बजट 2024-25: दूसरे कार्यकाल के आखिरी अंतरिम बजट में चुनावों से डरे नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
पिछले कुछ वर्षों में कुछ राज्यों और पिछली केंद्र सरकारों के बजट लोकलुभावन वादों से भरे होते थे, लेकिन केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने पहले बजट से लेकर और अपने इस बजट तक मोदी सरकार के विजन को कायम रखा है।
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जैसा कि सोचा जा रहा था कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नरेंद्र मोदी सरकार का अंतिम अंतरिम बजट लोकलुभावन होगा, वैसा कुछ नहीं हुआ। न किसानों की सम्मान निधि बढ़ाई गई, न ही मध्यम वर्ग को खुश करने के लिए इनकम टैक्स सिलेब में कोई बदलाव हुआ। पेट्रोल-डीजल को गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के दायरे में लाकर कीमतें कम करने की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने इस पर एक शब्द नहीं कहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया कि वो चुनावों से घबरा नहीं रहे हैं और अपने विकास के विजन को कहीं से भी छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। उनकी सरकार की मंशा है कि देश में विकास की गति रुकनी नहीं चाहिए। यह डेवलपमेंट का बजट है।
सरल भाषा में बजट का मतलब होता है कि हमारे पास जो पैसा आ रहा है, उसको हम कैसे और किस दिशा में खर्च करेंगे? यही असली बजट होता है और यही होना चाहिए। पिछले कुछ सालों में कुछ राज्यों और पिछली केंद्र सरकारों के बजट लोकलुभावन वादों से भरे होते थे, लेकिन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने पहले बजट से लेकर और अपने इस बजट तक मोदी सरकार के विजन को कायम रखा है।
बजट से स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस दिशा में देश को ले जाना चाहते हैं, जिस दिशा में देश को आगे बढ़ाना चाहते हैं, चाहे कुछ भी हो जाए, चाहे कैसी भी परिस्थितियों का सामना करना पड़े, वो डिगेंगे नहीं।
निःशुल्क बिजली प्राप्त करने की योजना
अंतरिम बजट में वित्तमंत्री ने कुछ विपक्षी सरकारों की मुफ्त बिजली देने की योजनाओं को भी पंक्चर करने की कोशिश। छत पर सोलर पैनल लगाने से एक करोड़ परिवार प्रति माह 300 यूनिट तक निःशुल्क बिजली प्राप्त कर सकेंगे। यह योजना अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के दिन 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू की थी। इससे हर वर्ष एक परिवार के 15-18 हजार रुपए बचेंगे। सरकार ने बजट में रिन्यूएबल एनर्जी पर भी खूब जोर दिया है।
वर्ष 2014 के बाद सरकार का टैक्स रेवेन्यू तीन गुना तक बढ़ गया है, लेकिन सरकार बढ़ी धनराशि को मुफ्त योजनाओं में लगाने के बजाय देश के विकास में खर्च करने की मंशा रखती है। यह देश के लिए अच्छी बात है। वित्तमंत्री ने स्पष्ट किया कि वो वित्त वर्ष 2025-26 तक राजकोषीय घाटे को 4.5 प्रतिशत से नीचे लाना लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसी के चलते वित्त वर्ष 2024-25 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। सरकार का यह कदम देश हित में है, लेकिन इसके लिए सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे।
एक अच्छी बात यह भी है कि स्वदेशी कंपनियां के कॉरपोरेट टैक्स को कम किया गया है। अब उन्हें 30 प्रतिशत के बजाय 22 प्रतिशत का टैक्स देना पड़ेगा। कुछ नई विनिर्माण कंपनियों के लिए यह 15 प्रतिशत ही होगा। इससे विकास को गति मिलेगी।
अंतरिम बजट में एक अच्छी बात यह है कि सरकार ने वित्त वर्ष 2009-10 से पहले लंबित टैक्स मामले और डिमांड वापस लेने का निर्णय लिया है। करीब 25,000 करोड़ रुपए की राशि फंसी है। वित्त मंत्री ने कहा भी कि इससे एक करोड़ ईमानदार टैक्सपेयर्स को कानूनी झंझटों से निजात मिलेगी।
अमृत काल के बाद अब कर्तव्य काल की बात मोदी सरकार ने की है, यानी सरकार का साफ मत है कि सभी भारतीयों को मिलकर वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाना है। सबको अपना-अपना कर्तव्य निभाना है। अंतरिम बजट में विकास की एक दिशा दिखाई देती है। विकास की गारंटी की बात जो प्रधानमंत्री कह रहे हैं, वो झलकती है।
मोदी सरकार ने विकास का एक रोडमैप पिछले कुछ सालों में बनाया है, वो उसी पर चलते जा रहे हैं। अपने बजट भाषण में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा भी, जुलाई में आकर पूर्ण बजट पेश करेंगे, इससे सरकार का आत्मविश्वास झलकता है।
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