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बिहार चुनाव 2020: एआईएमआईएम चुनाव नहीं लड़ती तब भी तय थी भाजपा की जीत
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बिहार विधानसभा के 243 सीटों में 125 पर नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए ने जीत दर्ज की
- फोटो : अमर उजाला
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(ओवैसी की पार्टी जिन 20 सीटों पर चुनाव लड़ी उसमें उसे पांच पर जीत मिली। जबकि छह पर एनडीए प्रत्याशी जीते, इसमें सिर्फ एक पर ही हार-जीत का अंतर एआईएमआईएम को मिले वोट से कम रहा। अगर ये छह सीटें महागठबंधन के खाते में चली भी जाती तब भी एनडीए को सिर्फ एक सीट का नुकसान होता और वह 124 सीट के साथ बहुमत से सरकार बना लेती)
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दिल की धड़कनों को रोक देने वाली रोमांचक मुकाबले में आखिरकार गठबंधन ने बाजी मार ली। बिहार विधानसभा के 243 सीटों में 125 पर नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए ने जीत दर्ज की। वहीं, तेजस्वी यादव की अगुवाई वाली महागठबंधन को 110 सीटें मिलीं।
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कांटे की टक्कर में महागठबंधन की हार के साथ ही ओवैसी की पार्टी पर नतीजों को प्रभावित करने को लेकर आरोप-प्रत्योराप का दौर शुरू हो गया। एआईएमआईएम पर राजग को फायदा पहुंचाने और यूपीए को नुकसान पहुंचाने का आरोप शुरू से ही लगता रहा है। 2015 में बिहार के सीमांचल में भी ओवैसी पर वोटों के ध्रुवीकरण के आरोप लगे थे।
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इस बार 2020 विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की है। ऐसे में एक बार फिर से उन पर भाजपा को फायदा पहुंचाने का आरोप लग रहा है। यूपीए समर्थित प्रत्याशियों व नेताओं का कहना है कि ओवैसी की पार्टी ने जानबुझकर मुस्लिम बहुल सीटों पर चुनाव लड़ा ताकि इससे भाजपा को फायदा पहुंचाया जा सके। हालांकि, आंकड़ों पर गौर करें तो अगर ओवैसी की पार्टी चुनाव नहीं लड़ती तब भी एनडीए बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार कर लेती।
दरअसल, एआईएमआईएम ने जिन 20 सीटों पर चुनाव लड़ा है उसमें पांच पर उसे जीत मिली है। इसके अलावा छह पर एनडीए के प्रत्याशी और नौ पर महागठबंध के प्रत्याशी जीते हैं। इसमें जिन पांच सीटों पर एनडीए के उम्मीदवार जीते हैं वहां हार-जीत का अंतर एआईएमआईएम को मिले वोट से काफी ज्यादा है।
सिर्फ एक सीट (रानीगंज) पर ही हार-जीत का अंतर एआईएमआईएम को मिले वोट से कम है। 20 में से जिन छह सीटों नरपतगंज, बरारी, प्राणपुर, साहेबगंज, रानीगंज और छातापुर पर एनडीए प्रत्याशी चुनाव जीते हैं, अगर उन पर एआईएमआईएम अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं भी करती तब भी पांच सीटों पर भाजपा की जीत सुनिश्चित थी।
सिर्फ रानीगंज सीट एआईएमआईएम की वजह से प्रभावित हुई है। रानीगंज सीट पर एनडीए और महागठबंधन में हार-जीत का अंतर महज 1992 रहा। यहां एआईएमआईएम को 2412 वोट मिले। अगर यहां एआईएमआईएम अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं करती तो रानीगंज सीट महागठबंधन के खाते में जाती।
नरपतगंज सीट पर हार-जीत का अंतर 2810 रहा। यहां एआईएमआईएम को 5495 वोट ही मिले। बरारी में हार जीत का अंतर 10,438 है यहां एआईएमआईएम को 6598 वोट मिले। प्राणपुर में 2972 का अंतर रहा। यहां ओवैसी की पार्टी को महज 508 वोट ही मिले।
साहबेगंज में हार-जीत का अंतर 15333 रहा, यहां ओवैसी की पार्टी को 4055 वोट मिले। छातापुर में एनडीए प्रत्याशी ने 20635 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की जबकि यहां एआईएमआईएम को सिर्फ 1990 वोट ही मिले।
इसके अलावा एआईएमआईएम ने सीमांचल के अमौर, बहादुरगंज, बायसी, जोकिहाट व कोचाधामन सीट पर जीत दर्ज की है। इसमें जीत का अंतर देखे तो अमौर में जहां एआईएमआईएम के अख्तरुल ईमान को 94459 वोट मिले हैं वहीं, महागठबंधन को महज 31863 वोट मिले हैं। एनडीए यहां दूसरी सबसे बड़ी पार्टी रही है।
उसे 41944 वोट मिले हैं। बहादुरगंज में एआईएमआईएम को 85855, महागठबंधन को 30204 और वीआईपी पार्टी को 40640 वोट मिले हैं। बायसी में एआईएमआईएम को 68416, महागठबंधन को 38254 और एनडीए को 52043 वोट मिले हैं।
जोकिहाट में एआईएमआईएम को 59596, महागठबंधन को 1243 और एनडीए को 48933 वोट मिले हैं। कोचाधामन विधानसबा में एआईएमआईएम को 79893, महागठबंधन को 26134 और एनडीए को 43750 वोट मिले हैं।
चुनाव परिणाम को देखें तो अगर, इन 20 सीटों पर एआईएमआईएम चुनाव नहीं लड़ती तो अमौर, बायसी, बहादुरगंज, कोचाधामन और जोकिहाट और रानीगंज सीट महागठबंधन के खाते में जाती है। ऐसे में एनडीए को सिर्फ एक सीट (रानीगंज) का नुकसान होता जबकि महागठबंधन को छह सीटों का फायदा होता। इस आधार पर भी महागठबंधन के सीटों की संख्या 116 ही होती जबकि एनडीए की सीटों की संख्या 124 होती जो बहुमत से सरकार बनाने के लिए काफी थी।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।