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पेले: फुटबॉल का एक अद्वितीय और मौलिक छंद

Sat, 31 Dec 2022 02:07 PM IST
Ravindra Vyas रवींद्र व्यास
Updated Sat, 31 Dec 2022 02:07 PM IST
सार

सत्रह साल की उम्र में पेले वर्ल्ड कप जीतते हैं और इसके बावजूद उनमें जो विनम्रता और शर्मीलापन है, वह इसके पहले शायद कभी नहीं देखा गया। उन्होंने शानदार गोल किए और गोल करने के बाद उनकी मुद्राएं देखिए, उनका अंदाज देखिए। वह सब इस खेल की तरह सुंदर है, गरिमामय है, किसी बैले नृत्य की तरह।

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Brazil World Cup winner and football legend, Pele passes away
ब्राजील के पूर्व फुटबॉलर पेले - फोटो : Twitter

विस्तार

यह एक ऐतिहासिक तारीख है, वह तारीख जब दुनिया के सुंदरतम खेल का एक नया और चमकदार इतिहास लिखा जाना है। इसमें फुटबॉल को वह बहुत सुंदर ढंग से खेलने वाला है, जैसे कोई नर्तकी बैले डांस करती है। इस खेल में उसकी अपनी लय है, अपना छंद है। अपनी गति है, अपनी मुद्रा। उसकी संतुलित हस्त मुद्रा और उसका अपना मौलिक पद संचालन है। इसमें अद्भुत गरिमा और भव्यता है।

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यह खेल का अद्वितीय वैभव है। इसके पहले इतनी छोटी उम्र में कोई इतना सुंदर खेल नहीं दिखा सका था। इसलिए इस तारीख को याद रखना जरूरी है। 

तारीख है 29 जून सन् 1958, देश है स्वीडन। इसका एक शहर सोलना, स्टॉकहोम के पास जहां एक स्टेडियम है रासुंदा। इसमें 49 हज़ार 737 दर्शक फाइनल देखने के लिए दम साधे बैठे थे। फाइनल मेजबान स्वीडन खेल रहा था, सामने ब्राज़ील की टीम थी। और ब्राज़ील की तरफ से एक नया लड़का मैदान में है। अभी उसकी उम्र सत्रह साल 249 दिन है।
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यह एक अश्वेत गठीला लड़का है, जिसके फौजियों जैसे छोटे बाल हैं और यह उसका पहला वर्ल्ड कप फाइनल है। इस वर्ल्ड कप में वह अपने सुंदर खेल से दुनिया को पहले ही चमत्कृत कर चुका है। वह इस वर्ल्ड कप का सबसे युवा खिलाड़ी है- नाम है पेले। वह फाइनल में दो गोल कर चुका है। एक राइट फुट से और दूसरा लेफ्ट विंग से आए बेहतरीन क्रॉस पर हैडर से। इस वर्ल्ड कप को ब्राज़ील 5-2 से जीत लेता है। यह ब्राज़ील का पहला वर्ल्ड कप खिताब है। लेकिन रुकिए, मैं कहानी कुछ और बताना चाहता हूं। यह कहानी पेले से ही जुड़ी है, पेले यानी एडसन आरांतेज दो नैसिमेंतो

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पेले में नजर आती थी विनम्रता की मूर्ति

वर्ल्ड कप जीतने के बाद के उस दृश्य को आप यूट्यूब पर बार-बार देख सकते हैं। पेले को कांधे पर उठाया जा रहा है और वे बार-बार एक मार्मिक विनम्रता में अपना सिर झुका रहे हैं, जैसे छिपने की जगह ढूंढ रहे हैं, वे अपनी दोनों हथेलियों में मुंह छिपाने की असफल कोशिशें कर रहे हैं। जैसे एक नर्तक सुंदर, भव्य और गरिमामय बैले करने के बाद पसीने में तर अपनी ही सराहना से बचने के लिए अपने में ही छिपने की कोशिश कर रहा हो।


और अंतत: पेले छिपने की जगह ढूंढ कर सीनियर खिलाड़ी ज्यूमार दू सेंतेस नेविस के सीने में छिप जाते है, उनकी आंखों में आंसू हैं…

