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कृषि विभाग को भवन मिला नया, अधिकारी हो गए गायब
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 05 Feb 2017 02:18 AM IST
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कृषि विभाग को भवन मिला नया
- फोटो : amar ujala
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जिले का कृषि विभाग इन दिनों पूरी तरह से धर्म खाते में चल रहा है। वर्तमान में यहां न तो विभाग के मुखिया हैं और न लोकल स्तर पर उनका चार्ज किसी के पास है। ऊपर से बायोमीट्रिक मशीन भी खराब है, जिससे अन्य कर्मचारियों के आने-जाने का समय तय नहीं है। इन खामियों का खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है। किसान अपनी समस्या लेकर किस अधिकारी के पास जाएं उन्हें समझ में नहीं आ रहा है। नये भवन में कौन सा विभाग किधर है और किस विभाग का अधिकारी कहां बैठता है इसकी भी जानकारी देने वाला कोई सूचना पट तक नहीं लगाया गया है। इससे किसानों को खासी दिक्कत होती है।
कृषि भवन एवं किसान क्लब और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को नया भवन तो मिल गया, लेकिन यहां की बदहाली पुरानी है। सूत्रों की मानें तो यहां कृषि उपनिदेशक पद की जिम्मेदारी डॉ. चांद राम के पास है। बताया जा रहा है कि वे दो माह की छुट्टी पर हैं। उनका चार्ज अभी तक न तो किसी अन्य अधिकारी को मिला है और न विभाग के ही किसी अधिकारी को दिया गया है। जबकि अधिकारी के लिए फरवरी और मार्च माह सबसे अधिक व्यस्तता वाला होता है। इस समय बजट और बिल संबंधी कार्य के अलावा खाद, बीज बिक्री करने वालों के लाइसेंस के काम अटक जाते हैं। इसके अलावा क्वालिटी कंट्रोल इंचार्ज छुट्टी पर हैं और असिस्टेंट केन डेवलपमेंट आफिसर भी एक माह की छुट्टी पर हैं। एसडीओ एग्रीक्लचर पद का चार्ज पानीपत के अधिकारी के पास है तो असिस्टेंट सोएल कंजरवेटिव आफिसर का चार्ज भी किसी अन्य जिले के अधिकारी के पास है। सोएल टेस्टिंग आफिसर का पद खाली है। इसके अलावा जिला सोएल कंजरवेटिव अधिकारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। विभाग में असिस्टेंट प्लांट प्रोडक्शन ऑफिसर, असिस्टेंट एग्रीक्लचर इंजीनियर, असिस्टेंट स्टेटिकल आफिसर, हाइड्रोलॉजिस्ट ही मौजूद हैं।
भूलभुलैया में फंस जाता है किसान
कृषि एवं कल्याण विभाग में किसान जमीन, पानी, बीज, लाइसेंस और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए आते हैं, लेकिन सीट पर किसी अधिकारी के नहीं मिलने के चलते किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। यही नहीं, नये भवन में कौन विभाग किधर है और कौन अधिकारी कहां बैठता है इसकी भी कोई सूचना नहीं लगाई गई है। अपनी समस्या लेकर आने वाला किसान यहां की भूलभुलैया में फंस कर रह जाता है।
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किसान पहले आएं कृषि विभाग फिर जाएं अनाज मंडी
कृषि विभाग के कार्यालय किसी काम से आने वाले किसानों को खाद और बीज के लिए अनाज मंडी की दौड़ लगानी पड़ती है। इसकी वजह यह है कि खाद और बीज विभाग के दफ्तर में नहीं मिलता है। इस वजह से किसानों को खासी परेशानी होती है। सूत्रों की मानें तो विभाग ने शासन प्रशासन से आग्रह किया है कि किसानों की सहूलियत के लिए हरियाणा बीज विकास निगम और हरियाणा लैंड रिक्लेमेशन एंड डेवलपमेंट कारपोरेशन को एक साथ कर दिया जाए। इससे किसानों को कृषि विभाग और अनाज मंडी में अलग-अलग जगहों पर भटकना नहीं पड़ेगा।
कमरों में कुर्सी मेज तक नहीं
