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अफगानिस्तान में तालिबान: भारत में प्रशिक्षणरत् अफगानी सैन्य अधिकारी और छात्र, आखिर कैसा होगा भविष्य?

Wed, 18 Aug 2021 10:12 AM IST
Jay singh Rawat जयसिंह रावत
Updated Wed, 18 Aug 2021 10:12 AM IST
सार

अफगानिस्तान के अलावा भी भारत दशकों से भूटान, श्रीलंका, तजाकिस्तान, मालदीव, नेपाल एवं वियतनाम आदि 18 मित्र देशों की सेनाओं के युवा अधिकारियों को प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराता है।

बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग के अलावा भारत अफगानिस्तान के सैन्य अधिकारियों को समय-समय पर विभिन्न स्थानों पर विशिष्ट सैन्य प्रशिक्षण भी कराता है ताकि उनका प्रोफेशनल स्तर ऊंचा उठ सके। फिलहाल अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे से भारत में सैैैन्य प्रशिक्षण हासिल कर रहे अफगान युवाओं का भविष्य अधर में है।

इस पूरे मामलेे पर अपना नजरिया रख रहे हैं उत्तराखंड से वरिष्ठ पत्रकार जयसिंह रावत!  

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afghanistan crisis and taliban future of afghanistan soldiers in indian military academy in dehradun
जब राजनीतिक नेतृत्व ही भगौड़ा हो गया हो तो फिर मजबूत से मजबूत सेना भी तास के पत्तों की तरह बिखर जाती है। - फोटो : social media

विस्तार

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे और वहां की सरकारी सेना के ध्वस्त हो जाने के बाद भारत में सैन्य प्रशिक्षण पा रहे डेढ़ सौ से अधिक अफगान अधिकारियों और जवानों का भविष्य अधर में लटक गया है। इनमें से सर्वाधिक युवा देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी से प्रशिक्षण ले रहे हैं।

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दरअसल, इस अकादमी से हर छह महीने में लगभग 40 अफगानी युवा अधिकारी पास आउट हो कर अपनी सेना का नेतृत्व करते हैं। चूंकि अमेरिका के साथ ही भारत भी एक सशक्त और अपने बलबूते पर हर चुनौती का मुकाबला करने में सक्षम अफगानी सेना को तैयार करने में जुटे हैं। लेकिन जब राजनीतिक नेतृत्व ही भगौड़ा हो गया हो तो फिर मजबूत से मजबूत सेना भी तास के पत्तों की तरह बिखर जाती है।

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भारत से 18 देशों को मिलता है सैन्य नेतृत्व

अफगानिस्तान को एक विकसित और प्रगतिशील राष्ट्र बनाने के विभिन्न प्रयासों के साथ ही वहां की सेना को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से भारत अपने यहां भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) देहरादून, ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) चेन्नई, नेशनल डिफेंस अकादमी, खड़कवासला (पुणे) आदि में प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराता है।

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अफगानिस्तान के अलावा भी भारत दशकों से भूटान, श्रीलंका, तजाकिस्तान, मालदीव, नेपाल एवं वियतनाम आदि 18 मित्र देशों की सेनाओं के युवा अधिकारियों को प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराता है। बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग के अलावा भारत अफगानिस्तान के सैन्य अधिकारियों को समय-समय पर विभिन्न स्थानों पर विशिष्ट सैन्य प्रशिक्षण भी कराता है ताकि उनका प्रोफेशनल स्तर ऊंचा उठ सके।

 


आइएमए देहरादून से मिलता है अफगान सेना को नेतृत्व

अफगानिस्तान समेत विभिन्न मित्र देशों के लिए सबसे बड़ी सैन्य प्रशिक्षण सुविधा देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में उपलब्ध है। यहां देशी और विदेशी, सभी जैटलमैन कैडेट एक साथ प्रशिक्षण लेने के साथ ही एक साथ ही ग्रीष्म और शीतकालीन, दो दीक्षांत परेडों में पासआउट होेते हैं। यहां एनडीए से आने वाले कैडेटों के लिए एक साल और सीधे प्रवेश करने वालों के लिए 18 महीने का कठोर प्रशिक्षण दिया जाता है।

यद्यपि आइएमए की सभी पासिंग आउट या दीक्षान्त परेडों का रिकॉर्ड फिलहाल उपलब्ध नहीं हो सका, फिर भी अकादमी द्वारा जारी पिछली परेडों की कुछ विज्ञप्तियों के अनुसार दिसंबर 2014 की शीतकालीन परेड में अफगानिस्तान के 44 जैंटलमैन कैडेट अकादमी से प्रशिक्षित हो कर पासआउट हुए।

इसी प्रकार जून 2015 की ग्रीष्मकालीन परेड में भी 44, दिसंबर 2018 में 49, दिसंबर 2020 में 41 और जून 2021 की दीक्षांत परेड में 43 युवा अफगानी अधिकारी अकादमी से पास आउट हुए।

