AI समय: कहीं आपका डॉक्टर चैटजीपीटी तो नहीं; मरीज और डॉक्टर के भरोसेमंद रिश्ते में दरार भी डाल सकती है तकनीक
2026 की चिकित्सा व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आज मरीज व डॉक्टर, दोनों ही नियमित रूप से एआई का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन एक-दूसरे को बताने से कतराते हैं।लैंग्वेज मॉडल्स की अपने उपयोगकर्ताओं को खुश करने की फितरत स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में खतरनाक साबित हो सकती है।
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एक एआई शोधकर्ता होने के नाते मेरा यह मानना है कि सही ढंग से इस्तेमाल किए जाने पर ये मॉडल्स मरीजों को सशक्त बनाने वाले क्रांतिकारी हथियार साबित हो सकते हैं। पर, यह तकनीक मरीज और डॉक्टर के भरोसेमंद रिश्ते में दरार भी डाल सकती है, या फिर लोगों को मानसिक तनाव व चिंता की गहरी खाई में धकेल सकती है। ऐसे में, मरीजों के लिए एआई का सबसे अच्छा उपयोग यह है कि वे इसके जरिये डॉक्टर से अपनी मुलाकात को अधिक प्रभावी बना सकते हैं। मरीजों की पहुंच उनकी मेडिकल रिपोर्ट तक तो होती है, पर अधिकांश लोग उन्हें कभी खोलकर भी नहीं देखते। जो देखते भी हैं, उनके लिए भारी-भरकम चिकित्सकीय शब्दावली को समझना या काम की बात निकालना मुश्किल होता है। इससे भी बुरा तब होता है, जब किसी पुरानी गलत रिपोर्ट या खारिज की जा चुकी बीमारी की जानकारी इन नोट्स में मौजूद रहती है, जिसे डॉक्टर अपनी भाषा में ‘चार्ट लोर’ कहते हैं। ऐसे मामलों में एआई मददगार हो सकता है।
बेशक, एआई उपकरण विशेषज्ञ स्तर की चिकित्सकीय सलाह देने में सक्षम हैं, पर उनकी सटीकता इस बात पर निर्भर करती है कि उनके पास मरीज की सेहत की पूरी तस्वीर है या नहीं। अपने लक्षणों को सबसे प्रभावी ढंग से समझाने के लिए, आप चैटबॉट से कह सकते हैं कि मेरा इंटरव्यू बिल्कुल एक डॉक्टर की तरह लो। सवाल-जवाब का यह सिलसिला न केवल आपकी परेशानी को स्पष्ट रूप से बयां करने में मदद करेगा, बल्कि मन में डर पैदा करने वाली स्थितियों को भी खत्म करेगा।
लैंग्वेज मॉडल्स की फितरत अपने उपयोगकर्ताओं को खुश करने की होती है, जो स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। इसे ‘साइबरकोंड्रिया’ कहते हैं, जिसमें इंटरनेट पर सामान्य या हल्के लक्षणों की जानकारी खोजते-खोजते व्यक्ति डरावनी और गंभीर बीमारियों की संभावनाओं के जाल में फंस जाता है। चूंकि, एआई अचेतन इच्छाओं को पकड़ने में माहिर होते हैं, इसलिए वे समझ जाते हैं कि कौन-सी जानकारी आपको सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही है। वे इसे आपकी पसंद मान लेते हैं और वैसी ही बातें परोसने लगते हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है, जैसे सोशल मीडिया एल्गोरिदम आपको ‘डूमस्क्रॉलिंग’ (नकारात्मक खबरें पढ़ते रहना) के लिए उकसाते हैं। इससे बचने के लिए एआई से सवाल पूछते समय अपना मकसद साफ तौर पर बताना चाहिए। हालांकि, अगर एआई से बातचीत आपकी घबराहट या बेचैनी बढ़ा रही है, तो समझ लीजिए कि एआई अपनी चापलूसी वाली फितरत दिखा रहा है। ऐसे में, बिना देर किए सीधे अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
इसमें कोई शक नहीं कि एआई मॉडल्स भविष्य में बेहतर होंगे, पर मैं यही सलाह देता हूं कि अपनी संवेदनशील मेडिकल जानकारी बिना काट-छांट के किसी मशीन को सौंपने से पहले निजता के खतरों पर भी गंभीरता से विचार जरूर करें। एआई द्वारा दी गई राय आपके और डॉक्टर के बीच संवाद की शुरुआत होनी चाहिए, न कि इलाज का अंतिम फैसला। एआई बीमारी की पहचान में तो मददगार हो सकता है, पर इलाज की योजना के लिए इस पर भरोसा करना जोखिम भरा है, क्योंकि यहां अक्सर ये मात खा जाते हैं। पिछले साल एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन में डॉक्टरों ने सोडियम ब्रोमाइड पॉइजनिंग का एक चौंकाने वाला मामला दर्ज किया। एक शख्स ने साधारण नमक के विकल्प के तौर पर अपनी डाइट सुधारने के लिए चैटजीपीटी से सलाह ली थी। डॉक्टरों ने पाया कि वास्तव में चैटजीपीटी ने उसे सोडियम ब्रोमाइड को नमक के विकल्प के रूप में सुझाया था।
2026 की चिकित्सा व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आज मरीज व डॉक्टर, दोनों ही नियमित रूप से एआई का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन एक-दूसरे को बताने से कतराते हैं। पिछले साल प्रकाशित एक सर्वे के अनुसार, लगभग 66 प्रतिशत डॉक्टरों ने कबूल किया कि वे 2024 से ही अपने अभ्यास में एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें मैं खुद भी शामिल हूं। मेरा मानना है कि एआई के इस्तेमाल को लेकर एक-दूसरे के प्रति ईमानदार रहना मरीज व डॉक्टर, दोनों के लिए बेहद जरूरी है।
बफर
यह एक एआई-समर्थित सोशल मीडिया मैनेजमेंट टूल है, जिसकी मदद से व्यक्ति, व्यवसाय और कंटेंट क्रिएटर अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को आसानी से संभाल सकते हैं। इस टूल के जरिये उपयोगकर्ता फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), लिंक्डइन और पिंटरेस्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर पोस्ट पहले से तैयार करके निर्धारित समय पर अपने-आप प्रकाशित कर सकते हैं, जिससे समय की बचत होती है और नियमितता बनी रहती है। इसका एनालिटिक्स फीचर बताता है कि आपकी पोस्ट पर कितने लाइक्स, कमेंट और शेयर मिले, किस समय पोस्ट करने पर ज्यादा एंगेजमेंट मिलता है और कौन-सा कंटेंट दर्शकों को अधिक पसंद आता है।