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ब्रिटेन में सियासी अस्थिरता के मायने और दुनिया

Fri, 21 Oct 2022 02:52 PM IST
Rajesh Badal राजेश बादल
Updated Fri, 21 Oct 2022 02:52 PM IST
सार

जब भारत समेत सारा विश्व समझ रहा था कि नए प्रधानमंत्री के रूप में ऋषि सुनक का कोई विकल्प नहीं है,तो भी गोरे मतदाताओं के मन में उन्हें अवसर देने की बात नही आई । लिज़ की कार्यशैली और नीतियों के बारे में ऋषि सुनक लगातार आगाह कर रहे थे कि वे ब्रिटेन के हित में नहीं हैं और इसका नुकसान देश को उठाना पड़ेगा ।

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britain prime minister liz truss resigned and political crisis
दो महीने के भीतर ही ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री खोजने की नौबत आ गई। - फोटो : instagram/elizabeth.truss.mp

विस्तार

दो महीने के भीतर ही ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री खोजने की नौबत आ गई। कंजरवेटिव पार्टी भले ही अभी चुनाव नहीं कराए,लेकिन उसके लिए साफ संदेश है कि पार्टी के भीतर राष्ट्रीय सुधारों पर गंभीर बहस हो । कार्य वाहक प्रधानमंत्री लिज़ ट्रस ने मान लिया कि मुल्क की आर्थिक चुनौतियों से निपटने में वे नाकाम रही हैं और अपनी पार्टी की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पाई हैं।उनकी स्वीकारोक्ति के बाद अनेक सवाल अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक बिरादरी के दिमागों को मथने लगे हैं।

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एक तो यह कि क्या अब पार्टी के भीतर इतने विद्वान और योग्य राजनेताओं का अकाल है? यदि अंतिम चरण में चयन कर्ताओं ने ऋषि सुनक के मुकाबले लिज़ ट्रस को प्राथमिकता दी तो इसका मतलब साफ है कि शिखर स्तर पर जानकार और अनुभवी लोगों को लाने में अभी भी पक्षपात और अन्याय होता है ।मेरा इशारा ऋषि सुनक के साथ हुए व्यवहार से है।
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मतदाताओं के दिल के किसी कौने में रंगभेद अभी तक ज़िंदा  है और भारतीयों को वे हेय समझते हैं। उनकी मानसिकता में हिंदुस्तान पर सदियों तक हुकूमत करने और उनको गुलाम बनाकर रखने का सामंती भाव अभी बरक़रार है । हमने देखा कि ऋषि अपनी काबिलियत के दम पर प्रधानमंत्री पद की दौड़ में पहुंचे, लेकिन कट्टरपंथी मतदाताओं ने ऐन वक्त पर उनके पैरों के नीचे से जाजम खींच दी।
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जब भारत समेत सारा विश्व समझ रहा था कि नए प्रधानमंत्री के रूप में ऋषि सुनक का कोई विकल्प नहीं है,तो भी गोरे मतदाताओं के मन में उन्हें अवसर देने की बात नही आई। लिज़ की कार्यशैली और नीतियों के बारे में ऋषि सुनक लगातार आगाह कर रहे थे कि वे ब्रिटेन के हित में नहीं हैं और इसका नुकसान देश को उठाना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि लिज़ प्रधानमंत्री बनने के लिए जो नीतियां चुन रही हैं , वे ब्रिटेन को बरबाद कर देंगी। वही हुआ । 

सवाल यह है कि वे समझदार वोटर अब क्या करेंगे? यदि उन्होंने अभी भी ऐसा कोई मुखिया चुना , जो उनकी मानसिकता के मुताबिक़ हो तो ब्रिटेन के लिए आने वाले दिन एक अंधी सुरंग में समाने जैसे हैं। आज गोरे अंग्रेज़ों के सामने ऋषि सुनक को गद्दी पर बिठाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। जिन भारतीयों को उन्होंने लंबे समय तक कुचला और उनके अधिकारों की हत्या की, अब उन्हीं में से एक भारतीय उनका संकटमोचक बन सकता है। लेकिन पहले उन्हें अपने पुरातनपंथी सोच से मुक्ति पानी होगी ।

यदि ऐसा हुआ तो ऋषि सुनक ब्रिटेन को सारी मौजूदा चुनौतियों से बाहर निकाल सकते हैं। यह क्षमता उनमें है। अगर गोरी चमड़ी पर ही एक बार फिर भरोसा किया गया तो पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ही अकेला चेहरा बचता है। शायद उनके झोले से कोई अलादीन का चिराग निकल आए।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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