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शांत द्वीप की मधुर धुन: अंडमान शामा जिसकी मधुर आवाज चीरती है जंगल के सन्नाटों को
सार
शामा के पसंदीदा ठिकानों में शामिल हैं घने सदाबहार वन, झाड़ियां और बगीचे, इन्हे मुख्यत: उन जगहों पर रहना पसंद है जहां पास में पानी हो जैसे की घाटियों में घनी झाड़ियां।
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अंडमान शामा
- फोटो : श्रीराम रेड्डी (Sriram Reddy)
विस्तार
शहरों की भीड़ भाड़ से दूर किसी टापू पर छुट्टियां मनाने का दिल तो हम सभी का करता है पर क्या आप इन टापुओं पर रहने वाले अद्वितीय पशु पक्षियों से वाकिफ हैं जो सिर्फ भारत के इन्हीं द्वीपों पर पाए जाते हैं? इसी तरह का एक ऐसा पक्षी है जो सिर्फ अंडमान के द्वीप पर ही पाया जाता है।
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यह अंडमान के घने वनों में छिपा एक रहस्यमयी गायक है, जिसकी मधुर आवाज जंगल के सन्नाटों को चीरती हुई हमारे कानों में गूंजती है। इसकी आवाज सुनने मात्र से मानो ऐसा प्रतीत होता है जैसे वन खुद गीत गा रहे हो। ये है भारत का गायन पक्षी "अंडमान शामा" जो केवल अंडमान में ही पाया जाता है।
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रॉबिन पक्षी जैसा दिखने वाला शामा अपनी लंबी पूंछ, चमकदार काले पंखों और सफेद पेट के कारण न केवल देखने में बेहद खूबसूरत है, बल्कि सुनने में भी उतना ही मनमोहक व सुरीला है जो की और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाए जाने वाले के व्हाइट-रंप्ड शामा से कुछ हद तक मेल खाता है, लेकिन इसकी खास रंगत और गायन शैली इसे बाकी शामा प्रजाति के पक्षियों से अलग बनाती है ।
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शामा के पसंदीदा ठिकानों में शामिल हैं घने सदाबहार वन, झाड़ियां और बगीचे, इन्हे मुख्यत: उन जगहों पर रहना पसंद है जहां पास में पानी हो जैसे की घाटियों में घनी झाड़ियां। यह अपना घोंसला घास, बांस की पत्तियों, जड़ों और टहनियों से बनती है, जो की ज़मीन से लगभग 3 मीटर ऊंचाई पर पेड़ या झाड़ी में छिपा होता है जिसके कारण इन्हें आसानी से देख पाना मुश्किल होता है।
इसके गान की मधुरता ही इसे एक अद्वितीय गायन पक्षी बनाती है और यही वजह है कि यह पक्षी पक्षी प्रेमियों के बीच खासा लोकप्रिय है। इस पक्षी को स्थानीय भाषा यानी की अंडमान में “थो पनाइयतु” (Tho panaaeytu) और बगसुयान (Bagsuyan) के नाम से जाना जाता है।
अगर इसके अंडो के बारे में बात करे तो मादा एक बार में दो से तीन हल्के हरे रंग के अंडे देती है, जिन पर बैंगनी-भूरे, चॉकलेट भूरे या स्लेटी रंग की धारियां होती हैं, जो अंडों के ऊपरी हिस्से पर अधिक सघन होती हैं।
मादा की तुलना में नर अंडमान शामा का पूरा शरीर सिर, गला, गर्दन, पीठ और लंबी पूंछ तक काले रंग का होता है साथ ही पेट पर सफेद और बाजुओं में गेरुए रंग की झलक होती है। मादा शामा देखने में थोड़ी कम चमकदार होती है, खासकर गले और पीठ पर, और उसकी पूंछ भी कुछ छोटी होती है।
नर-मादा में बहुत अधिक अंतर नहीं होता, और दोनों लगभग 21 से 25 सेंटीमीटर लंबे होते हैं, जिसमें 12 सेंटीमीटर की पूंछ शामिल है। इनका मुख्य आहार कीड़े-मकोड़े और उनका लार्वा होते हैं।
हालांकिं यह पक्षी केवल अंडमान द्वीप समूह तक ही सीमित है, फिर भी यह वहां अच्छी संख्या में पाया जाता है। आईयुसीएन (IUCN) की रेड लिस्ट के अनुसार अंडमान शामा अभी 'लीस्ट कंसर्न' लिस्ट में शामिल है, यानी की फिलहाल यह वैश्विक रूप से संकटग्रस्त नहीं है।
फिर भी इसकी सटीक जनसंख्या अभी तक अज्ञात है, और इस पर वैज्ञानिक नजर बनाए रखना आवश्यक है ताकि यह अनमोल जीव आने वाले समय में भी अपनी धुनों से जंगल को जीवंत बनाए रखे। यदि इसकी आबादी को कोई खतरा होता है, तो यह प्रजाति वैश्विक रूप से विलुप्त हो सकती है।
इसीलिए इसका संरक्षण नितांत आवश्यक है। अंडमान शामा का संरक्षण केवल एक पक्षी की रक्षा नहीं है, बल्कि यह पूरे वन्य जीवन, पारिस्थितिकी, सांस्कृतिक धरोहर और स्थानीय अर्थव्यवस्था के संरक्षण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से हम अंडमान की जैविक धरोहर को अगली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।