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नोटबंदी के बाद 90 फीसदी तक गिरा प्रॉपर्टी रजिस्ट्री का धंधा, सरकारी खजाने पर भी पड़ा असर

Thu, 17 Nov 2016 12:11 AM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Thu, 17 Nov 2016 12:11 AM IST
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demonetization effected property registry business up to 90%

500 और 1000 रुपये के नोटों पर पाबंदी के बाद प्रॉपर्टी रजिस्ट्री का धंधा मंदा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले के बाद साइबर सिटी में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री 90 फीसदी तक घट गई है। इसका असर अब सरकारी खजाने पर पड़ने लगा है।

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गुरुग्राम के जिस तहसील दफ्तर में रजिस्ट्री के लिए लोगों की लंबी लाइनें लगतीं थीं, अब वहां केवल सन्नाटा पसरा है। केवल दस फीसदी लोग वहां रजिस्ट्री कराने के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें गिफ्ट रजिस्ट्री, ट्रस्ट और ट्रांसफर रजिस्ट्री मुख्य रूप से शामिल हैं।
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गुरुग्राम जिले में पांच तहसील गुरुग्राम, मानेसर, सोहना, पटौदी और फर्रूखनगर सब-रजिस्ट्रार में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री होती थी। इन पांच तहसीलों में औसतन 3350 रजिस्ट्री प्रतिदिन होती थी।
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इनमें सबसे ज्यादा रजिस्ट्री गुरुग्राम और सोहना में होती थी। इनमें करीब 70 फीसदी रजिस्ट्री केवल प्रॉपर्टी की होते थे। इनमें रिहायशी, कमर्शियल, फार्म हाउस और कृषि योग्य भूमि शामिल है।

नोटबंदी के बाद अब इसमें भारी गिरावट आ गई है। करीब 90 फीसदी प्रॉपर्टी रजिस्ट्री का काम ठप हो गया है। बीपीओ और आईटी हब के लिए मशहूर गुरुग्राम काले धन का गढ़ है। प्रॉपर्टी के कारोबार के जरिये यहां सबसे अधिक काले धन की खपत होती थी।

नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल के अध्यक्ष प्रवीण जैन कहते हैं कि नोटबंदी के बाद रियल एस्टेट कारोबार में जो उछाल आ रहा था वो अब बंद हो गया है। जब बिक्री ही नहीं है तो प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कहां से होगी।

सरकारी खजाने पर भी पड़ रहा है असर

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प्रॉपर्टी रजिस्ट्री पर का धंधा मंदा पड़ने का असर सीधा सरकारी खजाने पर पड़ने लगा है। महिला के नाम रजिस्ट्री होने पर 5 फीसदी, पुरुष के नाम पर रजिस्ट्री होने से 06 फीसदी और संयुक्त रजिस्ट्री होने पर 07 फीसदी स्टांप ड्यूटी मिलती थी। यह सर्कल रेट के आधार पर स्टांप ड्यूटी सरकार वसूलती है। गुरुग्राम में रिहायशी क्षेत्र में 5000 रुपये से लेकर 37000 प्रति वर्ग यार्ड सर्कल रेट है। जिसके बदले सरकार के खजाने में हर दिन करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक रकम आती थी। अब प्रॉपर्टी रजिस्ट्री कम होने से सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ने लगा है। गुरुग्राम उपमंडल की तहसीलदार मीतू धनखड़ का कहना है कि उनके तहसील में 50 फीसदी से अधिक गिरावट आई है। 
 
रजिस्ट्री से जुड़े लोगों का काम चौपट
भले रजिस्ट्री दो लोगों के लेनदेन के बीच होती है, लेकिन इससे कई लोग जुड़े होते थे। स्टांप वेंडर, डीड राइटर, टाइपिस्ट से जुड़े लोग भी इसकी चपेट में आ गए हैं। उनके पास आने वाले कामों में भी 80-90 फीसदी कमी आ गई है। लघु सचिवालय के कोर्ट में बैठने वाले वेंडर श्याम अदलखा बताते हैं कि पहले दिनभर में 250-400 स्टांप पेपर बेच देते थे। बीते एक सप्ताह में 200 से अधिक नहीं बिका है। इसी तरह डीड राइटर का हाल है। 

क्यों प्रॉपर्टी रजिस्ट्री काम हुआ ठप
प्रॉपर्टी रजिस्ट्री कराने वाले वकील योगेश बंसल बताते हैं कि गुरुग्राम में सभी प्रॉपर्टी सर्कल रेट से नहीं बिकती हैं। लोकेशन और खरीददार की हैसियत से दाम तय होता है। सर्कल रेट के हिसाब से प्रॉपर्टी का जितना रेट होता है, उसका तो डीडी या चेक से लेनदेन होता है। बाकी नगदी चलती थी। नोटबंदी के बाद भारी रकम लेने को कोई तैयार नहीं है। इस वजह से अब बिलकुल यह खत्म हो गया है। 
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