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55 साल बाद जियोलॉजी विभाग को मिली महिला टीचर

Mon, 23 May 2016 10:24 AM IST
शैलेश अरोड़ा/अमरउजाला, लखनऊ
शैलेश अरोड़ा/अमरउजाला, लखनऊ Updated Mon, 23 May 2016 10:24 AM IST
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lady teacher appointed in geology department in lucknow university
डॉ. पूर्णिमा श्रीवास्तव - फोटो : amar ujala

इसे महिला सशक्तीकरण कहें या बदलाव की बयार कि लखनऊ विश्वविद्यालय के जियोलॉजी विभाग में लगभग 55 साल के बाद किसी स्थायी महिला टीचर की नियुक्ति की गई है। डॉ. पूर्णिमा श्रीवास्तव को 1943 में स्थापित इस विभाग की दूसरी महिला टीचर  बनने का अवसर मिला है। 

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इससे पहले 1950 के दशक में यहां डॉ. नीरजा अवस्थी नाम की शिक्षिका हुआ करती थीं, लेकिन वह भी कुछ समय बाद दूसरी जगह चली गईं। उसके बाद कभी किसी महिला की नियुक्ति नहीं हुई। वर्तमान में विभाग में शिक्षकों के 15 में से 11 पद भरे हुए हैं, जबकि एक शिक्षक को नियुक्ति पत्र तो जारी हो चुका, लेकिन जॉइनिंग बाकी है। 
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इन शिक्षकों में डॉ. पूर्णिमा इकलौती महिला हैं, जिन्हें विवि ने इसी साल फरवरी में अपॉइंट किया है। हालांकि, उन्हें यह नियुक्ति 56 वर्ष की उम्र में मिली जबकि उनके पास मात्र छह साल का ही सेवाकाल बचा है।‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में डॉ. पूर्णिमा ने बताया कि इस विभाग में फील्ड वर्क काफी अधिक होता है। 
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इसीलिए वर्षों से विवि प्रशासन व विभाग के पुराने शिक्षकों की मानसिकता रही कि एक महिला यहां कार्य करने के लिए उचित नहीं। जबकि वास्तविकता यह है कि इसी विभाग से निकली छात्राएं आज जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया सहित कई संस्थानों में कार्यरत हैं। 

उनका कहना है कि यदि ऐसी ही मानसिकता है तो इस विभाग में छात्राओं को पढ़ाया ही क्यों जाता है। हालांकि, डॉ. पूर्णिमा का यह भी मानना है कि ऐसी मानसिकता रखने वाले शिक्षक एक-एक कर यहां से सेवानिवृत्त होते गए। 

डॉ. पूर्णिमा का लक्ष्य है कि वह अगले छह साल में खुद को इस तरह साबित करें कि भविष्य में जब कोई और इस विभाग में नियुक्ति के लिए आवेदन करे तो कोई सिर्फ इसलिए सवाल न उठा सके कि वह एक महिला है। 

डॉ. पूर्णिमा कर रही थीं विवि से रिसर्च प्रोजेक्ट

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डॉ. पूर्णिमा श्रीवास्तव - फोटो : amar ujala

डॉ. पूर्णिमा कहती हैं कि 1982 में जब उन्होंने एलयू के जियोलाजी विभाग से एमएससी की तो यहां केवल तीन छात्राएं थीं। लेकिन, आज यहां 60 फीसदी से अधिक छात्राएं हैं। 

अधिकतर अपनी हर बात या समस्या सभी से शेयर नहीं करती, लेकिन यदि उनके विभाग में महिला टीचर होगी तो वह आसानी से हर बात कर सकती हैं। डॉ. पूर्णिमा ने एमएससी के बाद यहीं से 1991 में पीएचडी की। अब तक इनके 35 रिसर्च पेपर प्रकाशित हो चुके हैं, जिसमें से 19 अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में शामिल हैं। 

लविवि के कुलपति प्रो. एसबी निमसे का कहना है डॉ. पूर्णिमा लंबे समय से विवि के जियोलॉजी विभाग में रिसर्च प्रोजेक्ट कर रही थीं। यह अलग बात है कि उनको कभी शिक्षक पद पर भर्ती का अवसर नहीं मिला। 

इस साल जब साक्षात्कार में सभी के बायोडाटा आए तो उनका प्रोफाइल काफी स्ट्रॉन्ग था। फील्ड वर्क के लिए पुरुष और महिला दोनों ही टीचर्स की जरूरत होती है। वैसे भी आज महिलाएं किसी से पीछे नहीं।

जियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विभूति राय का कहना है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि यह कुछ पुराने लोगों की मानसिकता ही थी जो इतने सालों से विभाग में परमानेंट महिला फैकल्टी नहीं थी।

नियमानुसार फील्ड विजिट के लिए छात्राओं के साथ महिला टीचर का होना जरूरी है। हमारे यहां एमएससी में 42 स्टूडेंट्स के बैच में 22 छात्राएं हैं। अब फील्ड विजिट में काफी आसानी होगी।

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