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नेहरू कॉलेज उत्सव का समापन, विरासत और संस्कृति पर हुई चर्चा
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28jjrp20- राजकीय नेहरू कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नृत्य प्रस्तुति करती छात्रा। स्रोत :
झज्जर। राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू कॉलेज में आयोजित ‘हरियाणा : विरासत, वर्तमान और विमर्श’ कार्यक्रम का बुधवार को समापन हुआ। हरियाणा साहित्य उत्सव के तहत हुए कार्यक्रम में शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक विषयों पर विचार साझा किए गए। विद्यार्थियों ने लोकनृत्य और हरियाणवी गीत-संगीत की प्रस्तुतियां दीं।
महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. खजान सिंह गुलिया मुख्य अतिथि रहे। प्राचार्य प्रो. दलबीर सिंह ने उनका अभिनंदन किया। डॉ. गुलिया ने कॉलेज के प्रथम बैच के विद्यार्थी के रूप में अपने अनुभव साझा किए और हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
पहले सत्र में डॉ. मीनाक्षी और डॉ. प्रीति रानी ने शिक्षा को रोजगारपरक बनाने तथा दैनिक उपयोग की वस्तुओं में हानिकारक रसायनों से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक किया। दूसरे सत्र में डॉ. कविता ने हरियाणा की विरासत के संरक्षण और गुरुकुल, झज्जर स्थित संग्रहालय को सुरक्षित रखने के प्रयासों की जानकारी दी। विद्यार्थियों जयदीप, तन्नू और रोहित ने भी संग्रहालय के महत्व पर विचार रखे।
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तीसरे सत्र में सेवानिवृत्त कर्नल योगेंद्र सिंह ने ‘कैंसल कल्चर और पीड़ित होने की राजनीति’ विषय पर व्याख्यान दिया। लोक कलाकार हरविंदर मलिक ने हरियाणवी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। प्रारंभ शिक्षण संस्थान, झज्जर की प्राचार्य डॉ. संतोष, प्राध्यापिका डॉ. रीना और कवयित्री सुनीता करोथवाल ने कविताएं प्रस्तुत कीं। डॉ. कविता ने सुनीता करोथवाल की काव्य यात्रा पर प्रकाश डाला।
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महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. खजान सिंह गुलिया मुख्य अतिथि रहे। प्राचार्य प्रो. दलबीर सिंह ने उनका अभिनंदन किया। डॉ. गुलिया ने कॉलेज के प्रथम बैच के विद्यार्थी के रूप में अपने अनुभव साझा किए और हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
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पहले सत्र में डॉ. मीनाक्षी और डॉ. प्रीति रानी ने शिक्षा को रोजगारपरक बनाने तथा दैनिक उपयोग की वस्तुओं में हानिकारक रसायनों से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक किया। दूसरे सत्र में डॉ. कविता ने हरियाणा की विरासत के संरक्षण और गुरुकुल, झज्जर स्थित संग्रहालय को सुरक्षित रखने के प्रयासों की जानकारी दी। विद्यार्थियों जयदीप, तन्नू और रोहित ने भी संग्रहालय के महत्व पर विचार रखे।
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तीसरे सत्र में सेवानिवृत्त कर्नल योगेंद्र सिंह ने ‘कैंसल कल्चर और पीड़ित होने की राजनीति’ विषय पर व्याख्यान दिया। लोक कलाकार हरविंदर मलिक ने हरियाणवी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। प्रारंभ शिक्षण संस्थान, झज्जर की प्राचार्य डॉ. संतोष, प्राध्यापिका डॉ. रीना और कवयित्री सुनीता करोथवाल ने कविताएं प्रस्तुत कीं। डॉ. कविता ने सुनीता करोथवाल की काव्य यात्रा पर प्रकाश डाला।