Agra Road Accident: दो शिफ्ट में रोडवेज बस दौड़ा रहा था एक ही चालक, खड़े क्षतिग्रस्त टैंकर से टकराई, दो की मौत
बस में एक ही चालक था, जबकि 300 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने वाली बसों में दो चालकों की ड्यूटी का नियम है। एक ही चालक दो शिफ्ट में बस दौड़ा रहा था।
विस्तार
कानपुर से आगरा आ रही फोर्ट डिपो की बस हाईवे पर एत्मादपुर में कुबेरपुर के पास बृहस्पतिवार सुबह 6 बजे खड़े क्षतिग्रस्त टैंकर में पीछे से टकरा गई। बस का अगला हिस्सा टैंकर में घुस जाने से दो लोगों की मौत हो गई, 12 यात्री घायल हैं। परिवहन निगम के बुकिंग क्लर्क और एक यात्री की मौत हुई है। इस हादसे में परिवहन अधिकारियों की लापरवाही कम जिम्मेदार नहीं है। बस में एक ही चालक था, जबकि 300 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने वाली बसों में दो चालकों की ड्यूटी का नियम है। एक ही चालक दो शिफ्ट में बस दौड़ा रहा था।
आगरा फोर्ट डिपो की बस आईएसबीटी से बुधवार की शाम छह बजे कानपुर रवाना हुई थी। चालक योगेंद्र प्रताप और परिचालक जितेंद्र थे। कर्मचारियों का कहना है कि बस सुबह औरैया पहुंचती है। शाम चार बजे तक आगरा लौटती है। इसके बाद कानपुर रवाना होती है। देर रात फिर कानपुर से आगरा के लिए भेजी जाती है। चालक किलोमीटर पूरा करने के लिए जोखिम लेकर भी बस चला रहे हैं। इस संबंध में यूपी रोडवेज एंप्लाइज यूनियन के सत्यनरायन शर्मा का कहना है कि 300 किमी से अधिक दूरी की बसों में दो चालकों को ड्यूटी पर भेजा जाना चाहिए, लेकिन परिवहन निगम के अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। बस में एक ही चालक था। इस संबंध में एआरएम आगरा फोर्ट जयकरन सिंह का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है।
परिजन ने किया हंगामा
बस हादसे में मृत राजेश कुमार, आईएसबीटी पर पूछताछ केंद्र में तैनात थे। उनके परिवारीजन का आरोप था कि एक दिन पहले ही वह आवश्यक कार्य से अवकाश लेकर घर आए थे, लेकिन रात में ही डिपो से फोन पहुंचा। कहा कि सुबह छह बजे से बुकिंग पर ड्यूटी है, इस कारण वह रात में ही बस से आगरा के लिए चल दिए। रास्ते में हादसा हो गया। देर शाम को चीरघर पर रोडवेज के अधिकारी पहुंचे तो परिजनों ने आरोप लगाए। हंगामा होने पर रोडवेज अधिकारी चले गए।
ये भी पढ़ें- Firozabad: पति ने किया उत्पीड़न तो इंस्टाग्राम पर युवक को दिल दे बैठी पत्नी, फिर जो हुआ जानकर रह जाएंगे हैरान
झरना नाला हादसे को भूले
आठ जुलाई 2019 में लखनऊ से दिल्ली जा रही अवध डिपो की जनरथ बस यमुना एक्सप्रेसवे पर झरना नाले में गिर गई थी। हादसे में 29 सवारियों की मौत हुई थी। इस हादसे के बाद रात्रिकालीन बसों में दो चालकों की ड्यूटी सहित कई नियम बनाए गए थे, लेकिन कुछ ही दिन बाद परिवहन अधिकारी इन नियमों को भूल गए। बसों में स्पीड गवर्नर, वेदर बल्ब तक नहीं लगाए गए हैं। ज्यादातर साधारण बसें जर्जर हालत में हैं।