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मनरेगा मजदूरों के कर्ज तले दबी सरकार
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 08 Oct 2016 08:20 PM IST
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मनरेगा के तहत काम करते मजदूर
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम पर भी बजट का साया मड़रा रहा है। यही वजह है कि जाब कार्ड धारकों ने योजना के तहत काम किया लेकिन जब भुगतान की बारी आई तो बजट की कमी आड़े आ गई। अधिकारियों के चक्कर भी लगाए जा रहे है लेकिन कोई फायदा नहीं। हर बार यही जवाब मिलता कि बजट आते ही भुगतान किया जाएगा।
मजदूरी अटक जाने की वजह से आगे काम करने के लिए मजदूर तैयार नहीं हो रहे है। मौजूदा समय में तकरीवन 10 हजार जॉब कार्ड धारक है जो दो करोड़ 69 लाख 81 हजार रुपये की मजदूरी कर चुके है लेकिन अभी तक खाते में फूटी कौड़ी नहीं आई है। गांव से मजदूरों का पलायन रोकने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम लागू किया गया।
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मजदूरी अटक जाने की वजह से आगे काम करने के लिए मजदूर तैयार नहीं हो रहे है। मौजूदा समय में तकरीवन 10 हजार जॉब कार्ड धारक है जो दो करोड़ 69 लाख 81 हजार रुपये की मजदूरी कर चुके है लेकिन अभी तक खाते में फूटी कौड़ी नहीं आई है। गांव से मजदूरों का पलायन रोकने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम लागू किया गया।
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मनरेगा के तहत होती है 100 दिन के काम की गारंटी
नहर बनाते मनरेगा मजदूर
इसके तहत गांव से पांच किमी की परधि में जॉब कार्ड धारक मजदूर को रोजगार उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था की गई। योजना पर काम शुरू हुआ तो जनपद में अब तक 191505 मजदूर पंजीकृत किए गए।
मौजूदा वित्तीय वर्ष में 92524 जॉब कार्ड धारकों ने काम की डिमांड की थी, जिसमें से 77035 को काम भी दिया गया लेकिन तकरीवन 10000 ऐसे मजदूर है जिनका भुगतान अटका हुआ है। किसी का 10 दिन का तो किसी का 15 दिन मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ। बजट की कमी सामने आने से अब यह मजदूर मनरेगा का काम करने को तैयार नहीं हो रहे है। इसकी वजह से गांव में मनरेगा कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे है।
100 दिन काम की गारंटी
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत गांव में ही 100 दिन काम हर मजदूर को मिले इसका प्रावधान है। आठ घंटे काम करने वाले जाब कार्ड धारक को 174 रुपये मजदूरी दी जाती है। अब तक 2028 जाब कार्ड धारकों को मौजूदा वित्तीय वर्ष में 100 दिन काम दिया गया है।
मौजूदा वित्तीय वर्ष में 92524 जॉब कार्ड धारकों ने काम की डिमांड की थी, जिसमें से 77035 को काम भी दिया गया लेकिन तकरीवन 10000 ऐसे मजदूर है जिनका भुगतान अटका हुआ है। किसी का 10 दिन का तो किसी का 15 दिन मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ। बजट की कमी सामने आने से अब यह मजदूर मनरेगा का काम करने को तैयार नहीं हो रहे है। इसकी वजह से गांव में मनरेगा कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे है।
100 दिन काम की गारंटी
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत गांव में ही 100 दिन काम हर मजदूर को मिले इसका प्रावधान है। आठ घंटे काम करने वाले जाब कार्ड धारक को 174 रुपये मजदूरी दी जाती है। अब तक 2028 जाब कार्ड धारकों को मौजूदा वित्तीय वर्ष में 100 दिन काम दिया गया है।