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यूरोप में पतझड़ भी बन जाता है दर्शनीय नजारा

Thu, 17 Oct 2019 11:35 AM IST
Priyamvada Sahay प्रियंवदा सहाय
Updated Thu, 17 Oct 2019 11:35 AM IST
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Beautiful Autumn of europe
यूरोप अपने सुंदर प्राकृतिक नजारे और ऐतिहासिक विरासतों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। - फोटो : सोशल मीडिया

यूरोप अपने सुंदर प्राकृतिक नजारे और ऐतिहासिक विरासतों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इस महादेश के अधिकांश हिस्सों में प्राकृतिक सुंदरता कूट कूटकर भरी है। यहां के ठंडे प्रदेशों में लोगों को जितनी उत्सुकता गर्मी के दिनों को लेकर होती है, उससे कुछ कम इंतजार शरद ऋतु या पतझड़ को लेकर नहीं रहता।

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स्वीडन समेत समूचे ठंडे प्रदेशों में इस मौसम में प्राकृतिक नज़ारे बस देखने लायक होते हैं। औसत तापमान बीस डिग्री से नीचे आने के बाद ठंड दस्तक देने लगती है। इस गुलाबी ठंड के साथ आने वाले हफ्तों में, देश भर में करोड़ों पत्ते रंग बदलना शुरू कर देंगे। कई पेड़ों की पत्तियां तो हरे से ख़ूबसूरत पीले रंग की ओर अभी से बढ़ने लगी हैं। लेकिन आने वाले दिनों में इनके रंग बदलकर लाल, सुर्ख़ लाल, नारंगी भी हो जाएंगे। जो अपने आप में एक अद्भुत दर्शनीय नज़ारा बन जाता है।
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इन रंगबिरंगी पत्तियों की वजह से अक्टूबर के महीने में हरे-भरे पार्क, जंगल और सड़कों के किनारे कतार में लगे पेड़-पौधे सभी किसी रंगबिरंगी पेंटिंग से कम नहीं लगते। ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने हरे-भरे जंगलों पर रंगों की बरसात कर दिया हो।
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Beautiful Autumn of europe
वैज्ञानिक मानते हैं कि स्थानीय मौसम में बदलाव पत्तियों के सूखने, रंग बदलने या पेड़ से टूटकर गिरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। - फोटो : सोशल मीडिया

आख़िर क्यों रंग बदलती हैं पत्तियां? 
दरअसल, पत्तियों के रंग बदलने का कारण उनके अंदर ही मौजूद होता है। गर्मी के जाते ही पत्तियों के रंग में बदलाव शुरू हो जाता है। गर्मियों में, पत्ते हरे होते हैं क्योंकि उस समय वे बहुत सारे क्लोरोफिल बना रहे होते हैं। यह पौधों को सूरज की रोशनी से ऊर्जा बनाने में मदद करता है। लेकिन प्रत्येक पत्ती में चार मुख्य वर्णक होते हैं। क्लोरोफिल (हरा), ज़ैंथोफिल्स (पीलापन), कैरोटेनोइड्स (संतरे), एन्थोकायनिन (लाल)। अब जैसे-जैसे दिन छोटे होने लगते हैं, पत्तियां रंग बदलने लगती हैं। क्योंकि सर्दियों की तैयारी के लिए पत्तियां कम क्लोरोफिल का उत्पादन कर रही होती हैं। ठंड के दस्तक देते ही हरे रंग फीके पड़ने लगते हैं और उनमें लाल, संतरे, और पीलापन भरे रंग अधिक दिखाई देने लगते हैं।

वैज्ञानिक मानते हैं कि स्थानीय मौसम में बदलाव पत्तियों के सूखने, रंग बदलने या पेड़ से टूटकर गिरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि ठंडे प्रदेशों में पत्तियों के रंग बदलने की प्रक्रिया ज्यादा स्पष्ट और सुंदर दिखाई देती हैं।


 

Beautiful Autumn of europe
लोग फूलों की घाटियों की जगह रंगीन जंगलों के मनमोहक नज़ारे को देखना ज्यादा पसंद करते हैं। - फोटो : social media

रंगीन प्राकृतिक नज़ारों को देखने के लिए भी आते हैं पर्यटक
गर्म प्रदेशों में अमूमन यह नज़ारा कम ही देखने को मिलता है। इसलिए ऐसे प्रदेशों से शैलानी शरद ऋतु के रंगीन मनमोहक नज़ारे को देखने के लिए ठंडें देशों की ओर कूच करते हैं। स्वीडन के पर्यटन में इस मौसम को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। कई शैलानी रंगीन रास्ते और रंगबिरंगे जंगलों को देखने के लिए ख़ासतौर पर सड़क मार्ग से सफ़र करते हैं। ख़ास बात यह है कि सितंबर-अक्टूबर के महीनों में पेड़-पौधों कि पत्तियों का महत्व फूलों से ज्यादा बढ़ जाता है।

लोग फूलों की घाटियों की जगह रंगीन जंगलों के मनमोहक नज़ारे को देखना ज्यादा पसंद करते हैं। इन रंगीन पत्तियों पर कुछ ही महीनों में बर्फ़ की मोटी चादर बिछने लगेगी। साथ ही शुरू हो जाएगा कड़कड़ाती ठंड का लंबा मौसम। इसलिए सितंबर - अक्तूबर का महीना यहां प्राकृतिक रूप से सबसे रंगीन महीना माना जाता है। इसके बाद के महीनों में प्रकृति करवट बदलकर फिर सफ़ेद रंग में लिपटी हुई दिखने लगेगी। ऐसे मनमोहक नज़ारे अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया महादेशों में भी देखने को मिलते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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