पक्षियों का संसार और अनपेक्षित अतिथि
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यह मेरे और मेरी पत्नी के लिए रविवार की दोपहर की एक सामान्य दिनचर्या थी। कुछ ही मिनट पहले हम दोनों ने अपना लंच खत्म करके, रसोई में सफाई कर रहे थे। हमेशा की तरह एक छोटी दोपहर की झपकी लेने से पहले हम दोनों हमारे घर के पिछवाड़े स्थित बगीचे में कुछ समय बिताने के इच्छुक थे। हमारे घर के मालिक ने बैकयार्ड में कई केले और पपीते के पौधे लगाए हैं। विभिन्न प्रकार के मसालों के पौधे पिछले कुछ वर्षों से बैकयार्ड की सीमा पर कुछ आत्मविश्वास के साथ खड़े हैं।
यह विभिन्न प्रजातियों के कीटों, पक्षियों, सरीसृप और मीठे पानी के अकशेरूकीय जीवों सहित वनस्पतियों की कई प्रजातियों के लिए सबसे अच्छा निवास स्थान हैं। लेकिन यह रविवार हमारे लिए आश्चर्यजनक रूप से विशेष था, जब हमने पपीते के पौधों पर बैठे इस अनजान अप्रत्याशित अतिथि को देखा। प्रदीप क्या आप जानते हैं कि यह कौन है? मेरी पत्नी ने जिज्ञासा और खुशी के साथ सवाल पूछा।
मेरे जैसा व्यक्ति जिसने मुंबई जैसे शहर में एक लंबा समय बिताने के बाद, जब वे हरे रंग की प्रकृति और विशाल वन्य जीवन से भरे इस स्थान पर स्थानांतरित हो गया था। छह महीने पहले ही हम मुंबई से कोच्चि में शिफ्ट हुए हैं, ये बातें ठीक उसी तरह हैं जैसे सपने हकीकत में बदल जाते हैं। 8 अगस्त 2020 के दिन, मैं कोचीन के इस नए घर में स्थानांतरित हो गया। इस नए घर में बिताने के एक हफ्ते के भीतर, मैं रोजाना सुबह-सुबह चिड़ियों की चहचहाहट सुनकर हैरान था।
मेरी पत्नी भी ठीक एक महीने बाद मुंबई से इस जगह पर आई थी। हमने इस हरे भरे स्थान में अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत की। हमारा घर बहुत छोटे वेटलैंड और एक बैकवाॅॅटर कैनाल के पास स्थित है। बीएससी के पहले वर्ष से 'वेटलैंड परिस्थितिकी' और ‘वेटलैंड पर्यावास पारिस्थितिकी का पक्षियों पर प्रभाव ' मेरे लिए शोध का बहुत प्रेरणादायक विषय है।
हमारे घर के पिछवाड़े में पपीते के पौधे के पास जमीन पर बैठा एक पक्षी इस कहानी का नायक है। वह पक्षी आकार एक सामान्य कौवे के समान था, पक्षी की चोंच संरचना और आकार भी एक कौवा के समान थी। लेकिन यह एक कौवा नहीं था, क्यों? लंबी सुंदर पूंछ वाले पक्षी को, सफेद रंग का नीचे का हिस्सा के साथ काले रंग का चेहरा इस प्रजाति को अन्य पक्षी प्रजातियों बीच में मूल अंतर उत्पन्न करता था।
मैंने अपना मोबाइल कैमरा को अपनी पत्नी को सौंप दिया और अपने फील्ड बैग की तरफ दौड़ पड़ा। ग्रिमेट द्वारा लिखित ‘भारतीय उपमहाद्वीप के पक्षी’ एक फील्ड गाइड बुक और एक दूरबीन लेकर मैं आ गया। इस चिड़िया का विस्तृत अवलोकन दूरबीन द्वारा 10-12 मिनट के लिए हमने किया। हमने उनके आकृति विज्ञान और व्यवहार विज्ञान टिप्पणी को रिकॉर्ड किया।
यह नाटक अभी भी 20-22 मिनट तक जारी रहा। यह हमारे जीवन में पहली बार था जब हमने इस पक्षी को देखा।यह हमारे लिए दिवाली से पहले उपहार की तरह था। जमीन के साथ संपर्क करना, फल खाना, और अंश समय के लिए पौधे पर बैठना और फिर से इस चक्र को दोहराना ऐसा है जैसे ध्वनि के साथ काले-सफेद रंग में एक प्राकृतिक कैनवास पर एक चित्र बनाना।
