क्या वाकई विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत की झोली में आएंगे मेडल?
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सकारात्मक खेल प्रेमियों के लिए इस सवाल का जवाब बड़ा सीधा है- उम्मीद पर दुनिया कायम है, लेकिन यहां सवाल सिर्फ सकारात्मकता का नहीं बल्कि व्यवहारिकता का भी है। अभी जुलाई के ही महीने की बात है। भारतीय एथलीट हिमा दास एक के बाद एक गोल्ड मेडल पर कब्जा कर रही थीं। देश के बड़े बड़े सितारों ने उन्हें सोशल मीडिया में बधाई दी। वो होर्डिंग्स में नजर आने लगीं। उनकी उपलब्धियां इन बातों को ‘डिजर्व’ भी करती थीं, लेकिन उनकी कामयाबी की चर्चा में असली सवाल दब कर रह गए।
बहुत कम ही लोगों ने इस बात का आकलन किया कि क्या वाकई विश्व स्तर पर वो बड़ी उपलब्धियां हासिल करने की रेस में हैं। इस बात के आंकलन में खतरा ये भी था कि कहीं लोग ये ना कहें कि एथलीटों की हौसलाअफजाई की बजाए उनकी कमियां निकाली। सच्चाई ये थी कि हिमा दास की उपलव्धियां सर माथे पर हैं लेकिन वो फिलहाल अभी बड़े स्तर पर किसी करिश्मे से दूर हैं।
इस बात का एक सबूत ये भी है कि विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्हें सिर्फ रिले रेस में जगह मिल पाई है। हालांकि इसकी वजह उनकी चोट भी है, लेकिन अगर चोट अहम वजह है, तो इसके साथ ही उन्हें लगातार ऐसी प्रतियोगिताओं में क्यों उतारा जा रहा था, जिन्हें स्तरहीन कहना गलत नहीं होगा। खैर, चलिए हिमा दास के बहाने विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप की और बात कर लेते हैं।
एथलेटिक्स में विश्व मेडल अभी दूर की बात
विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अभी करीब दो हफ्ते का वक्त बाकी है। चैंपियनशिप कतर के दोहा में 27 सितम्बर से 6 अक्टूबर तक होगी। चैंपियनशिप में भाग लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों के नामों का एलान किया जा चुका है। विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत के कुल 25 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।
हाल के दिनों में देश के दो स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा और दुती चंद का नाम भारतीय खेमे में शामिल नहीं है। इसके पीछे इनका हालिया प्रदर्शन और फिटनेस है। नीरज चोपड़ा अनफिट हैं। बड़ा सवाल ये है कि अगले साल होने वाले ओलंपिक से पहले विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के भारत के लिए क्या मायने है?
खास तौर पर इसलिए क्योंकि शूटिंग, बॉक्सिंग, बैडमिंटन जैसे खेलों के मुकाबले एथलेटिक्स में अभी भारत ओलंपिक स्तर तक पहुंचा नहीं है। ये बात कड़वी जरूर लगती है लेकिन सच यही है कि हाल के दिनों में हिमा दास समेत भारतीय एथलीटों को जो कामयाबियां मिली हैं वो विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप या ओलंपिक के मुकाबलों के लिए प्रतिस्पर्धा की कसौटी पर मायने तक नहीं रखतीं।
आपको बता दें कि दुती चंद विश्व चैम्पियनशिप के लिए क्वालीफाई तक नहीं कर पाई थी। भारतीय एथलेटिक्स फेडरेशन ने तीन घंटे की माथापच्ची के बाद दुती चंद, तेजस्विन शंकर और अर्चना सुसीनत्रन को इस आधार पर शामिल किया है कि इन्हें इनकी वर्ल्ड रैंकिंग के आधार पर इंटरनेशलन फेडरेशन बुलावा दे सकती है। हालांकि बाद में हाई जंपर तेजस्विन शंकर ने चैंपियनशिप में हिस्सा लेने से ये कहकर इनकार कर दिया कि वो फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं है। हाल के दिनों में एक के बाद एक कई गोल्ड मेडल जीतने वाली हिमा दास को भी सिर्फ रिले रेस की टोली में जगह मिली है।
कौन से एथलीट कर सकते हैं करिश्मा
अब बात सकारात्मक पक्ष की। भारतीय खेमे में कुछ नाम ऐसे हैं जो करिश्मा कर सकते हैं। इनमें दम-खम है। बशर्ते विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दबाव से ‘फ्री’ होकर ये ट्रैक पर उतरे। ताजा परिस्थितियों में भारतीय खेले को काफी उम्मीदें जिंसन जॉनसन से हैं।
1500 मीटर के धावक जॉनसन ने हाल ही में एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया था। अभी कुछ महीनों पहले ही उन्होंने एक और बार राष्ट्रीय कीर्तिमान बनाया था। इसके अलावा 19 साल के लॉंग जंपर मुरली श्रीशंकर भी अच्छे दावेदार हैं। उन्होंने इस चैंपियनशिप के लिए सितंबर में ही क्वलीफाई कर लिया था। हालांकि बीच में उन्हें एड़ी में चोट लग गई थी। जिसकी वजह से वो एशियन चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं ले पाए थे।
एएफआई को चार गुणा 400 मीटर रिले टीम से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। पुरूष और महिला दोनों टीमें मेडल के लिए मजबूत दावा पेश करेंगी। एथलेटिक्स फेडरेशन की उम्मीद है कि चार गुणा 400 मीटर रिले रेस में टीम का प्रदर्शन इस स्तर का होगा कि उसे 2020 ओलंपिक्स के लिए टीम में जगह मिल जाएगी।