{"_id":"577a7b9d4f1c1b72027fa0a5","slug":"transfer-controversy-ut-employee-transfer-central-administrative-tribunal-chandigarh","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूटी के 348 कर्मियों की ट्रांसफर का मामला, कैट से नहीं मिली कोई राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूटी के 348 कर्मियों की ट्रांसफर का मामला, कैट से नहीं मिली कोई राहत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 05 Jul 2016 09:19 AM IST
विज्ञापन
अदालत का फैसला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूटी प्रशासन की ओर से ट्रांसफर किए गए 348 अधिकारियों और कर्मचारियों को कैट से अभी तक कोई राहत नहीं मिल पाई है। याचिका दायर करने वाले कर्मियों को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में सोमवार को भी स्टे नहीं मिल पाया। यूटी प्रशासन ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है। इस पर ट्रिब्यूनल ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए 4 अगस्त तक का समय दिया है।
बता दें कि 10 मई को प्रशासन ने इंटर डिपार्टमेंटल ट्रांसफर पॉलिसी के तहत 348 कर्मियों का ट्रांसफर किया था। इनमें सुपरिंटेंडेंट, सीनियर असिस्टेंट, सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर, जूनियर असिस्टेंट/क्लर्क और स्टेनो टाइपिस्ट शामिल थे। सबसे ज्यादा ट्रांसफर जीएमसीएच-32, डीसी-एस्टेट ऑफिस, सीटीयू और यूटी सचिवालय में हुए हैं। इन ट्रांसफर ऑर्डर के तहत स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट्स और आर्किटेक्चर कॉलेज से भी कई कर्मचारी इधर-उधर हुए थे।
हालांकि कुछ अधिकारियों के अनुरोध पर 66 कर्मियों का ट्रांसफर रोक दिया गया था। ट्रांसफर के दो दिन बाद ही करीब 50 कर्मचारियों ने कैट में याचिका दायर कर ट्रांसफर आर्डर पर स्टे लगाने की अपील की थी। इस पर प्रशासन की ओर से नोडल आफिसर ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि ये ट्रांसफर विभागों में पारदर्शिता और कार्यदक्षता बढ़ाने के लिए की गई है। कई कर्मचारी वर्षों से एक ही सीट पर जमे हुए हैं, इससे सरकारी कामकाज पर असर पड़ता है।
विज्ञापन
वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए एडवोकेट ने कहा कि प्रशासन ने ‘पिक एंड चूज’ पॉलिसी के तहत कर्मचारियों के ट्रांसफर किए हैं। प्रशासन ने 66 ट्रांसफर रोक दिए, जबकि अन्य को वापस नहीं लिया। वहीं कर्मचारियों के अनुसार, बिना उन्हें पूछे किसी दूसरे अलग तरह के डिपार्टमेंट में ट्रांसफर नहीं कर सकते। इस पर ट्रिब्यूनल ने प्रशासन को जवाब दाखिल करने के लिए 4 अगस्त तक का समय दिया है।
विज्ञापन
बता दें कि 10 मई को प्रशासन ने इंटर डिपार्टमेंटल ट्रांसफर पॉलिसी के तहत 348 कर्मियों का ट्रांसफर किया था। इनमें सुपरिंटेंडेंट, सीनियर असिस्टेंट, सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर, जूनियर असिस्टेंट/क्लर्क और स्टेनो टाइपिस्ट शामिल थे। सबसे ज्यादा ट्रांसफर जीएमसीएच-32, डीसी-एस्टेट ऑफिस, सीटीयू और यूटी सचिवालय में हुए हैं। इन ट्रांसफर ऑर्डर के तहत स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट्स और आर्किटेक्चर कॉलेज से भी कई कर्मचारी इधर-उधर हुए थे।
विज्ञापन
हालांकि कुछ अधिकारियों के अनुरोध पर 66 कर्मियों का ट्रांसफर रोक दिया गया था। ट्रांसफर के दो दिन बाद ही करीब 50 कर्मचारियों ने कैट में याचिका दायर कर ट्रांसफर आर्डर पर स्टे लगाने की अपील की थी। इस पर प्रशासन की ओर से नोडल आफिसर ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि ये ट्रांसफर विभागों में पारदर्शिता और कार्यदक्षता बढ़ाने के लिए की गई है। कई कर्मचारी वर्षों से एक ही सीट पर जमे हुए हैं, इससे सरकारी कामकाज पर असर पड़ता है।
विज्ञापन
वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए एडवोकेट ने कहा कि प्रशासन ने ‘पिक एंड चूज’ पॉलिसी के तहत कर्मचारियों के ट्रांसफर किए हैं। प्रशासन ने 66 ट्रांसफर रोक दिए, जबकि अन्य को वापस नहीं लिया। वहीं कर्मचारियों के अनुसार, बिना उन्हें पूछे किसी दूसरे अलग तरह के डिपार्टमेंट में ट्रांसफर नहीं कर सकते। इस पर ट्रिब्यूनल ने प्रशासन को जवाब दाखिल करने के लिए 4 अगस्त तक का समय दिया है।