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Art Exhibition: बहुत कुछ नया कर रहे हैं नई पीढ़ी के कलाकार, कला जगत के दिग्गज भी हो रहे दंग

Fri, 18 Nov 2022 03:44 PM IST
Atul sinha अतुल सिन्हा
Updated Fri, 18 Nov 2022 03:44 PM IST
सार

Art Exhibition: ललित कला अकादमी में पिछले दिनों दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट के सौ से ज्यादा छात्र छात्राओं की 300 से ज्यादा कलाकृतियों, मूर्तिशिल्प और कला में किए जा रहे कुछ नए प्रयोगों की अद्भुत प्रदर्शनी लगी। आम तौर पर हर साल ये कॉलेज अपने छात्रों के कामों को बड़े पैमाने पर प्रदर्शित करता है, लेकिन कोरोना काल की त्रासदी के दो साल बाद इन ऐसी कोई प्रदर्शनी इतने बड़े पैमाने पर लगाई गई...

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Art Exhibition: Artists of the new generation are doing many new things
Art Exhibition - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कला की दुनिया में तमाम नए प्रयोग होते रहते हैं और खासकर युवा कलाकारों की दृष्टि पहले से कहीं ज्यादा व्यापक हो रही है। बदलते हुए सामाजिक परिदृष्य को गहराई से देखना, समझना और उसे अपने तमाम कलारूपों में उतार देना आज के कलाकारों के लिए चुनौती भी है और इसे लेकर उनमें सबसे ज्यादा दिलचस्पी भी। आम तौर पर देश के तमाम कला संस्थानों में जिस तरह नए कलाकारों को जाने-माने और वरिष्ठ कलाकारों से सीखने समझने का मौका मिलता है, दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट में वैसा नहीं होता। यहां बच्चों, युवाओं और हर वर्ग के लोगों के लिए कला को व्यावहारिक तौर पर सीखने समझने का मौका मिलता है और यहीं से सीखकर निकले कलाकार यहां के लिए एक पूंजी की तरह होते हैं और नई प्रतिभाओं को संवारने का काम करते हैं।

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Art Exhibition: Artists of the new generation are doing many new things
Art Exhibition - फोटो : Amar Ujala

ललित कला अकादमी में पिछले दिनों दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट के सौ से ज्यादा छात्र छात्राओं की 300 से ज्यादा कलाकृतियों, मूर्तिशिल्प और कला में किए जा रहे कुछ नए प्रयोगों की अद्भुत प्रदर्शनी लगी। आम तौर पर हर साल ये कॉलेज अपने छात्रों के कामों को बड़े पैमाने पर प्रदर्शित करता है, लेकिन कोरोना काल की त्रासदी के दो साल बाद इन ऐसी कोई प्रदर्शनी इतने बड़े पैमाने पर लगाई गई। एक हफ्ते तक चली इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के महानिदेशक अद्वैत गणनायक, जाने माने मूर्तिकार पद्मश्री राम सुतार, जाने माने कलाकार अजय समीर, अमित दत्त, अनिल रामसुतार जैसे तमाम कलाकारों के अलावा दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट के संस्थापक, महानिदेशक और खुद एक बड़े कलाकार अश्विनी कुमार पृथ्वीवासी ने। मुख्य अतिथि और रूसी दूतावास के सांस्कृतिक विभाग के प्रमुख यूलिया अरायवा ने कॉलेज के छात्रों के बेहतरीन काम की जमकर तारीफ की।  

नए कलाकारों ने जिस तरह इंस्टॉलेशन में भी नए-नए प्रयोग किए, वह मन के भीतर कुछ सवाल भी खड़े करते हैं और आज के दौर की सोच के साथ सामाजिक स्थितियों पर प्रहार भी करते हैं। जिस तरह रिक्शा चलाने वालों या कामगारों को, मशीन से सिलाई करने वालों को समाज निचले तबके का मानकर हेय दृष्टि से देखता है, कलाकारों ने इन प्रतीकों को सिल्वर और गोल्डन रूपों में पेश कर उनके बारे में सामाजिक सोच को बढ़ाने की कोशिश की।

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Art Exhibition: Artists of the new generation are doing many new things
Art Exhibition - फोटो : Amar Ujala

आज के दौर में मीडिया की हालत पर भी इन कलाकारों ने बेहद गहराई से सांकेतिक प्रहार किया है और मरती हुई मीडिया को एक नरकंकाल के तौर पर दिखाया है। अखबारों में जिस तरह अब रचनात्मक कुछ नहीं होता और पत्रकारिता केवल बयानबाजी और अपराध की घटनाओं के साथ साथ बेहद निचले स्तर तक पहुंच गई है, छात्रों ने अपनी कलादृष्टि से उसे एक आकर्षक प्रतीक रूप में पेश करने की कोशिश की है। इस्टॉलेशन के ये अलग अलग प्रकार और उनके रेफ्लेक्शन को बड़े बड़े शीशों के जरिये दिखाया गया है। इन कलाकारों ने एक्रेलिक, वाटर कलर, पेंसिल स्केच के अलावा तमाम विधाओं के जरिए अपने काम को एक व्यापक आयाम देने की कोशिश की है।

बेशक ये प्रदर्शनी देखना एक नए अनुभव से गुजरने जैसा है और उस उम्मीद को आकार लेते हुए देखना भी है जो आज के दौर में कला को समाज का एक जरूरी हिस्सा मानता है। इस हुनर को संवारने का काम पिछले करीब ढाई दशकों से कर रहे दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट के संस्थापक पृथ्वीवासी बताते हैं कि अब तक करीब 10 हजार कलाकारों को एक नई चेतना और दृष्टि के साथ आगे बढ़ते हुए देखना उन्हें दिल से सुकून पहुंचाता है और कला के जरिए अपने समाज को कुछ दे कर उन्हें अच्छा लगता है। उनका मकसद सिर्फ खुद को कला की दुनिया में स्थापित और प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि नए कलाकारों की एक पूरी पीढ़ी को नई सामाजिक और कलात्मक दृष्टि से विकसित करना है।

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