बोडोलैंड में नया सवेरा: समस्याओं से समाधान की ओर जाने का प्रयास
बीटीआर प्रमुख प्रमोद बोरो बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बोडोलैंड के विकास के लिए हर तरह की मदद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए त्वरित कार्रवाई कर रहे हैं। विकास की विभिन्न योजनाओं को कार्यरूप दिया जा रहा है।
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जिस बोडोलैंड में कभी बंदूकों की फसल लहलहाती थी, विस्फोटों से धरती कांपती थी, बारूदी गंध में लिपटे शवों से आदमीयत कराहती थी, उसी बोडोलैंड में अब ज्ञान की ज्योति जग रही है, नॉलेज फेस्टीवल हो रहे हैं, साहित्यक सम्मेलन हो रहे हैं, कविताओं का पाठ हो रहा है और पूर्वोत्तर स्तर से लेकर एशिया स्तर तक के खेलकूदों का आयोजन हो रहा है। डर की जगह उत्साह, माहौल ले रहा है। युवा पीढ़ी सृजन की नई राह तलाश रही है।
युवक अब जंगल की तरफ जाने के बजाय खेतों, कॉलजों और उद्योगों की तरफ जा रहे हैं। बोडो भाषा में प्रेम की कविताएं लिखी जा रही हैं, नई पीढ़ी में कुछ नया करने का सपने रोपे जा रहा है। यही वजह है कि अब बोडोलैंड का माहौल तेजी से बदल रहा है। इस बदलाव का श्रेय बहुत हद तक बोडोलैंड प्रदेशिक क्षेत्र (बीटीआर) के मुख्य कार्यकारी सदस्य प्रमोद बोरो को जाता है।
वह बोडोलैंड में बेहतर माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि लंबे आंदोलन के बाद अब सृजन का समय है। केंद्र और राज्य सरकार बोडोलैंड के विकास के लिए लगातार मदद कर रही है। इस सुविधा का लाभ बोडोलैंड के विकास के लिए उठाना चाहिए। इसके लिए मानसिकता में बदलाव जरूरी है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि-
अब समस्याओं पर नहीं, समाधान की दिशा में सोचना है और उस ओर पहल करना है। अब हमें अंधेरे की तरफ नहीं, उजाले की तरफ देखना होगा। करीब 40 वर्षों तक चले लंबे बोड़ो आंदोलन की वजह से लोगों के अंदर नकारात्मकता ज्यादा थी, लेकिन अब माहौल और परिस्थिति बदल गई है। अब आंदोलन की जगह कुछ नया गढ़ने की जरूरत है। यदि इस समय का हमलोगों ने सही उपयोग नहीं किया तो देश के अन्य हिस्से की तुलना में हम पिछड़ते चले जाएंगे। बोडोलैंड आजादी के बाद भी दशकों तक उपेक्षित रहा, जिसकी वजह से लंबे समय तक लोकतांत्रिक और हिंसक आंदोलन अलग-अलग चलता रहा, लेकिन अब मौसम बदल गया है।
बीटीआर प्रमुख प्रमोद बोरो बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बोडोलैंड के विकास के लिए हर तरह की मदद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए त्वरित कार्रवाई कर रहे हैं। विकास की विभिन्न योजनाओं को कार्यरूप दिया जा रहा है। बोडोलैंड शांति समझौते को पूरी तरह लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार का सहयोग मिल रहा है। बोडोलैंड से उग्रवाद समाप्त हो चुका है।
विकास के लिए मानसिकता में बदलाव जरूरी
बीटीआर प्रमुख का मानना है कि विकास के लिए मानसिकता का बदलना जरूरी है। नाकारात्मकता से सकारात्मकता की तरफ जाना होगा। उनकी सरकार बनने के बाद उन्होंने हर समुदाय को साथ लेने की कोशिश की है। उनके साथ संवाद किया और उनकी समस्याओं को जानने का प्रयास किया। उसका प्रभाव सरकार की नीतियों में देखा जा सकता है। वे लोगों बोडोलैंड में बसे हर समुदाय के कल्याण और विकास के लिए काम कर रहे हैं, ताकि सब मिलकर बोडोलैंड को नया बोडोलैड बनाने में मदद करें।
बीटीआर सरकार के प्रयासों से ही आदिवासी उग्रवादी संगठन मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। गोर्खा समुदाय के बीच भी कुछ लोग हिंसा पर उतारू थे, उन्हें भी मुख्यधारा में लाया गया है, क्योंकि बोडोलैंड के विकास के लिए स्थायी शांति जरूरी है। इस दिशा में पुलिस और प्रशासन का सहयोग भी मिल रहा है।
वे बताते हैं कि माहौल को बदलने के लिए उनकी सरकार ने कुछ रचनात्मक पहल की है।
पहली बार कविता उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें एक सौ भाषा की कविताओं का पाठ किया गया। इसका मूल स्वर था- प्रेम और शांति के लिए कविता। पूरे देश से लोग आए। उन्होंने बोडोलैंड को करीब से देखा। इसके साथ बोडोलैंड विश्वविद्यालय की मदद से नॉलेज उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें 14 देशों के करीब 200 वक्ताओं और सात विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भाग लिया।
