Assam Assembly Election 2021: असम का बदलता राजनीतिक समीकरण
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असम का राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहा है। एक तरफ गैर भाजपा दल एकजुट हुए हैं तो दूसरी तरफ दो नए क्षेत्रीय दलों ने मिलकर चुनाव लड़ने का संकेत दिया है। असम विधानसभा के चुनाव करीब आते ही राज्य के राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। भाजपा विरोधी मतों का विभाजन रोकने के लिए कांग्रेस, एआईयूडीएफ के साथ वामपंथी दलों- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और सीपीआई (एमएल) तथा आंचलिक गण मोर्चा ने साझा गठबंधन बना लिया है।
दूसरी तरफ नागरिकता संशोधन कानून का विरोधी आंदोलन के गर्भ से निकले नवगठित दल- असम जातीय परिषद तथा राइजर दल ने मिलकर चुनाव लड़ने का संकेत दिया है। एजेपी अध्यक्ष लुरिन ज्योति गोगोई राज्य के क्षेत्रीय दलों का साझा मोर्चा बनाने चाहते हैं और इस मोर्चा में हाग्रामा मोहिलारी की अगुवाई वाली बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट को भी शामिल करना चाहते हैं। लेकिन लुरिन असम गण परिषद से दूरी बनाए रखना चाहते हैं, भले ही अगप राज्य का सबसे पुराना क्षेत्रीय दल है। लेकिन भाजपा के साथ अगप का गठबंधन है।
विपक्षी दलों को मोर्चा में पहाड़ी जिले सक्रिय ऑटोनामस स्टेट डिमांड कमिटी को शामिल करने का प्रयास कर रहे हैं। इन दो गठबंधन का सीधा मुकाबला भाजपा अगुवाई वाले गठबंधन से होगा। बदले राजनीतिक समीकरण की वजह से अब भाजपा गठबंधन के लिए स्थिति आसान नहीं रही। निचले असम तथा बरका घाटी में उसका सीधा मुकाबला कांग्रेस गठबंधन से होगा तो ऊपरी असम में क्षेत्रीय दलों के गठबंधन से मुकाबला करना होगा।
बोडोलैंड में प्रमोद बोड़ो के नेतृत्व वाले यूनाइटेड पीपुल्स प्रोग्रेसिव (लिबरेशन) के साथ भाजपा नेतृत्व ने गठबंधन करने का मन बना लिया है। बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद की सत्ता में भाजपा यूपीपीएल के साथ है। स्वाभाविक तौर पर हाग्रामा के पास कांग्रेस गठबंधन या क्षेत्रीय दलों के मोर्चा के साथ चुनाव लड़ने के अलावा और कोई विकल्प भी नहीं बचा है। ऐसे में वे क्षेत्रीय दलों के गठबंधन की जगह कांग्रेस गठबंधन के साथ जाना ज्यादा पसंद करेंगे, क्योंकि बोडोलैंड के अल्पसंख्यक मतदाताओं के समर्थन की उम्मीद हाग्रामा को है।
असमिया मतदाता शायद ही बीपीएफ को वोट दें। ब्रह्मपुत्र तथा बराक घाटी में होने वाले घाटं की भरपाई के लिए भाजपा को बोडोलैंड की 12 में से अधिकतम सीटों पर कब्जा करना होगा। भाजपा गठबंधन 100 से अधिक सीटों को जीतने के लक्ष्य पर आगे बढ़ रही है। लेकिन बदले राजनीतिक समीकरण में उसे अपनी मौजूदा संख्या को बनाए रखना ही चुनौतीपूर्ण कार्य है।
भाजपा को अपनी सीटों को बचाने के लिए साथ-साथ अगप के कब्जे वाली सीटों को बचाना होगा, क्योंकि अगप की हार का असर भाजपा गठबंधन को होगा, इसलिए भाजपा नेतृत्व अपनी सीटों के साथ अगप की सीटों पर भी ध्यान दे रहे हैं। इसमें दो राय नहीं है कि अभी भी अल्पसंख्यक इलाके में अगप का प्रभाव कुछ हद तक बरकरार है।
भाजपा के साथ दोस्ती के बावजूद अगप ने अपने धर्मनिपरेक्ष चरित्र को बनाए रखा है, इसलिए संभव है कि अगप को निचले असम में ज्यादा सीटें दी जाएं। क्षेत्रीय दलों के बीच भी सीटों का बंटवारा भी आसान नहीं है। पहले लग रहा था कि भाजपा गठबंधन आराम में सत्ता में वापसी में कर लेगा, लेकिन बदले राजनीतिक समीकरण में विधानसभा का चुनाव दिलचस्प होगा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।