत के साथ लगभग इसी तरह का व्यवहार करता रहा है।

यही नहीं, जिनपिंग के भारत दौरे से पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा चीन पहुंचे। खबर ये है कि जिनपिंग मामललपुरम की बैठक के बाद नेपाल जाएंगे। भारत आने से पहले और भारत से जाते हुए पाकिस्तान और नेपाल के नेताओं से जिनपिंग की बैठक साफ संकेत देते है कि भारत से आर्थिक हितो को साधने के लिए चीन सिर्फ बैठक कर रहा है। चीन अपने आर्थिक हितों को साधते हुए भारत विरोधी मोर्चा पूरे इलाके में बना रहा है। क्योंकि इमरान खान के पाकिस्तान दौरे से ठीक पहले इस्लमाबाद में तैनात चीनी राजदूत ने कश्मीर मसले पर भारत के खिलाफ जोरदार बयान दिया।
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