इसमें हमने उनसे बहुत कुछ सीखा। उस सम्मेलन में नॉबल विजेता प्राप्त मोहम्मद यूनुस ने भाग लिया। बोडोलैंड में इसी वर्ष साहित्य उत्सव का आयोजन किया गया। देशभर के साहित्यकार आए। बोड़ो साहित्य सभा ने देश की अन्य भाषाओं के साहित्यकारों को बोड़ो भाषा की भूमि पर अन्य भाषाओं और बोड़ो भाषा के बीच जीवंत संवाद कराया।
खेलों ने भरा युवाओं में आत्मविश्वास
बीटीआर सरकार की ओर से पहले छठी अनुसूचित क्षेत्र की टीमों के बीच फुटबॉल मैच का आयोजन कराया गया, जिसमें पूर्वोत्तर के आठ में से छह अनुसूचित क्षेत्रों की टीमों ने भाग लिया। पहली बार कोकराझाड़ में संतोष ट्रॉफी के कुछ मैचों का आयोजन कराया गया।
हाल ही में तामुलपुर जैसे एक पिछड़े इलाके में एशियाई खो-खो चैंपियनशिप का सफल आयोजन किया गया। एक छोटी जगह पर एशिया स्तर के खेल का आयोजन कोई आसान काम नहीं था। 20 से 23 मार्च तक चलने वाली चार दिनों की इस चैंपियनशिप में 12 देशों के 800 खिलाड़ी और अधिकारियों ने भाग लिया। जहां पर इतने बड़े आयोजन के लिए कोई बुनियादी ढांचा भी नहीं है। न तो बड़ा इनडोर स्टेडियम है और न ही बड़े होटल।
आमतौर से ऐसे आयोजन किसी राज्य की राजधानी या बड़े शहरों में होते हैं, लेकिन बीटीआर और इसके प्रमुख प्रमोदी बोरो ने असंभव को संभव बना दिया। स्थानीय लोगों में गजब का उत्साह दिख रहा था। खराब मौसम और बुनियादी ढांचा के अभाव के बावजूद चैंपियनशिप बिना किसी बाधा के पूरी हुई। तामुलपुर उच्चतर माध्यमिक खेल मैदान को कृत्रिम इनडोर स्टेडियम बना दिया गया था, जहां पर एसी की भी व्यवस्था थी। खेल का संचालन भले ही असम खो-खो एसोसिएशन की देखरेख में हो रहा है, लेकिन इसकी मेजबानी बीटीआर ने की।
मैं खुद वहां गया था और वहां की व्यवस्था देखकर दंग रह गया। हरियाणा से आई भारतीय महिला टीम की पूर्व कप्तान सुनीता छेत्री ने बताया कि इतने कम बजट में ऐसी व्यवस्था कम ही देखने को मिलती है। बीटीआर के लोगों की निष्ठा की वजह से ही ऐसा संभव हो पाया है।
बीटीआर प्रमुख प्रमोद बोरो ने कहा कि वे चाहते हैं कि उनके क्षेत्र के लोग खेल को भी करियर बनाएं, क्योंकि उनमें वह क्षमता है। जब बाहर के लोग आते हैं और यहां का बदला माहौल देखते हैं तो एक अच्छा अनुभव लेकर जाते हैं, क्योंकि पहले हिंसा की वजह से लोग बोडोलैंड आने से डरते थे, इसलिए वे इस तरह के आयोजनों पर जोर दे रहे हैं।
वे मानते हैं कि बोडोलैंड की युवा पीढ़ी खेलों के मामले में दक्ष है। उन्हें आधुनिक तकनीक और खेलने का मौका देना होगा। बोड़ो भाषा में लिखने वाले को एक बड़ा मंच देना होगा, तभी उनका उत्साह बढ़ेगा। वे हर बोड़ो गांव में ऐसा केंद्र चाहते हैं, जो खेलकूद समेत अन्य सृजनात्मक गतिवधियों को बढ़ावा दे।
बदल रहा है माहौल
इसमें दो राय नहीं है कि बोडोलैंड का माहौल बदला है। उग्रवाद का दौर बीत चुका है। मैं जब बीटीआर प्रमुख प्रमोद बोरो से मिलने कोकराझाड़ में उनके सचिवालय पहुंचा, तो रात के आठ बज रहे थे। बंगाईगांव से कोकराझाड़ तक सड़क मार्ग से सफर कर रहा था। सड़कों पर वाहन चल रहे थे। रात दस बजे जब मैं उनसे मिलकर बंगाईगांव की तरफ निकला तो जमकर बारिश आरंभ हो गई। तब भी चलते हुए भय नहीं लग रहा था, जबकि पहले उतनी रात यात्रा करना निरापद नहीं लगता था। अभी भी एक वर्ग हिंसा की ताक में रहता है, लेकिन राज्य सरकार उग्रवाद के खिलाफ सख्त है।
बोरो का मानना है कि पूरी तरह माहौल बदलना में थोड़ा समय लगेगा, क्योंकि इनके आने से पहले बीटीआर पर तीन हजार करोड़ रुपये का बकाया था, पूरा सिस्टम ध्वस्त हो गया था, वित्तीय अनुशासन नहीं था। वे सब कुछ ठीक करने में लगे हैं।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अतिम शाह और असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बोडोलैंड के विकास के लिए सतत प्रयास जारी रखने का आग्रह किया।
बोरो से बातचीत के दौरान यह महसूस हुआ कि वह अपने क्षेत्र के लिए कुछ करना चाहते हैं, नए बोडोलैंड के लिए उनके अंदर कई सपने हैं, जिन्हें वे साकार करना चाहते हैं।
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