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चुनावी गहमागहमी बढ़ने के साथ ही इससे जुड़ा कारोबार चमकने की भी उम्मीद
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 10 Oct 2018 06:20 PM IST
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चुनाव 2018
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पांच राज्य मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार का का जोर-शोर से चल रहा है। ऐसे में कारोबारी जगत भी उम्मीद लगाए बैठा है कि इन चुनावों में उसका भी बेड़ा पार होगा। भले ही अब पहले की तरह बैनर-पोस्टर, रंग-रोगन का काम नहीं होता, लेकिन चुनाव से जुड़ा सामान बिकता ही है।
कारोबारियों के साथ व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी उम्मीद है कि आने वाले दो महीने में उनके दिन बहुरेंगे। चुनाव में सैकड़ों हाथों को रोजगार मिलेगा। खास तौर पर टेंट, होर्डिंग, बैनर, पोस्टर, फ्लेक्स, हलवाई इस मौसम में फायदे की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
इन कामों से बढ़ता है रोजगार
चुनाव के दौरान टेंट और केटरिंग का काम बड़े पैमाने पर बढ़ जाता है। इससे न सिर्फ कंपनियों को बल्कि इससे जुड़े लोगों को भी काम मिलता है। इसी तरह चुनाव के दौरान प्रिटिंग का काम भी बढ़ जाता है। विभिन्न दलों की तरफ से बैनर, पोस्टर, बैज का काम मिलता है जिससे ज्यादा लोगों को काम पर रखना पड़ता है।
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हालांकि चुनाव आयोग की सख्ती के बाद बैनर-पोस्टर के काम में पहले जैसी रौनक नहीं रही, लेकिन चुनाव के दौरान इससे जुड़ा काम बढ़ ही जाता है। वहीं, टेंट के कारोबार में कतई कमी नहीं दिखाई देती क्योंकि हर जनसभा-रैली में इसके बिना काम ही नहीं बनता।
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कारोबारियों के साथ व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी उम्मीद है कि आने वाले दो महीने में उनके दिन बहुरेंगे। चुनाव में सैकड़ों हाथों को रोजगार मिलेगा। खास तौर पर टेंट, होर्डिंग, बैनर, पोस्टर, फ्लेक्स, हलवाई इस मौसम में फायदे की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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इन कामों से बढ़ता है रोजगार
चुनाव के दौरान टेंट और केटरिंग का काम बड़े पैमाने पर बढ़ जाता है। इससे न सिर्फ कंपनियों को बल्कि इससे जुड़े लोगों को भी काम मिलता है। इसी तरह चुनाव के दौरान प्रिटिंग का काम भी बढ़ जाता है। विभिन्न दलों की तरफ से बैनर, पोस्टर, बैज का काम मिलता है जिससे ज्यादा लोगों को काम पर रखना पड़ता है।
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हालांकि चुनाव आयोग की सख्ती के बाद बैनर-पोस्टर के काम में पहले जैसी रौनक नहीं रही, लेकिन चुनाव के दौरान इससे जुड़ा काम बढ़ ही जाता है। वहीं, टेंट के कारोबार में कतई कमी नहीं दिखाई देती क्योंकि हर जनसभा-रैली में इसके बिना काम ही नहीं बनता।