ऋषि कपूर: उदासी भरे दिनों में एक मोहब्बत सिखाने वाले लड़के की मायूस और अकेली विदाई..!
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ऋषि कपूर नहीं रहे. उदासी से भरे दिनों में एक और मायूसी. निराशा का एक और टुकड़ा. मौत की खबरों से डूबी सुबहों में सितारों के टूटने की आवाजें. आवाज जो धीरे-धीरे मद्धम पड़ती चली जाएगी और एक दिन कभी नहीं सुनाई पड़ेगी. चेहरे जो सदा के लिए स्मृति बन जाएंगे.
हम ऋषि कपूर को याद करेंगे. फिर जो शेष रहेगा वह भी छूटेगा धीरे-धीरे. एक-एक कर सारी तस्वीरें, वीडियो और एल्बम दर्ज होंगे हमारी यादों में. गुमनामी के हिस्से आएंगे कुछ और किस्से. विदा हुए एक अभिनेता की कहानियां. ऋषि कपूर ऐसे ही याद किए जाएंगे।
मैं जानता हूं प्यार के जादूगर, नीली आंखों वाले लड़के चिंटू, तुम्हारी बूढ़ी मौत पर कुछ उदासियां जवान होंगी. खाना बनाते हुए या की टीवी देखते हुए किसी औरत की उंगलियां टाइप करेंगी ऋषि कपूर का कोई गाना. एक हसीना थी एक दीवाना था.!
कुछ मोहब्बत भरी चिट्ठियां दिलोंं में धड़केंगी. कोई चोरी से मिला गिफ्ट अंदर कहीं मुस्कुराएगा, एक गुलाब की सूखी पंखुड़ी महकेगी, एक डायरी के पन्ने फड़फड़ाएंगे अंदर ही..!
यकीनन
कोई कहानी खुलेगी कुछ देर के लिए.! जमाने हरे-भरे होंगे..!
एक अधेड़ औरत की आंखों में किसी लड़की का आंसू होगा. एक बूढ़ी आंखेें उस जमाने का अफसोस जताएगी..। चल कहीं दूर निकल जाएं..! अच्छा होता है कई बार कहीं दूर निकल जाना। जैसे कोई राज किसी बॉबी के साथ भागा था। कोई रोहित किसी चांदनी के साथ चला था। कोई देवधर लड़ता रहा किसी मनोरमा के लिए..!
ओह.!
मरघट से फैले सन्नाटे में चमकते दौर की एक और सबसे गमगीन, अकेली विदाई. एक झलक के लिए तरसती आंखे. खाली कैमरे. ना खामोशी ना आंसू..!
रुखसत ऐसे भी कोई होता है
छोड़कर ऐसे भी कोई जाता है..!
ऋषि कपूर यानी मोहब्बत में डूबी कव्वालियां. ऋषि कपूर का मतलब याराना, दिलदारी और साफगोई. महफिल का सबसे जगमगाता कोना. एक खूबसूरत चेहरे पर तैरता इश्क. होठों पर बुदबुदाता प्यार. कसमें-वादे. दीवानगी से भरी आवारगी. बदलते मौसमों की खुमारी या की फूलों से महकता एक आशिक.
एक अल्हड़ सा नीली आंखों वाला लड़का चिंटू जिसके प्यार में डूबी रहीं कई लड़कियां..!
एक प्रेम रोगी
प्यार से लहराता एक सागर
एक रोमांस में डूबा शायर जिसके नगमें हर जवां दिलों में धड़कते रहेंगे..!
ऋषि कपूर
टीवी का एक दौर. फिल्मों में पीढ़ियों से गुजरकर दिलों तक पहुंचता एक चेहरा. पोस्टर से उतरकर हर दिल के कोने में जाना-पहचाना एक किरदार. सफर के गानें और सीडी पर बनी एक तस्वीर जिसके हिस्से हैं प्यार के गाने जिंदगी से भरे मोहब्बत के गीत.
गांव-कस्बों, शहरों का प्यार, चौक-चौराहों और स्कूलों में गुजर बसर करती एक शख्सियत...!
किसे याद करें और किसे भूलें..
जान-ए-वफ़ा, सच है किस को पता
फिर मिले ना मिले, ये पल ये समा, बाहों में आ जा..!
उदासी से भरे दिनों में
एक और मायूस, अकेली विदाई..!
विदा ऋषि कपूर-
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।