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1971 के युद्ध में इस्तेमाल हुआ टी-55 टैंक बनेगा शहीद स्मारक की शान
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फोटो-54: गांव नूना माजरा के शहीदी स्मारक में स्थापित किया गया भारतीय सेना का टी-55 टैंक। संवाद
कृष्ण वशिष्ठ
बहादुरगढ़। देश की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों का शौर्य अब झज्जर जिले के गांव नूना माजरा में आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। शनिवार को गांव में उड़ान सेवा समिति की ओर से शहीद स्मारक और युद्ध में इस्तेमाल किए गए टी-55 टैंक का अनावरण किया जाएगा।
भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल विनीत गौड़ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस अवसर पर शहीद परिवारों को सम्मानित करने के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
शहीदों की याद में बनाए गए इस स्मारक की विशेषता भारतीय सेना का टी-55 युद्धक टैंक है जिसे पुणे से जारी किया गया है। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में इस्तेमाल हो चुका यह टैंक अब नूना माजरा की शोभा बढ़ाएगा। स्मारक में उन वीर सपूतों की शहादत और शौर्य को संजोया गया है जिन्होंने अलग-अलग युद्धों और सैन्य अभियानों में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
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कर्नल अनिल जून ने बताया कि शहीद स्मारक का उद्देश्य केवल वीर सैनिकों की यादों को संजोना नहीं, बल्कि उनके परिवारों के त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण को सम्मान देना भी है।
किसी ने विश्व युद्ध तो किसी ने कारगिल में दिया बलिदान:
उड़ान सेवा समिति के पदाधिकारी कर्नल अनिल जून ने बताया कि हमारे तीनों गांव से नौ लोग शहीद हुए हैं। इनमें नूना माजरा के सिपाही मुंशी राम ने 1 फरवरी 1942 को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान शहादत दी। इसी गांव के मेजर रिसाल सिंह जून ने 21 जून 1944 को म्यांमार अभियान के दौरान शहीद हुए थे। वर्ष 1962 में सिपाही रघुवीर सिंह ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए बलिदान दिया। इसके बाद वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में नायब सूबेदार उमेद सिंह और सिपाही राज सिंह ने 10 दिसंबर 1971 को शहादत दी।
ऑपरेशन विजय और रक्षक में दिखाई वीरता:
गांव के पूर्व सरपंच वीरेंद्र ने बताया कि देश की रक्षा में नूना माजरा और आसपास के गांवों के सैनिकों का योगदान भी स्मारक में दर्ज है। देशलपुर गांव के हवलदार जय प्रकाश जून 8 मई 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन विजय में द्रास सेक्टर में शहीद हुए। लौवा खुर्द गांव के ग्रेनेडियर राकेश कुमार ने 16 मार्च 2002 को जम्मू-कश्मीर के राजौरी क्षेत्र में अचानक हुई गोलीबारी का बहादुरी से मुकाबला करते हुए प्राण न्योछावर किए। नूना माजरा के सिपाही राजेश कुमार 3 सितंबर 2001 को जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक के दौरान शहीद हुए। स्मारक में नूना माजरा के लांस दफादार सरदारा सिंह का नाम भी शामिल है।
फोटो-54: गांव नूना माजरा के शहीदी स्मारक में स्थापित किया गया भारतीय सेना का टी-55 टैंक। संवाद
फोटो-55: गांव नूना माजरा में बनाया गया शहीदी स्मारक। संवाद
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बहादुरगढ़। देश की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों का शौर्य अब झज्जर जिले के गांव नूना माजरा में आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। शनिवार को गांव में उड़ान सेवा समिति की ओर से शहीद स्मारक और युद्ध में इस्तेमाल किए गए टी-55 टैंक का अनावरण किया जाएगा।
भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल विनीत गौड़ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस अवसर पर शहीद परिवारों को सम्मानित करने के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
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शहीदों की याद में बनाए गए इस स्मारक की विशेषता भारतीय सेना का टी-55 युद्धक टैंक है जिसे पुणे से जारी किया गया है। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में इस्तेमाल हो चुका यह टैंक अब नूना माजरा की शोभा बढ़ाएगा। स्मारक में उन वीर सपूतों की शहादत और शौर्य को संजोया गया है जिन्होंने अलग-अलग युद्धों और सैन्य अभियानों में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
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कर्नल अनिल जून ने बताया कि शहीद स्मारक का उद्देश्य केवल वीर सैनिकों की यादों को संजोना नहीं, बल्कि उनके परिवारों के त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण को सम्मान देना भी है।
किसी ने विश्व युद्ध तो किसी ने कारगिल में दिया बलिदान:
उड़ान सेवा समिति के पदाधिकारी कर्नल अनिल जून ने बताया कि हमारे तीनों गांव से नौ लोग शहीद हुए हैं। इनमें नूना माजरा के सिपाही मुंशी राम ने 1 फरवरी 1942 को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान शहादत दी। इसी गांव के मेजर रिसाल सिंह जून ने 21 जून 1944 को म्यांमार अभियान के दौरान शहीद हुए थे। वर्ष 1962 में सिपाही रघुवीर सिंह ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए बलिदान दिया। इसके बाद वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में नायब सूबेदार उमेद सिंह और सिपाही राज सिंह ने 10 दिसंबर 1971 को शहादत दी।
ऑपरेशन विजय और रक्षक में दिखाई वीरता:
गांव के पूर्व सरपंच वीरेंद्र ने बताया कि देश की रक्षा में नूना माजरा और आसपास के गांवों के सैनिकों का योगदान भी स्मारक में दर्ज है। देशलपुर गांव के हवलदार जय प्रकाश जून 8 मई 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन विजय में द्रास सेक्टर में शहीद हुए। लौवा खुर्द गांव के ग्रेनेडियर राकेश कुमार ने 16 मार्च 2002 को जम्मू-कश्मीर के राजौरी क्षेत्र में अचानक हुई गोलीबारी का बहादुरी से मुकाबला करते हुए प्राण न्योछावर किए। नूना माजरा के सिपाही राजेश कुमार 3 सितंबर 2001 को जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक के दौरान शहीद हुए। स्मारक में नूना माजरा के लांस दफादार सरदारा सिंह का नाम भी शामिल है।
फोटो-54: गांव नूना माजरा के शहीदी स्मारक में स्थापित किया गया भारतीय सेना का टी-55 टैंक। संवाद
फोटो-55: गांव नूना माजरा में बनाया गया शहीदी स्मारक। संवाद

फोटो-54: गांव नूना माजरा के शहीदी स्मारक में स्थापित किया गया भारतीय सेना का टी-55 टैंक। संवाद