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Chandrayaan 3: चांद के पार चलो

दयाशंकर शुक्ल सागर दयाशंकर शुक्ल सागर
Updated Wed, 23 Aug 2023 10:50 AM IST
सार

 इसरो ने चंद्रयान-3 बनाने में अब तक की सबसे महंगी फिल्म ‘अवतार’के बजट से भी आधा पैसा खर्च किया है। वैसे भी वैज्ञानिक खोजों पर पैसा खर्च करना किसी महापुरुष की भव्य प्रतिमा लगाने पर किए जाने वाले खर्च से बेहतर है।

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Chaand ke paar chalo by Dayashankar Shukla Sagar on India Moon Mission Chandrayaan 3 news and updates
Chandrayaan 3 - फोटो : Social Media

विस्तार

सबकुछ ठीक रहा तो चन्द्रयान 3 का व्रिकम लैंडर जल्द चांद की सतह को छू लेगा। ये बेशक बेहद रोमांचक लम्हें होंगे। लेकिन सदियों से चांद को लेकर तमाम तरह के जो मिथ थे वो सारे टूट चुके हैं। अब हमें पता चल चुका है कि चांद पर सफेद बालों वाली कोई बुढ़िया वहां चरखा नहीं कात रही है। वहां पूर्णिमा की रात कोई खरगोश नहीं आता। चांद एक छोटा सा प्राकृतिक उपग्रह है जिसकी अपनी कोई रोशनी नहीं है। सूर्य की किरणें उसमें चमक पैदा करती हैं। ऐसे कोई पचास चांद हमारी पृथ्वी पर समा सकते हैं। वह उजाड़-विरान-सी जगह है। वहां न हवा है न पानी है। न पेड़ हैं न पौधे और न कोई हरियाली न जीव जन्तु। बस काली धूसर चट्टानें हैं और गहरी अंधेरी खाइयां हैं। 
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अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने भी अब चांद पर जाना छोड़ दिया। अपोलो मिशन बंद करने के बाद पिछले पचास साल से चांद पर किसी मनुष्य ने कदम नहीं रखा। अब ये काम रोवर्स करते हैं। ये रोवर्स चलने फिरने वाले छोटे रोबोट हैं, जिसे वैज्ञानिक चंद्रमा और ग्रहों पर उनकी सतहों पर उतरने और अन्वेषण करने के लिए भेजते हैं। रोवर्स इंसानों की तरह तस्वीरें ले सकते हैं और उस ग्रह उपग्रह के तापमान रीडिंग कर सकते हैं, चट्टान और मिट्टी के नमूने लेकर ग्रह के बारे में जानकारी जुटा सकते हैं बस। वैसे अब तक चांद पर गए अंतरिक्ष यात्रियों का अनुभव भी रोबोट जैसा ही रहा है।
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मुझे याद आता है कि 1969 में जब नील आर्मस्ट्रांग की टीम चांद को छूकर वापस आई थी। उनकी इस साहसिक चन्द्रयात्रा से ब्रिटेन की रानी ऐलिजाबेथ-2 के शौहर फिलिप बहुत उत्साहित और रोमांचित थे। नील आर्मस्ट्रांग अपने दो साथियों के साथ बर्निघम पैलस के मेहमान थे। कौतुहल से भरे फिलिप ने उन अंतरिक्ष यात्रियों से पूछने के लिए सवालों की बाकायदा एक लिस्ट बनाई थी । लेकिन उन अंतरिक्ष यात्रियों को देखकर उन्हें लगा कि इन सवालों के जवाब देने के लिए वे अभी बहुत छोटे हैं। फिर भी उन्होंने एक बेसिक सवाल पूछा-" आप क्या सोच रहे थे जब आप चांद पर थे?" तीनों अंतरिक्ष यात्री सोच में पड़ गए। नील बोले- " हमारी सांस में सांस आई और सोचा कि मिशन पूरा हुआ। और हमें क्या नजारे देखने मिले जब हम वहां थे।" फिलिप ने कहा- बेशक वे नजारे अद्भुत होंगे लेकिन मैं उन नजारों के अलावा उन विचारों के बारे में जानना चाहता हूं जो उस वक्त आपके जेहन में आ रहे थे। नील ने कहा- "सच पूछिए तो इन सब का वक्त हमारे पास नहीं था। हम बस प्रोटोकॉल फालो कर रहे थे। हमने अपना सारा वक्त हाथ में लिस्ट लिए हुए गुजारा जिस पर हम टिक लगाते जा रहे थे। हमारी आंखें मशीन प्रोटोकॉल को लेकर इतनी चौकन्नी रहती थी कि हम और कुछ देख ही नहीं पाते थे।" उन अंतरिक्ष यात्रियों के लिए चांद से ज्यादा कौतुहल वाली जगह ब्रिटेन की रानी का ऐशवर्य से भरपूर भव्य महल था जिसमें वे घूमना चाहते थे। फिलिप ने अपनी किताब में लिखा- "उनमें न कोई जूनून था न कोई नयापन और न कोई सहजता न कोई कल्पनाशीलता। वे फीके चेहरे वाले आम इंसान थे जिनकी नाक लंदन की सर्दी से बह रही थी। बतौर एस्ट्रोनॉट उन्होंने जो भी किया लेकिन बतौर इंसान उन्होंने निराश ही किया।"   
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लेकिन मुझे यकीन है हमारे देश के वैज्ञानिक हमें निराश नहीं करेंगे। बताया जा रहा है कि इसरो ने चंद्रयान-3 बनाने में अब तक की सबसे महंगी फिल्म ‘अवतार’के बजट से भी आधा पैसा खर्च किया है। वैसे भी वैज्ञानिक खोजों पर पैसा खर्च करना किसी महापुरुष की भव्य प्रतिमा लगाने पर किए जाने वाले खर्च से बेहतर है। शार्टकट रूट के चक्कर में रूस का चन्द्रयान लूना-25 पिछले दिनों ठीक चंद्रमा की सतह पर क्रैश हो गया। रूस चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग का सपना 47 साल से देख रहा था। चार साल पहले हमारा चन्द्रयान-2 भी ऐसे ही क्रैश हुआ था। लैंडिंग से पहले ही उसका इसरो से सम्पर्क टूट गया था। लेकिन इसरो के वैज्ञानिकों ने हिम्मत नहीं छोड़ी। ये महान राजनीतिक इच्छाशक्ति भी है कि चार साल के अंदर अब इसरो चंद्रयान-3 को लेकर चांद की सतह पर चक्कर लगा रहा है। 23 अगस्त 2023 की शाम 6.4 बजे चांद की सतह सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। ये बेहद तनाव भरे क्षण होंगे। आशा-निराशा के बीच के रोमांचक पल। पुरानी भूलों और नकामियों से सीख लेकर आगे बढ़ना। यही तो जीवन है।
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