कृषि विभाग में अधिकारियों का ही टोटा नहीं है। यहां पर दूसरे स्टाफ की भी भारी कमी है। भवन में शिफ्ट होने के बाद कई विभागों के पास बैठने तक की सुविधा नहीं है। जो भी कर्मचारी काम कर रहे हैं वह टूटे-फूटे पुराने फर्नीचर से काम चला रहे हैं। जब किसी के लिए बैठने तक की व्यवस्था नही होगी तो वह काम कैसे करेगा? यही नहीं फाइल आदि रखने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इस कारण कर्मचारी को खासी दिक्कत होती है।
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कृषि भवन एवं किसान क्लब और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को नया भवन तो मिल गया, लेकिन यहां की बदहाली पुरानी है। सूत्रों की मानें तो यहां कृषि उपनिदेशक पद की जिम्मेदारी डॉ. चांद राम के पास है। बताया जा रहा है कि वे दो माह की छुट्टी पर हैं। उनका चार्ज अभी तक न तो किसी अन्य अधिकारी को मिला है और न विभाग के ही किसी अधिकारी को दिया गया है। जबकि अधिकारी के लिए फरवरी और मार्च माह सबसे अधिक व्यस्तता वाला होता है। इस समय बजट और बिल संबंधी कार्य के अलावा खाद, बीज बिक्री करने वालों के लाइसेंस के काम अटक जाते हैं। इसके अलावा क्वालिटी कंट्रोल इंचार्ज छुट्टी पर हैं और असिस्टेंट केन डेवलपमेंट आफिसर भी एक माह की छुट्टी पर हैं। एसडीओ एग्रीक्लचर पद का चार्ज पानीपत के अधिकारी के पास है तो असिस्टेंट सोएल कंजरवेटिव आफिसर का चार्ज भी किसी अन्य जिले के अधिकारी के पास है। सोएल टेस्टिंग आफिसर का पद खाली है। इसके अलावा जिला सोएल कंजरवेटिव अधिकारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। विभाग में असिस्टेंट प्लांट प्रोडक्शन ऑफिसर, असिस्टेंट एग्रीक्लचर इंजीनियर, असिस्टेंट स्टेटिकल आफिसर, हाइड्रोलॉजिस्ट ही मौजूद हैं।
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भूलभुलैया में फंस जाता है किसान
कृषि एवं कल्याण विभाग में किसान जमीन, पानी, बीज, लाइसेंस और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए आते हैं, लेकिन सीट पर किसी अधिकारी के नहीं मिलने के चलते किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। यही नहीं, नये भवन में कौन विभाग किधर है और कौन अधिकारी कहां बैठता है इसकी भी कोई सूचना नहीं लगाई गई है। अपनी समस्या लेकर आने वाला किसान यहां की भूलभुलैया में फंस कर रह जाता है।
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किसान पहले आएं कृषि विभाग फिर जाएं अनाज मंडी
कृषि विभाग के कार्यालय किसी काम से आने वाले किसानों को खाद और बीज के लिए अनाज मंडी की दौड़ लगानी पड़ती है। इसकी वजह यह है कि खाद और बीज विभाग के दफ्तर में नहीं मिलता है। इस वजह से किसानों को खासी परेशानी होती है। सूत्रों की मानें तो विभाग ने शासन प्रशासन से आग्रह किया है कि किसानों की सहूलियत के लिए हरियाणा बीज विकास निगम और हरियाणा लैंड रिक्लेमेशन एंड डेवलपमेंट कारपोरेशन को एक साथ कर दिया जाए। इससे किसानों को कृषि विभाग और अनाज मंडी में अलग-अलग जगहों पर भटकना नहीं पड़ेगा।
कमरों में कुर्सी मेज तक नहीं
कृषि विभाग में अधिकारियों का ही टोटा नहीं है। यहां पर दूसरे स्टाफ की भी भारी कमी है। भवन में शिफ्ट होने के बाद कई विभागों के पास बैठने तक की सुविधा नहीं है। जो भी कर्मचारी काम कर रहे हैं वह टूटे-फूटे पुराने फर्नीचर से काम चला रहे हैं। जब किसी के लिए बैठने तक की व्यवस्था नही होगी तो वह काम कैसे करेगा? यही नहीं फाइल आदि रखने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इस कारण कर्मचारी को खासी दिक्कत होती है।