इसके बाद का इतिहास यह है कि ब्राज़ील 1962 और फिर 1970 का वर्ल्ड कप जीतता है और इसमें पेले अपना वही सुंदर खेल दिखाते हैं जो फुटबॉल के इतिहास का सबसे चमकदार और दुर्लभ ताम्रपत्र है। आपको गूगल पर वह सब मिल जाएगा कि पेले ने अपने कितने मैच खेले, कितने गोल मारे और उनका एक हज़ारवां गोल कौन सा है, आदि।

लेकिन यह तय है कि साओ पाउलो की गलियों में बचपन से फुटबॉल खेलने वाले इस लड़के के खेलने से जो धूल उड़ी है, वह आज दुनिया के भाल पर किसी तिलक की तरह शोभायमान है। फुटबॉल का भाल इसी धूल के तिलक से अपूर्व ढंग से तेजस्वी है।

Brazil World Cup winner and football legend, Pele passes away
पेले - फोटो : Twitter

पेले की मुद्राएं और अंदाज लाजवाब

सत्रह साल की उम्र में पेले वर्ल्ड कप जीतते हैं और इसके बावजूद उनमें जो विनम्रता और शर्मीलापन है, वह इसके पहले शायद कभी नहीं देखा गया। उन्होंने शानदार गोल किए और गोल करने के बाद उनकी मुद्राएं देखिए, उनका अंदाज देखिए। वह सब इस खेल की तरह सुंदर है, गरिमामय है, किसी बैले नृत्य की तरह।

आज देखिए। कई खिलाड़ी यह जताते हुए खेलते हैं कि वे कितना बेहतरीन खेलते हैं। कई खिलाड़ी इसलिए खेलते हैं कि विरोधी टीम को ध्वस्त करना है। कई खिलाड़ी अहंकार और कुछ खिलाड़ी प्रतिशोध लेने की तरह खेलते हैं। उनमें एक तरह की हिंसक आक्रामकता होती है।

यदि आपने क़तर फीफा वर्ल्ड कप के कुछ रोमांचक मैच देखे हों तो यह बात समझ सकते हैं कि गोल करने के बाद कई स्टार खिलाड़ी इस तरह उछलते हैं कि उसमें उनका सिर्फ अहंकार ही दिखाई देता है, दूसरों को ध्वस्त कर देने का प्रतिशोध ही दिखाई देता है। रोनाल्डो बेहतरीन हैं, एम्बापे बेहतरीन हैं, सुंदर खेलते हैं, इनकी तेजी हतप्रभ कर देती है, कौशल चमत्कृत करता है लेकिन कितना अहंकार।

कई बार फुटबॉल की सुंदरता और गरिमा पर खरोंच पैदा करता है ये अंहकार। इसके बरक्स पेले का सुंदर खेल देखिए, उनकी गति और लय देखिए, उनका छंद देखिए। उनकी गरिमा और विनम्रता देखिए। यही सब खेल को सुंदर बनाता है, खेलों की दुनिया को सुंदर बनाता है, गरिमा और भव्यता देता है।

एक सदी का अंत

एक तारीख थी 29 जून 1958, ऐतिहासिक तारीख। एक तारीख और याद रखिए 29 दिसंबर 2022। इसी दिन इस सुंदर खेल की दुनिया का जादूगर सफेद चादर में छिप गया है। शायद आपने पेले के जीवन के वे अंतिम पल देखे हों, जब वे अपने परिवार के साथ हैं, बेटी के साथ हैं, बिस्तर पर सफेद चादरों से लिपटे हैं, उन्हें ऑक्सीजन दी जा रही है।

यह देखना कितना त्रासद है कि पीली जर्सी और नीली नेकर में हरे घास के मैदान पर एक मौलिक और अपूर्व छंद रचता हुआ अपनी लय-गतियों से खेल का आनंद लेता खिलाड़ी सफेद चादरों में हमेशा हमेशा के लिए छिप गया है।

एक पवित्र, अलौकिक और उजला जीवन जीकर, यह बताता हुआ कि फुटबॉल से  सुंदर कोई दूसरा खेल नही। जैसे कहता हो- मेरी महत्वाकांक्षा एक सुंदर खेल खेलने की है, मैं नृत्य करना चाहता हूं…


हमारी स्मृति में सिर्फ हरी घास के मैदान पर एक पीला नाचता हुआ खरगोश हमेशा के लिए ज़िंदा रह जाएगा।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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