राजस्थान विधानसभा चुनाव: श्रीकरणपुर सीट पर मंत्री की हार का इशारा किस ओर है...
राजस्थान विधानसभा चुनाव में 200 में से 199 सीटों पर जब चुनाव हुआ था तो भाजपा को 115 और कांग्रेस को 69 सीटों पर विजय हासिल हुई थी। हालांकि, दोनों पार्टियों के मत प्रतिशत में बहुत ज्यादा अंतर नहीं था। भाजपा को 41.69 प्रतिशत वोट व 1,65,24,787 मत मिले, जबकि कांग्रेस को 39.53 प्रतिशत वोट व 1,56,67,947 मत मिले।
विस्तार
राजस्थान में 3 दिसंबर 2023 को सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी को श्रीगंगानगर की श्रीकरणपुर सीट पर 11 हजार से ज्यादा वोटों से हार का सामना करना पड़ा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ताजपोशी के बाद इस चुनाव को सरकार का लिटमस टेस्ट माना जा रहा था। भाजपा इस सीट को जीतने को लेकर कितनी प्रयत्नशील थी, यह इसी बात से पता चलता है कि उसने श्रीकरणपुर से अपने प्रत्याशी सुरेंद्र पाल सिंह टीटी को मतदान से सप्ताह भर पहले मंत्री पद की शपथ भी दिला दी थी। राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष सीपी जोशी भले हार के कारणों की समीक्षा की बात कह रहे हैं, लेकिन चुनाव का परिणाम कहीं ना कहीं भाजपा के लिए मनोबल गिराने वाला जरूर है। आखिर सत्ताधारी दल और मंत्री को हराकर मतदाता किस ओर इशारा कर रहा है?
दरअसल, श्रीकरणपुर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी गुरमीत सिंह कुन्नर के निधन के बाद यहां चुनाव स्थगित कर दिया गया था। इस सीट पर कांग्रेस ने इमोशनल कार्ड खेलते हुए गुरमीत सिंह कुन्नर के पुत्र रुपिंदर सिंह कुन्नर को प्रत्याशी बनाया। भाजपा की तरफ से पूर्व मंत्री सुरेंद्र पाल सिंह टीटी उम्मीदवार थे, जो पहले वसुंधरा सरकार में मंत्री रह चुके हैं। भाजपा को डर था कि इमोशनल कार्ड खेलते हुए कांग्रेस यहां बाजी पलट सकती है, इसलिए पार्टी ने सुरेंद्र पाल सिंह टीटी को मतदान से पहले मंत्री भी बना दिया, ताकि जनता में स्पष्ट संदेश जाए कि वो एक विधायक को नहीं, बल्कि मंत्री को चुन रही है, जो दांव उल्टा पड़ गया है।
राजस्थान विधानसभा चुनाव में 200 में से 199 सीटों पर जब चुनाव हुआ था तो भाजपा को 115 और कांग्रेस को 69 सीटों पर विजय हासिल हुई थी। हालांकि, दोनों पार्टियों के मत प्रतिशत में बहुत ज्यादा अंतर नहीं था। भाजपा को 41.69 प्रतिशत वोट व 1,65,24,787 मत मिले, जबकि कांग्रेस को 39.53 प्रतिशत वोट व 1,56,67,947 मत मिले। कांग्रेस उस तरीके से चुनाव में धराशाही नहीं हुई, जैसी 2013 के विधानसभा चुनाव में हुई थी, तब पार्टी मात्र 21 सीटों पर सिमट गई थी।
इस बार उसने भाजपा को कड़ी टक्कर दी। श्रीकरणपुर के चुनाव नतीजों से कांग्रेस का उत्साह सातवें आसमान पर जा पहुंचा है और यह पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान से झलकता भी है। गहलोत ने बयान दिया है कि श्रीकरणपुर की जनता ने भाजपा के अभिमान को हराया है। चुनाव के बीच प्रत्याशी को मंत्री बनाकर आचार संहिता और नैतिकता की धज्जियां उड़ाने वाली भाजपा को जनता ने सबक सिखाया है। गहलोत के बयान से साफ है कि कांग्रेस अब बेहद आक्रमक रहने वाली है।
लोकसभा चुनाव को अब चंद दिन शेष रह गए हैं। राजस्थान विधानसभा चुनाव को लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल भी कहा जा रहा था, जिसमें भाजपा ने जीत हासिल कर यह बताया कि वो लोकसभा चुनाव के लिए तैयार है। भाजपा, जिसने पिछले दो लोकसभा चुनाव में राजस्थान की सभी 25 सीटों पर विजय हासिल की है, इस बार उसे कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिल सकती है। श्रीकरणपुर सीट के चुनाव नतीजे को देखकर यह साफ पता चलता है। शायद यही कारण है कि कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए अभी से पेटी बांध ली है।
कांग्रेस पार्टी की तैयारी शुरू हो गई हैं। विधानसभा चुनाव में आंकड़ों को देखकर लगता है कि कांग्रेस एक दर्जन सीटों पर भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकती है। टोंक- सवाईमाधोपुर, दौसा, करौली-धौलपुर, सीकर, झुंझुनूं, नागौर, कोटा, डूंगरपुर-बांसवाड़ा, जयपुर ग्रामीण की सीट ऐसी हैं, जहां कांग्रेस की स्थिति विधानसभा चुनाव में ठीक-ठाक रही है। कांग्रेस इन्हीं सीटों पर ज्यादा मेहनत करेगी, ऐसा साफ संकेत उसने दे दिया है।
यह बात ठीक है कि कांग्रेस को श्रीकरणपुर में इमोशनल कार्ड खेलने का फायदा मिला है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी को निश्चित रूप से आत्मावलोकन करने की जरूरत है कि श्रीकरणपुर सीट पर पार्टी प्रत्याशी को मंत्री बनने के बावजूद पार्टी क्यों हारी? क्या यह जनता का कोई संकेत है? लोकसभा चुनाव से पहले जनता किस ओर इशारा करना चाह रही है? भारतीय जनता पार्टी को श्रीकरणपुर सीट की हार पर गंभीरता से समीक्षा करने की जरूरत है, क्योंकि लोकतंत्र में जनता ही है, जो कब किसे धराशाही कर दे, पता नहीं चलता।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।