{"_id":"5ab8c06b4f1c1b094a8b7541","slug":"rajwardhan-singh-rathore-in-amar-ujala-dialogue-program","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमर उजाला संवाद: राज्यवर्धन सिंह राठौर की जुबानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमर उजाला संवाद: राज्यवर्धन सिंह राठौर की जुबानी
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 27 Mar 2018 09:11 AM IST
विज्ञापन
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में राज्यवर्धन सिंह राठौर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्रीय खेल एवं युवा मामलों के मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा यह मेरा पहला मौका है जब कानपुर आया हूं। इसके लिए मैं कानपुर वालों को धन्यवाद देता हूं। उन्होंने खेलों के महत्व पर कहा कि खेल का मैदान ही होता है जहां पर खिलाड़ी गिरकर फिर से खड़ा होना सीखता है।
उन्होंने अभिभावकों के बारे में भी कहा कि वो जब स्कूल जाते हैं तो फिजिक्स टीचर से मिलने हैं, भूगोल के टीचर से मिलते हैं पर पीटी के टीचर से नहीं मिलते हैं। जबकि खेल के मैदान में भी खिलाड़ी को काफी कुछ सीखने का मौका मिलता है।
राज्यवर्धन सिंह राठौर ने बताया कि जब मैंने 1998 में शूटिंग शुरू की तब मेरी उम्र 28 साल की थी। मैंने शूटिंग राइफल कभी नहीं देखी थी। जब भी मैं स्पॉसर के लिए जाता तो मुझसे कहा जाता कि हम क्रिकेट को स्पांसर दे देंगे पर आपको नहीं दे सकते, तब मैंने अमेरिका में एक दोस्त को मेल किया और कहा कि यहां हालात अच्छे नहीं है, परिस्थितियां अच्छी नहीं हैं।
विज्ञापन
उसने मुझे जो जवाब दिया उसने मुझें बहुत प्रेरित किया। उस मेल में कहा था कि आपके हालात हमेशा बदलते रहेंगे, उतार-चढ़ाव लगे रहेंगे पर इन हालात में आपके निर्णय जो होंगे उसी के अनुसार आपका भविष्य होगा। इसलिए हालात ज्यादा मायने नहीं रखते, जज्बा मायने रखता है।
विज्ञापन
उन्होंने अभिभावकों के बारे में भी कहा कि वो जब स्कूल जाते हैं तो फिजिक्स टीचर से मिलने हैं, भूगोल के टीचर से मिलते हैं पर पीटी के टीचर से नहीं मिलते हैं। जबकि खेल के मैदान में भी खिलाड़ी को काफी कुछ सीखने का मौका मिलता है।
विज्ञापन
राज्यवर्धन सिंह राठौर ने बताया कि जब मैंने 1998 में शूटिंग शुरू की तब मेरी उम्र 28 साल की थी। मैंने शूटिंग राइफल कभी नहीं देखी थी। जब भी मैं स्पॉसर के लिए जाता तो मुझसे कहा जाता कि हम क्रिकेट को स्पांसर दे देंगे पर आपको नहीं दे सकते, तब मैंने अमेरिका में एक दोस्त को मेल किया और कहा कि यहां हालात अच्छे नहीं है, परिस्थितियां अच्छी नहीं हैं।
विज्ञापन
उसने मुझे जो जवाब दिया उसने मुझें बहुत प्रेरित किया। उस मेल में कहा था कि आपके हालात हमेशा बदलते रहेंगे, उतार-चढ़ाव लगे रहेंगे पर इन हालात में आपके निर्णय जो होंगे उसी के अनुसार आपका भविष्य होगा। इसलिए हालात ज्यादा मायने नहीं रखते, जज्बा मायने रखता है।