इस प्रकार देखा जाए तो इस अकादमी से हरेक 6 महीने में औसतन 40 युवा अफगानी सैन्य अधिकारी कठोर प्रशिक्षण प्राप्त कर पास आउट होते हैं। आइएमएम के अलावा भारत की इलीट सैन्य प्रशिक्षण अकादमी एनडीए खड़कवासला से भी अफगानी युवा सैन्य प्रशिक्षण के साथ ही ग्रेजुएशन प्राप्त करते हैं।

afghanistan crisis and taliban future of afghanistan soldiers in indian military academy in dehradun
इन युवाओं की चिंता का सबसे बड़ा कारण तालिबान का अफगानिस्तान की सरकारी सेना के प्रति नफरत और उनका क्रूरतम व्यवहार है। - फोटो : BBC

अपने परिवारों के लिए चिंतित हैं अफगानी सैनिक

भारत में सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे इन युवा सैन्य अधिकारियों का भविष्य तो अधर में लटक ही गया, लेकिन अफगानिस्तान में उनके परिवारों की खैरियत को लेकर उनकी बेचैनी भी बढ़ा दी है। उनकी चिंता का सबसे बड़ा कारण तालिबान का अफगानिस्तान की सरकारी सेना के प्रति नफरत और उनका क्रूरतम व्यवहार है।
 

अब इनका भविष्य भारत सरकार के अगले कदम पर निर्भर है। अगर उनका प्रशिक्षण जारी रखा जाता है तो प्रशिक्षण पूरा होने पर भी उनका भविष्य अधर में है।


अफगानियों का आतंकवादी विरोधी प्रशिक्षण भी भारत में

भारत ने अफगानिस्तान की सेना को सशक्त बनाने के लिए 4 एमआइ-25 सशस्त्र हेलीकॉप्टर एवं 3 चीता हेलीकॉप्टर सहित काफी आधुनिक सैन्य साजो सामान दिया है। विगत् कई वर्षों से भारत अफगानिस्तान के सशस्त्र बलों को आतंकवाद विरोधी प्रशिक्षण भी देता रहा है।

अफगानी युवा अधिकारियों को इन्फेंट्री स्कूल में ‘यंग ऑफिसर्स कोर्स और मिजोरम के वैरेंग्टे स्थित संस्थान में जंगल वॉरफेयर और आतंकवाद विरोधी प्रशिक्षण भी देता रहा है।

ऐसे विशिष्ट संस्थानों में प्रति वर्ष लगभग 700 से लेकर 800 तक अफगानी सैन्यकर्मी प्रशिक्षण पाते रहे हैं। पिछले ही महीने अफगानिस्तान के सेना प्रमुख जनरल वली मोहम्मद अहमदजई का भारत के साथ और अधिक सैन्य सहयोग बढ़ाने के इरादे से भारत आने का कार्यक्रम था, लेकिन तालिबानियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए उन्हें अपना दौरा स्थगित करना पड़ा।


अफगानिस्तान की सुरक्षा पर अमेरिका ने खर्चे 83 अरब डाॅलर

भारत के साथ ही अमेरिका ने भी अफगानी सेना का मजबूत, आत्मनिर्भर और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करने पर अरबों डॉलर खर्च कर रखे हैं।
 

न्यूयॉर्क टाइम्स में 13 अगस्त को छपी थाॅमस जिब्बन, फहीम अबेद और शैरिफ हसन की साझा रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने पिछले दो दशकों में अफगानिस्तान की सुरक्षा के लिए हथियारों, अत्याधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षण पर 83 अरब डाॅलर से अधिक राशि खर्च कर डाली। लेकिन वहां के राजनीतिक नेतृत्व की कमजोरी के कारण अफगानी सैनिकों ने तालिबानियों के आगे हथियार डाल दिए, जिस कारण अरबों डॉलर मूल्य के अत्याधुनिक हथियार भी तालिबान के हाथ लग गए।


वहां लगभग 3 लाख की सरकारी सेना लड़ती भी तो किसके लिए? वहां सन् 2001 से लेकर अब तक 60 हजार से अधिक अफगानी सैनिक तालिबान से लड़ते हुए मारे गए। अफगानी राजनीतिक नेतृत्व की कमजोरी के कारण भारत के प्रयास भी बेकार गए।

भारत में अफगानी छात्रों का भविष्य भी अधर में

सैन्य प्रशिक्षुओं की भांति भारत में स्काॅलरशिप के आधार पर पढ़ रहे छात्रों के समक्ष भी गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। भारत में इस तरह के लगभग 2200 छात्र बताए जा रहे हैं। हालांकि उनकी देखभाल की जिम्मेदारी इंडियन काउंसिल फाॅर कल्चरल रिलेसन्श की है, फिर भी उनके देश में मची भगदड़ के कारण उनका भी अपने परिजनों को लेकर चिंतित होना स्वाभाविक ही है।

इनमें से कई छात्रों की शिक्षा की अवधि पूर्ण होने वाली है। ऐसे छात्रों को वजीफा नहीं मिलना है। कई छात्रों की वीजा की अवधि भी पूरी होने वाली है, इसलिए वे भी भारत सरकार के अगले कदम पर निर्भर हैं।

छात्रों के अलावा विभिन्न अन्य क्षेत्रों में आपसी सहयोग के अंतर्गत कार्यरत या प्रशिणरत अफगानी विशेषज्ञों का भविष्य भी अधर में लटका हुआ है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

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