प्रदीप यह पक्षी ट्रीपीस के समान दिखता है” मेरी पत्नी ने उसकी अवलोकन पर टिप्पणि व्यक्त की। हां, यह भारत के पश्चिमी घाट क्षेत्र में मौजूद “व्हाइट-बेल्ड ट्रीपी” (हिंदी:- श्वेत उदर कृशकूट) याने वैज्ञानिक भाषा में “डेंड्रोकिट्टा ल्यूकोगास्त्र’ कम से कम चिंता पक्षी प्रजातियां में स्थित एक थीं। पिछले कई वर्षों से हम मुंबई और उसके आसपास के विभिन्न पारिस्थितिक आवासों की खोज कर रहे हैं लेकिन यह पहली बार था जब हमने इस पक्षी की प्रजाति को रिकॉर्ड किया है।
आधुनिकीकरण बहुत अच्छी तरह से हुआ है...
यह पक्षी नम हरी पहाड़ी जंगल और विशेष रूप से शोधकर्ता ने इस पक्षी को इलायची वृक्षारोपण, रबड़ के बागानों, बड़े सड़क के किनारे के पेड़ों के पास रिकॉर्ड किया है। लेकिन हम इस क्षेत्र में मानव समुदाय के पास इस पक्षी की प्रजातियों को देखकर खुश थे। ये चिड़िया यहां क्यों दिख गई? हो सकता है कि इस शहर में लोग अपने घर के आस-पास कुछ छोटे बगीचे बनाए रखें इसके कारण।
आधुनिकीकरण बहुत अच्छी तरह से हुआ है, लेकिन ये लोग अभी भी इस तरह के अप्रत्याशित आगंतुक के लिए कुछ हरे गलियारे को बनाए रखे हैं। इस तरह के एक सुंदर परिदृश्य में जो विभिन्न पौधों और जल निकायों से घिरा हुआ हैं, हमने अपने पिछवाड़े के बगीचे में और उसके आसपास विशेष पौधों पर निम्नलिखित पक्षियों की अवलोकन कर उसकी सूची नीचे दी हैं। हम आगामी अच्छे मौसम में इस बगीचे में अधिक से अधिक प्रवासी पक्षियों और कीड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
| अनु क्रमांक. | पौधे का नाम | पक्षी का नाम | |
| साधारण नाम | वानस्पतिक नाम | ||
| 1. | आम | Mangifera indica |
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| 2. | नीम | Azadirachta indica |
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| 3. | जामुन | Syzygium cumini |
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| 4. | नारियल | Cocos nucifera |
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| 5. | पपीता | Carica papaya |
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| 6. | केले का पेड़ | Musa acuminata |
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लेखक का परिचय:
लेखक प्रदीप नामदेव प्राणीशास्त्र के छात्र हैं। उन्होंने समुद्र विज्ञान और मत्स्य विज्ञान में अपनी मास्टर डिग्री पूरी की है। वर्तमान में केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान, कोच्चि में एक वरिष्ठ रिसर्च फेलो के रूप में काम कर रहे हैं। प्रदीप को समुद्री संवर्धन के क्षेत्र में लोगों को अपना विचार और अनुभव व्यक्त करना बहुत पसंद है। समुद्री सस्तन जीव,समुद्र कछुए, पक्षी, यह उनके प्रिय विषय हैंं।
यह श्रंखला 'नेचर कन्जर्वेशन फाउंडेशन (NCF)' द्वारा चालित 'नेचर कम्युनिकेशंस' कार्यक्रम की एक पहल है। इस का उद्देश्य भारतीय भाषाओं में प्रकृति से सम्बंधित लेखन को प्रोत्साहित करना है। यदि आप प्रकृति या पक्षियों के बारे में लिखने में रुचि रखते हैं तो ncf-india से संपर्क करें।
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