गंभीर बीमारी से ग्रसित भ्रुण के गर्भपात के लिए एम्स को मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश -23 सप्ताह के भ्रुण को कई गंभीर बीमारियां होने के कारण मां ने हाईकोर्ट से लगाई गर्भपात की गुहार अमर उजाला ब्यूरो नई दिल्ली, 18 अप्रैल हाईकोर्ट ने 23 सप्ताह के भ्रुण का गर्भपात करने के संबंध में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को मेडिकल बोर्ड बनाकर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इस याचिका में कहा गया है कि महिला के पेट में पल रहा भ्रुण कई ऐसी बीमारियों से ग्रसित है, जिसके पैदा होने के बाद उसकी कई सर्जरी करनी होेंगी, जिससे उसकी जान बचने की संभावना भी कम होगी। न्यायमूर्ति जेआर मिधा और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने याचिका पर संज्ञान लिया। इस याचिका के संबंध में वकील विकास वालिया ने दलील दी कि महिला 29 वर्ष की है और यह उसका पहला गर्भ है। महिला और उसके पति को बच्चे की रूटीन जांच के दौरान डाॅक्टरों द्वारा बताया गया कि भ्रुण में कई मेडिकल अबनाॅर्मलिटीज हैं, जिस कारण बच्चे के पैदा होने के बाद ही उसकी कई सर्जरी करनी होंगी, लेकिन इन सर्जरी से उसकी जान बचेगी या नहीं, इस बार में कुछ कहा नहीं जा सकता। उन्हें बताया कि गया कि उनका बच्चा गर्भ में इकोजेनिक बोवल और हैपेटिक कैल्सिफिकेशन नामक बीमारी से ग्रसित है। इसलिए उन्हें बताया गया कि दंपति अगर इस बच्चे को पैदा करते हैं तो उसकी बीमारियों के कारण बच्चे को काफी पीड़ा से गुजरना होगा, लेकिन भ्रुण 20 सप्ताह से ज्यादा का होने के कारण गर्भपात करने से इंकार कर दिया गया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पीठ ने एम्स को निर्देश दिया कि वह भ्रुण और उसकी मां की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन करे। मेडिकल बोर्ड यह बताए कि क्या 23 सप्ताह के भु्रण का गर्भपात किया जा सकता है। इसके साथ ही बच्चे की मेडिकल अबनाॅर्मलिटी की जांच के लिए भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि मामले की गंभीरता को और ठीक से जाना जा सके। पीठ ने कहा िकइस संबंध में 3 दिन के भीतर बंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश की जाए, ताकि मामले में और ज्यादा देरी का सामना ना करना पड़े। -------- अरुण कुमार